भारतीय राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर से सरगर्मी तेज हो गई है। मामला चुनाव आयोग और एसआईआर (SIR) से जुड़ी कथित गड़बड़ियों का है, जिस पर विपक्षी खेमे में घमासान मचा हुआ है। सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस पार्टी की एक अहम उच्चस्तरीय बैठक हुई, जिसमें आगामी राजनीतिक अभियानों की रूपरेखा और रणनीति को अंतिम रूप दिया गया। हालांकि, इस बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या विपक्षी 'INDIA' गठबंधन के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है?
दरअसल, 6 अक्टूबर को होने वाले बहुप्रचारित विरोध प्रदर्शन से आम आदमी पार्टी (AAP) ने अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। आप की इस दूरी ने राजनीतिक विश्लेषकों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। इसके साथ ही, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की पार्टी डीएमके (DMK) के रुख को लेकर भी संशय की स्थिति बनी हुई है। आइए जानते हैं इस पूरी राजनीतिक हलचल के पीछे की अंदरूनी कहानी और कांग्रेस की मास्टरप्लान रणनीति क्या है।
विपक्षी दलों की 30 सितंबर की बैठक और 6 अक्टूबर का मार्च
बीती 30 सितंबर को देश के 19 प्रमुख विपक्षी दलों के शीर्ष नेताओं ने एक साझा बैठक की थी। इस बैठक में आम सहमति से यह घोषणा की गई थी कि तमाम विपक्षी दल मिलकर आगामी 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग के दफ्तर तक एक बड़ा मार्च निकालेंगे। इस मार्च का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रपति से मुलाकात कर वोटर लिस्ट और एसआईआर से जुड़ी कथित गड़बड़ियों के मामलों को जोरदार तरीके से उठाना था।
लेकिन जैसे-जैसे प्रदर्शन की तारीख नजदीक आई, गठबंधन के भीतर दरारें खुलकर सामने आने लगीं। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय सिंह ने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी पार्टी इस विशेष मार्च में शामिल नहीं होगी। संजय सिंह का तर्क है कि इस तरह के विरोध प्रदर्शन देश के अलग-अलग हिस्सों में पहले से ही हो रहे हैं और उनकी पार्टी इसे एक जन-आंदोलन का रूप देना चाहती है, जिसमें किसी एक दल का बैनर न हो। उन्होंने यह भी साफ किया कि चूंकि 6 अक्टूबर का यह आयोजन औपचारिक रूप से 'INDIA' गठबंधन के बैनर तले हो रहा है, इसलिए आप इससे अलग रहकर अपनी स्वतंत्र रणनीति पर काम कर रही है।
राहुल गांधी का आक्रामक तेवर: 'वोट चोरी देशद्रोह है'
कांग्रेस मुख्यालय में हुई सोमवार की मैराथन बैठक में पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे मुख्य रूप से मौजूद रहे। बैठक में राहुल गांधी ने पार्टी के सभी वरिष्ठ नेताओं, प्रदेश प्रभारियों और महासचिवों को दो टूक निर्देश दिया कि चुनाव आयोग के खिलाफ अब किसी भी तरह की नरमी नहीं बरती जानी चाहिए।
राहुल गांधी ने आक्रामक तेवर अपनाते हुए कहा, "प्रदर्शन ऐसा होना चाहिए जिसका सीधा संदेश आम जनता तक पहुंचे। वोट चोरी देशद्रोह के समान है और हमें इस मुद्दे को गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचाना होगा। लोगों को यह एहसास कराना होगा कि उनका सबसे बड़ा लोकतांत्रिक अधिकार यानी उनका मत छीना जा रहा है।" राहुल ने यह भी आरोप लगाया कि वर्तमान निर्वाचन आयोग अब निष्पक्ष संस्था न रहकर 'चीटिंग कमीशन ऑफ इंडिया' की तरह काम कर रहा है।
कांग्रेस का देशव्यापी एक्शन प्लान: कब और क्या होगा?
