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बाजार में फल खरीदते समय ऐसे पहचानें कौन सा ताजा है और कौन सा खराब

बाजार में फल खरीदते समय ऐसे पहचानें कौन सा ताजा है और कौन सा खराब

बाजार जाना और थैला भरकर ताजे फल लेकर आना किसे पसंद नहीं है। सेहतमंद रहने की चाहत में हम सभी अपने घर के किचन को पौष्टिक चीजों से सजाना चाहते हैं। लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि आप ठेले या सुपरमार्केट से जो फल खरीदकर ला रहे हैं, वे वाकई खाने लायक हैं या फिर दुकानदार की चालाकी और चमक-धमक ने आपको चकमा दे दिया है? आज के समय में केवल फलों का रंग, उनका बड़ा आकार या आकर्षक चमक देखकर यह फैसला कर लेना कि वे ताजे और सेहतमंद हैं, एक बहुत बड़ी भूल साबित हो सकता है।

विशेषज्ञों और खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुसार, किसी भी फल की ताजगी का सही अंदाजा लगाने के लिए उसकी बाहरी स्थिति, बनावट, खुशबू और उसके पकने की सही अवस्था को बारीकी से परखना बेहद जरूरी है। आइए आज आपको विस्तार से बताते हैं कि किन आसान तरीकों को अपनाकर आप एकदम सही, फ्रेश और मिलावट या सड़न से दूर फल चुन सकते हैं।

सबसे पहले छिलके और बाहरी सतह को ध्यान से देखें

फल खरीदते समय सबसे पहला काम उसकी बाहरी त्वचा या छिलके का मुआयना करना होना चाहिए। अक्सर लोग केवल ऊपर की परत देखकर फल उठा लेते हैं, लेकिन डीप इंस्पेक्शन बेहद जरूरी है। फलों की सतह पर मौजूद गहरे काले या भूरे धब्बे, किसी तरह की दरारें, सड़ा हुआ कोई हिस्सा, नमी का रिसाव (Leakage) या असामान्य रूप से नरम जगहें इस बात का साफ संकेत होती हैं कि फल अंदर से खराब होना शुरू हो चुका है।

हालांकि, यह भी सच है कि हर छोटा दाग यह साबित नहीं करता कि पूरा फल खराब है, लेकिन फफूंद (Mold), गहरे सड़न के निशान या बड़े पैमाने पर नरम हुए हिस्सों वाले फलों से हमेशा दूरी बनाकर रखनी चाहिए। वैश्विक खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) भी उपभोक्ताओं को यही सलाह देता है कि चोट या नुकसान पहुंचे हुए उत्पादों को खरीदने से बचें, क्योंकि ऐसे हिस्से बैक्टीरिया और फंगस के पनपने का सबसे बड़ा घर होते हैं।

बहुत अधिक नरम फल बन सकते हैं मुसीबत

प्रकृति ने हर फल को एक अलग बनावट (Texture) दी है। इसलिए, दुनिया के हर फल पर नरमी का एक ही पैमाना लागू नहीं किया जा सकता। उदाहरण के लिए, एक पूरी तरह पका हुआ आम या केला अपनी प्राकृतिक अवस्था में थोड़ा नरम हो सकता है, लेकिन अगर आप किसी ऐसे फल को छू रहे हैं जो अपनी किस्म के मुकाबले जरूरत से ज्यादा दबा जा रहा है, तो संभल जाइए।

फल को हमेशा हल्के हाथों से छूकर और दबाकर देखें। यदि वह सामान्य से ज्यादा स्पंजी महसूस हो, गूदेदार लगे या दबाने पर उसकी त्वचा तुरंत फट जाए या पानी छोड़ने लगे, तो समझ लीजिए कि वह सड़ने की कगार पर है। इसके विपरीत, बहुत ज्यादा सख्त या पत्थर जैसा कड़ा फल कई बार अधपका (Unripe) हो सकता है, जो स्वाद में तो खराब होगा ही, साथ ही पेट की समस्याएं भी पैदा कर सकता है। इसलिए फल की प्रजाति को समझकर ही उसे हाथ से परखें।

खुशबू खोल देती है फलों की असलियत के राज

प्रकृति ने पके हुए फलों को एक विशेष और मनमोहक खूशबू से नवाजा है। अगर आपके हाथ में एक सही पका हुआ आम, खरबूजा या अमरूद है, तो उससे एक प्राकृतिक और मीठी महक आएगी जो आपको खुद-ब-खुद अपनी ओर खींचेगी। इसके उलट, यदि किसी फल से खट्टी, तीखी, सड़ी हुई या फफूंद जैसी असामान्य गंध आ रही है, तो बिना एक सेकंड गंवाए उसे अलग रख दें।

हलांकि, केवल खुशबू के भरोसे ही अपना फैसला न छोड़ें। इसे हमेशा फल के रंग, उसकी बनावट और बाहरी छिलके की स्थिति के साथ मिलाकर परखें। यह मिक्स्ड एप्रोच आपको कभी धोखा नहीं खाने देगी।

