एनसीआर के सबसे व्यस्त मार्ग पर जल्द शुरू होगी ध्वनि अवरोधक लगाने की तैयारी, द्वारका एक्सप्रेसवे की तर्ज पर बनेगी व्यवस्था
दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे के आसपास रिहायशी इलाकों में रहने वाले नागरिकों को जल्द ही वाहनों के लगातार शोर से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) इस व्यस्त मार्ग के दोनों किनारों पर नॉइज बैरियर यानी ध्वनि अवरोधक लगाने की एक महत्वपूर्ण योजना पर गंभीरता से काम कर रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, इस पूरी परियोजना की लागत और वित्तीय आकलन के लिए अगले एक महीने का समय तय किया गया है, जिसके बाद इसे धरातल पर उतारने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ाई जाएगी।
द्वारका एक्सप्रेसवे की तर्ज पर विकसित होगी व्यवस्था
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले द्वारका एक्सप्रेसवे पर पहले से ही नॉइज बैरियर स्थापित किए गए हैं, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। वहां इन अवरोधकों के कारण सड़क से गुजरने वाले वाहनों की आवाज आसपास की आवासीय सोसायटियों तक बहुत कम पहुंचती है। इसी सफल मॉडल को आधार बनाते हुए अब दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे पर भी इस प्रणाली को लागू करने का निर्णय लिया गया है। एनएचएआइ के परियोजना निदेशक भवनेश कुमार ने इस संबंध में जानकारी दी है कि एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ नॉइज बैरियर लगाए जाने की दिशा में चरणबद्ध तरीके से काम किया जाएगा। आगामी एक महीने के भीतर इसकी स्थापना पर आने वाले कुल खर्च का विस्तृत आकलन तैयार किया जाएगा, जिसके तुरंत बाद आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू होगी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य भारी यातायात से उत्पन्न होने वाले ध्वनि प्रदूषण के प्रभाव को आवासीय क्षेत्रों से दूर रखना है। प्राधिकरण के अनुसार इस योजना के शुरुआती चरण के लिए किसी विशेष पूर्व सर्वेक्षण की आवश्यकता नहीं समझी गई है, क्योंकि बढ़ते ट्रैफिक दबाव और लगातार बढ़ते शोर को देखते हुए इस पर प्रत्यक्ष रूप से काम शुरू किया जाएगा।
एनसीआर का सबसे व्यस्त मार्ग और निवासियों की समस्याएं
दिल्ली और गुरुग्राम को आपस में जोड़ने वाला यह एक्सप्रेसवे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के सबसे अधिक यातायात घनत्व वाले मार्गों में शुमार है। यहाँ दिन-रात भारी संख्या में छोटे-बड़े व्यावसायिक और निजी वाहनों की आवाजाही बनी रहती है। वाहनों के इंजनों की गड़गड़ाहट, बार-बार बजने वाले हॉर्न और तेज रफ्तार टायरों के कारण उत्पन्न होने वाला शोर सड़क के दोनों तरफ बसी सोसायटियों के निवासियों के लिए लंबे समय से गंभीर सिरदर्द बना हुआ है। लगातार रहने वाले इस कोलाहल के कारण न केवल छोटे बच्चों की पढ़ाई और एकाग्रता पर प्रतिकूल असर पड़ता है, बल्कि रात के वक्त लोगों की नींद में भी बड़ा खलल पड़ता है। स्थानीय लोग लंबे समय से इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने की माँग कर रहे थे।
तकनीकी रूप से कितने असरदार होते हैं नॉइज बैरियर
स्थानीय सेक्टर-15 पार्ट-दो के निवासी और सेवानिवृत्त इंजीनियर विमल वर्मा ने इस योजना का स्वागत करते हुए बताया कि एक्सप्रेसवे पर यातायात का दबाव दिन-प्रतिदिन लगातार बढ़ रहा है और ट्रैफिक जाम के दौरान वाहनों का शोर और अधिक विकट हो जाता है। उनके अनुसार, नॉइज बैरियर सड़क और रिहायशी आबादी के बीच एक प्रभावी ध्वनि अवरोधक दीवार के रूप में कार्य करते हैं। इनकी सही ऊँचाई, वैज्ञानिक बनावट, निर्माण सामग्री और स्थापना स्थल के सटीक चयन से वाहनों की तेज आवाज को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। अनुकूल परिस्थितियों में उच्च गुणवत्ता वाले यह अवरोधक यातायात के शोर को लगभग 15 से 20 डेसिबल तक घटाने में पूरी तरह सक्षम होते हैं, जिससे आसपास के क्षेत्रों में शांति का माहौल बहाल हो सकता है।