वैश्विक स्तर पर मची उथल-पुथल, युद्ध के काले साये और आर्थिक अनिश्चितता के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने एक बार फिर अपनी ताकत का लोहा मनवाया है। वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून के दौरान देश की विकास दर (GDP Growth Rate) ने शानदार छलांग लगाते हुए 7.8 प्रतिशत के आंकड़े को छू लिया है। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह विकास दर 6.9 प्रतिशत पर सिमटी थी, यानी इस बार की रफ्तार में साफ तौर पर 0.9 प्रतिशत की ठोस बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस शानदार उपलब्धि के सामने आते ही पूरे देश में उत्साह का माहौल है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद आगे आकर देशवासियों को इस सफलता की बधाई दी है।
युद्ध और संकट के बीच भारत की आर्थिक मजबूती
आज के समय में जब दुनिया के तमाम बड़े देश किसी न किसी युद्ध, ऊर्जा संकट या मंदी के दौर से जूझ रहे हैं, तब भारत का इस तरह से 7.8% की रफ्तार से आगे बढ़ना अपने आप में एक मिसाल बन गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर एक विशेष रील साझा करते हुए अपनी बात रखी। उन्होंने देश की जनता को संबोधित करते हुए कहा कि आज चारों तरफ युद्ध और संकट की खबरें आ रही हैं, लेकिन इस चुनौतीपूर्ण दौर में भी भारत की प्रगति की रफ्तार रुकी नहीं है, बल्कि यह और तेज हुई है।
"आज दुनिया युद्ध में डूबी है, चारों तरफ संकट के बादल हैं, लेकिन इस मुश्किल वक्त में भी भारत ने अपनी संकल्प शक्ति और पुरुषार्थ के बल पर अद्भुत प्रगति की है। यह हर देशवासी के लिए गर्व का क्षण है।" - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
यह आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि भारतीय बाजार, विनिर्माण क्षेत्र (Manufacturing) और सेवा क्षेत्र (Service Sector) वैश्विक झटकों को झेलने में पूरी तरह सक्षम हैं। देश की घरेलू मांग और मजबूत आर्थिक नीतियों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था क्यों बना हुआ है।
प्रधानमंत्री की देशवासियों से बड़ी अपील: स्वदेशी अपनाएं और संयम बरतें
इस शानदार आर्थिक ग्रोथ के जश्न के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशहित में कुछ बेहद अहम और व्यावहारिक अपील भी की हैं। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया है कि वे देश की अर्थव्यवस्था को और अधिक मजबूती देने के लिए तीन बुनियादी बातों पर विशेष ध्यान दें:
- आत्मनिर्भर भारत का संकल्प: देश के भीतर बने उत्पादों (स्वदेशी) को प्राथमिकता दें ताकि स्थानीय उद्योगों और कारीगरों को बढ़ावा मिल सके।
- विदेश यात्राओं से परहेज: यदि बहुत ज्यादा जरूरी न हो, तो फिलहाल गैर-जरूरी विदेशी यात्राओं से बचें ताकि देश का विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत बना रहे।
- सोने की खरीद पर नियंत्रण: वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सोने के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए फिलहाल जरूरत से ज्यादा सोना खरीदने से बचें।
गौर करने वाली बात यह है कि संकट के समय इस तरह की अपील प्रधानमंत्री द्वारा पहले भी की जा चुकी है। जब-जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा संकट या युद्ध जैसे हालात पैदा हुए हैं, तब-तब देश के प्रधानमंत्री ने नागरिकों से संयम बरतने और विदेशी मुद्रा पर पड़ने वाले दबाव को कम करने का आह्वान किया है।
निराशा फैलाने वालों पर तीखा प्रहार
अपनी इस विशेष संदेश में प्रधानमंत्री ने देश के भीतर मौजूद नकारात्मक ताकतों और राजनीतिक विरोधियों पर भी कड़ा निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि एक तरफ जहां पूरा देश हर मोर्चे पर सफलता के नए रिकॉर्ड बना रहा है, वहीं दूसरी तरफ कुछ ऐसे लोग भी हैं जो निराशा के गर्त में डूबे हुए हैं और लगातार झूठ फैलाकर देश में मायूसी का माहौल पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।
हालांकि, देश की जनता ने इन तमाम नकारात्मक बाधाओं को दरकिनार करते हुए अपनी मेहनत और दूरदर्शिता के दम पर 7.8% की यह ऐतिहासिक ग्रोथ हासिल की है। पीएम मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हमें इस गति को किसी भी कीमत पर थमने नहीं देना है। देश को निरंतर आगे बढ़ाना है और इसके लिए 'आत्मनिर्भर भारत' का मंत्र हमारे लिए सबसे बड़ा हथियार है।
भविष्य की राह और आर्थिक विशेषज्ञों का आकलन
वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही के इन आंकड़ों ने तमाम घरेलू और अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों के अनुमानों को भी मजबूती दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कृषि क्षेत्र का प्रदर्शन इसी तरह संतोषजनक रहा और त्योहारी सीजन में घरेलू मांग में तेजी बनी रही, तो आने वाली तिमाहियों में भी देश की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रहेगी। सरकार द्वारा बुनियादी ढांचे (Infrastructure) पर लगातार किया जा रहा भारी निवेश और डिजिटल ट्रांजैक्शन में हो रही बढ़ोतरी इसकी मुख्य वजहें हैं।
अंततः, यह 7.8 प्रतिशत की विकास दर सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह 140 करोड़ से अधिक भारतीयों के उस अटूट विश्वास का परिणाम है, जो हर कठिनाई को पार कर देश को वैश्विक आर्थिक महाशक्ति बनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं।