सिर्फ चमक देखकर फल खरीदने की गलती न करें

बाजार में बिकने वाले सेब या अन्य फल इतने चमकदार और शीशे जैसे साफ क्यों दिखते हैं? क्या यह उनकी असली चमक है? इसका जवाब है- बिल्कुल नहीं। केवल इसलिए कि कोई फल बहुत ज्यादा चमक रहा है, यह उसकी ताजगी की सौ प्रतिशत गारंटी नहीं है। अलग-अलग फलों का नेचुरल मैट या ग्लॉसी लुक अलग होता है।

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के दिशा-निर्देशों के मुताबिक भी कई बार फलों की लंबी शेल्फ लाइफ बढ़ाने और नमी बनाए रखने के लिए उनकी सतह पर फूड-ग्रेड वैक्स या कोटिंग का इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए, सिर्फ चमक के झांसे में न आएं, बल्कि फल की समग्र सेहत को देखें।

वजन और आकार का अनोखा गणित

क्या आपने कभी दो बराबर आकार के संतरों को उठाकर देखा है? उनमें से एक हल्का लग सकता है और दूसरा भारी। फलों की दुनिया में भारी होना अक्सर इस बात का संकेत होता है कि वह अंदर से ज्यादा रसदार (Juicy) और फ्रेश है। खास तौर पर खट्टे फल जैसे कि मौसमी, संतरा या नींबू खरीदते समय उनका वजन और छिलका टटोलना बहुत काम आता है। हालांकि, यह नियम हर फल पर लागू नहीं होता, लेकिन सिट्रस फ्रूट्स के मामले में यह काफी हद तक सटीक बैठता है।

कटे हुए फलों को खरीदते समय बरतें अत्यधिक सावधानी

आजकल बाजार में कटे-छंटे तरबूज, पपीते और खरबूजे या फ्रूट्स बाउल आसानी से मिल जाते हैं, जो दिखने में जितने लुभावने होते हैं, सेहत के लिए उतने ही खतरनाक साबित हो सकते हैं यदि उनकी सही देखभाल न की गई हो। अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) की रिपोर्ट के अनुसार, कटे हुए और पैक किए गए फलों को हमेशा उचित तापमान पर यानी रेफ्रिजरेटेड या बर्फ की तह पर रखा जाना अनिवार्य है।

अगर खुले में रखे कटे फलों पर मक्खियां भिनभिना रही हैं या उनमें हल्का सा भी खट्टापन या फफूंद दिखाई दे, तो उन्हें भूलकर भी न खरीदें। कृषि विभाग (USDA) की चेतावनियों के मुताबिक, फफूंद सिर्फ ऊपरी सतह तक सीमित नहीं रहती, बल्कि नरम फलों के अंदरूनी हिस्सों तक अपनी जड़ें फैला चुकी होती है, जो फूड पॉइजनिंग का कारण बन सकती है।

घर लाने के बाद सही सफाई है सबसे बड़ा बचाव

महज एक अच्छा और ताजा फल बाजार से खरीद लाना ही काफी नहीं है, बल्कि घर पर उसकी सही ग्रूमिंग और हाइजीन का ध्यान रखना भी उतना ही अहम है। घर पहुंचते ही फलों को यूं ही फ्रिज में न ठूंस दें। खाने या काटने से पहले उन्हें साफ बहते हुए पानी (Running Water) के नीचे अच्छी तरह धोना बेहद जरूरी है।

एफडीए और एफएसएसएआई दोनों ही इस बात पर जोर देते हैं कि ताजे फलों और सब्जियों को धोने के लिए कभी भी साबुन, डिटर्जेंट या किसी केमिकल सैनिटाइज़र का इस्तेमाल न करें, क्योंकि फल का छिद्रयुक्त छिलका इन केमिकल्स को सोख सकता है। केवल सादा नल का पानी इसके लिए सबसे उत्तम है। यदि फल के किसी हिस्से पर मामूली खरोंच या दाग है, तो चाकू से उस हिस्से को काटकर अलग कर दीजिए। लेकिन अगर फल अंदर तक सड़ चुका है या उस पर फफूंद की परत जम चुकी है, तो उसे बचाने की कोशिश करने के बजाय सीधे कूड़ेदान में डालना ही बुद्धिमानी है।

फल हमारी सेहत की रीढ़ हैं और इनसे मिलने वाले विटामिन और मिनरल्स हमारे इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाते हैं। लेकिन यह तभी संभव है जब हम सही गुणवत्ता वाले फल का सेवन करें। अगली बार जब आप बाजार जाएं, तो केवल आंख मूंदकर दुकानदार के भरोसे न रहें, बल्कि अपने ज्ञान का इस्तेमाल करें। छिलके की जांच, हल्का दबाव, खुशबू और वजन जैसे छोटे-छोटे पैमाने आपको हमेशा मिलावट और सड़े-गले फलों से बचाएंगे। स्वस्थ खाइए, सुरक्षित रहिए!

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रोशनी गुप्ता

रोशनी गुप्ता

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रोशनी गुप्ता जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं।...

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