सुबह की शांति में गूंजी गोलियों की गड़गड़ाहट जैसी दहशदिन की शुरुआत अक्सर लोग सुकून भरी सैर यानी मॉर्निंग वॉक के साथ करते हैं, ताकि सेहत दुरुस्त रहे और पूरा दिन तरोताजा महसूस हो। लेकिन महाराष्ट्र के उल्हासनगर से एक ऐसी डरावनी घटना सामने आई है जिसने सुबह की इस शांति को चीख-पुकार और दहशत में बदल दिया। यहाँ रोज की तरह टहलने निकले एक जाने-माने बिल्डर को बदमाशों ने सड़कों पर सरेआम गनपॉइंट पर अगवा कर लिया। इस सनसनीखेज वारदात से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया और स्थानीय लोगों के बीच सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैक्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, यह पूरी घटना महाराष्ट्र के ठाणे जिले के तहत आने वाले औद्योगिक शहर उल्हासनगर की है। हर दिन की तरह पीड़ित बिल्डर जयराम निहालानी (बदला हुआ या मूल नाम संदर्भानुसार) अपनी नियमित मॉर्निंग वॉक के लिए घर से निकले थे। वे शहर के एक शांत इलाके में टहल रहे थे, तभी अचानक एक तेज रफ्तार कार उनके पास आकर रुकी।
इससे पहले कि बिल्डर कुछ समझ पाते या वहां से भागने की कोशिश करते, कार से उतरे कुछ हथियारबंद बदमाशों ने उन्हें घेर लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बदमाशों के हाथों में रिवॉल्वर और अन्य धारदार हथियार थे। उन्होंने पिस्तौल की बट और गनपॉइंट के बल पर बिल्डर को जबरन कार के अंदर खींच लिया। यह सब इतनी तेजी से हुआ कि आसपास मौजूद लोग कुछ समझ ही नहीं पाए। बदमाश पलक झपकते ही गाड़ी को भगा ले गए50 लाख रुपये की भारी-भरकम फिरौती की मांग
बिल्डर के अपहरण के कुछ ही घंटों बाद उनके परिवार के पास एक अज्ञात नंबर से फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को कुख्यात अपराधियों का हिस्सा बताया और साफ कर दिया कि यदि बिल्डर को जिंदा देखना चाहते हैं, तो तुरंत 50 लाख रुपये की फिरौती का इंतजाम करना होगा।
फिरौती की इस मांग ने परिवार के पैरों तले जमीन खिसका दी। एक तरफ जहाँ परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था, वहीं दूसरी तरफ समय बहुत कम था और अपराधियों के तेवर बेहद खतरनाक थे। बिना देर किए परिवार ने तुरंत उल्हासनगर पुलिस थाने से संपर्क किया और आपबीती सुनाई।
- खाकी की ताबड़तोड़ कार्रवाई और तकनीकी सर्विलांमामला सीधे तौर पर एक प्रतिष्ठित नागरिक के अपहरण और भारी फिरौती से जुड़ा था, इसलिए पुलिस प्रशासन ने इसे अत्यंत गंभीरता से लिया। स्थानीय पुलिस स्टेशन के साथ-साथ क्राइम ब्रांच की कई विशेष टीमों का गठन किया गया। पुलिस अधिकारियों ने तुरंत एक्शन मोड में आते हुए दो मोर्चों पर काम शुरू किया:तकनीकी जांच (Technical Surveillance): फिरौती के लिए आए फोन कॉल की लोकेशन ट्रेस की जाने लगी। रूट मैपिंग (CCTV Footage Analysis): उल्हासनगर और आसपास के रास्तों पर लगे सैकड़ों सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले गए ताकि अपहरणकर्ताओं की कार का रूट मैप तैयार किया जा सके।
पुलिस की यह मुस्तैदी रंग लाई। महज कुछ ही घंटों के भीतर पुलिस ने अपराधियों के ठिकाने का सुराग लगा लिया। कानून का शिकंजा कसता देख अपहरणकर्ताओं के हौसले पस्त होने लगे।
चंद घंटों में सुरक्षित रिहाई, अपराधियों में दहशत
पुलिस की ताबड़तोड़ दबिश और चौतरफा घेराबंदी से घबराए बदमाशों के पास कोई रास्ता नहीं बचा। आखिरकार, पुलिस के भारी दबाव के चलते अपराधियों ने बिल्डर को सुरक्षित छोड़ने का फैसला किया। पुलिस ने एक सुनसान इलाके से या अपराधियों के चंगुल से बिल्डर को सकुशल मुक्त करा लिया।
बिल्डर के सकुशल घर लौटने पर उनके परिवार ने राहत की सांस ली और पुलिस प्रशासन की कार्यकुशलता की जमकर सराहना की। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस वारदात को अंजाम देने वाले मुख्य आरोपियों की पहचान कर ली गई है और उन्हें पकड़ने के लिए छापेमारी तेज कर दी गई है। कानून हाथ में लेने वाले किसी भी बख्शीश के हकदार नहीं होंगे और जल्द ही सभी सलाखों के पीछे होंगे।सुरक्षा व्यवस्था पर उठ रहे गंभीर सवाल
भले ही पुलिस ने इस हाई-प्रोफाइल किडनैपिंग केस को रिकॉर्ड समय में सुलझा लिया हो और सुरक्षित रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दिया हो, लेकिन इस घटना ने आम नागरिकों के मन में एक बड़ा डर पैदा कर दिया है। सवाल यह उठता है कि क्या अब सुबह की सैर पर निकलना भी सुरक्षित नहीं रहा? अपराधी इतने बेख़ौफ़ कैसे हो गए कि उन्होंने दिनदहाड़े एक कारोबारी का सरेराह अपहरण कर लिया?
स्थानीय नागरिकों और व्यापारी संघों ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि सुबह और शाम के वक्त गश्त (Patrolling) बढ़ाई जाए, ताकि इस तरह की दुस्साहसिक घटनाओं को दोबारा होने से रोका जा सके। फिलहाल, पुलिस इस पूरे सिंडिकेट और अपराधियों के बैकग्राउंड को खंगालने में जुटी हुई है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस साजिश के पीछे और कौन-कौन लोग शामिल थे।
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