कांग्रेस पार्टी ने सिर्फ 6 अक्टूबर के एक दिन के प्रदर्शन तक अपनी राजनीति को सीमित नहीं रखा है, बल्कि उसने आने वाले हफ्तों के लिए एक विस्तृत और आक्रामक कार्यक्रम तैयार किया है। पार्टी संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष के स्पष्ट निर्देश हैं कि चुनाव आयोग के खिलाफ तब तक अभियान जारी रखा जाए जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं दे देते।
कांग्रेस के इस देशव्यापी अभियान की रूपरेखा कुछ इस प्रकार है:
- 6 अक्टूबर (दिल्ली चलो यात्रा): चुनाव आयोग के खिलाफ दिल्ली में बड़े स्तर पर प्रदर्शन और यात्रा का आगाज। इसका प्रस्तावित नारा 'वोट बचाओ, देश बचाओ, दोहन रोको' तय किया गया है।
- 10 से 20 अक्टूबर (देश बचाओ-वोट बचाओ अभियान): इस चरण में देश के हर ब्लॉक स्तर पर दो प्रमुख कार्यक्रम होंगे। पार्टी कार्यकर्ता ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हजारों की संख्या में बाइक रैली और साइकिल रैली निकालेंगे। इसके अलावा नवरात्रि के पवित्र दिनों में घर-घर पर्चे बांटकर जनता को जागरूक किया जाएगा।
- 25 अक्टूबर से 25 नवंबर (तीसरा चरण - गांव चौपाल): इस एक महीने के दौरान ग्रामीण इलाकों में बड़े पैमाने पर चौपालें लगाई जाएंगी। कांग्रेस का दावा है कि इस दौरान उन 13.3 करोड़ मतदाताओं की विशेष पहचान की जाएगी जिनके नाम कथित तौर पर वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं। पार्टी के तमाम दिग्गज नेता इसकी व्यक्तिगत रूप से निगरानी करेंगे।
- 1 नवंबर (रामलीला मैदान महा랠ी): राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में एक विशाल रैली का आयोजन किया जाएगा, जिसमें देश भर के कार्यकर्ता जुटेंगे।
- 25 और 26 नवंबर (संविधान दिवस विशेष): संविधान दिवस के अवसर पर दिल्ली के आसपास के छह अलग-अलग रूटों पर 'चलो दिल्ली' कार्यक्रम के तहत छह बड़ी यात्राएं निकाली जाएंगी। कांग्रेस के छह वरिष्ठ नेता इन यात्राओं का नेतृत्व करेंगे, जिसमें हजारों वाहन शामिल होंगे।
एमके स्टालिन और दक्षिण की राजनीति पर टकटकी
एक तरफ जहां कांग्रेस पार्टी अपने दम पर और गठबंधन के सहयोगियों को साथ लेकर आक्रामक रुख अख्तियार कर रही है, वहीं दूसरी तरफ क्षेत्रीय दलों का रुख इस आंदोलन को लेकर असमंजस से भरा है। आप के पीछे हटने के बाद अब सभी की निगाहें तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन पर टिकी हैं।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि क्या डीएमके इस मार्च में खुलकर हिस्सा लेगी या फिर वह भी आम आदमी पार्टी की तरह दूरी बनाए रखेगी। यदि दक्षिण भारत का यह प्रमुख दल इस अभियान से पीछे हटता है, तो यह 'INDIA' गठबंधन की एकजुटता के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है। गठबंधन के भीतर आपसी समन्वय की कमी और सीट शेयरिंग के पुराने विवादों के बीच यह नया गतिरोध आने वाले समय में विपक्षी एकता की एक बड़ी परीक्षा बनने जा रहा है।
निष्कर्ष
चुनावी मौसम से बहुत पहले इस तरह के मुद्दों पर सड़क से लेकर संसद तक घमासान यह बताता है कि आने वाले दिनों में भारतीय राजनीति का तापमान काफी ऊंचा रहने वाला है। कांग्रेस ने जहां जनता के बीच जाकर इस मुद्दे को जमीन पर भुनाने का मास्टर प्लान तैयार कर लिया है, वहीं विपक्षी खेमे में आपसी मतभेद और वैचारिक दूरियां भी जगजाहिर होने लगी हैं। अब देखना यह होगा कि क्या विपक्षी दल अपने वैचारिक मतभेदों को भुलाकर एक मंच पर आ पाते हैं या फिर आने वाले दिनों में इस मोर्चे पर और अधिक बिखराव देखने को मिलेगा।