वैश्विक कूटनीति के पटल पर भारत का कद एक बार फिर पूरी मजबूती के साथ चमक उठा है। पिछले कई महीनों से सुलग रहे रूस-यूक्रेन महासंग्राम को थामने के लिए अब नई दिल्ली की मध्यस्थता पर दुनिया की निगाहें टिक गई हैं। इस बीच, यूक्रेन की तरफ से एक ऐसा बयान सामने आया है जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज कर दी है। कीव ने मॉस्को के साथ युद्धविराम के लिए भारत की तरफ से रखे गए प्रस्ताव को सबसे शानदार और व्यावहारिक करार दिया है।
यूक्रेन के विदेश मंत्री का बड़ा कबूलनामा
यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान खुलकर इस बात का जिक्र किया कि मौजूदा समय में उनके देश के पास युद्धविराम को लेकर कई देशों के प्लान आए हैं। कीव को कुल चार अलग-अलग प्रस्ताव मिले थे, लेकिन उनमें से भारतीय फॉर्मूला सबसे व्यापक और प्रभावी साबित हुआ है।
सिबिहा के अनुसार, 'यूरोपियन प्रावदा' अखबार को दिए गए बयानों में उन्होंने स्पष्ट किया कि यूक्रेन ऊर्जा ढांचे और काला सागर (Black Sea) से जुड़े सुरक्षा मुद्दों पर युद्धविराम की शर्तों पर विचार करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा, "हमारे पास चार प्रस्ताव हैं। इनमें सबसे व्यापक प्रस्ताव भारत का है। हम ऊर्जा और काला सागर से जुड़े युद्धविराम के लिए तैयार हैं।"
चार देशों के प्रस्तावों में भारत का प्लान क्यों है खास?
यूक्रेनी विदेश मंत्रालय के शीर्ष नेतृत्व के मुताबिक, युद्धविराम के लिए भारत के अलावा तुर्की, मिस्र और संयुक्त राज्य अमेरिका की ओर से भी अलग-अलग रास्ते सुझाए गए थे। हालांकि, कीव की कसौटी पर केवल सैन्य अभियानों को रोकना ही काफी नहीं है, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा और बंदरगाहों के बुनियादी ढांचे को बचाना भी प्राथमिकता है।
- ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर सुरक्षा: भारत के इस प्रस्ताव में पावर प्लांट्स और एनर्जी ग्रिड्स पर हमलों को रोकने पर जोर दिया गया है, जो सर्दी के मौसम में यूक्रेन के लिए जीवन-मरण का सवाल बन चुका है।
- काला सागर की स्थिति: वैश्विक व्यापार और खाद्यान्न आपूर्ति को बहाल रखने के लिए ब्लैक सी के समुद्री मार्गों को सुरक्षित करना इस समझौते का अहम हिस्सा है।
- संतुलित कूटनीति: भारत ने दोनों देशों के बीच बिना किसी पक्षपात के मानवीय दृष्टिकोण और संवाद का रास्ता अपनाने की वकालत की है, जिसे रूस और यूक्रेन दोनों खेमों में सम्मान की नजर से देखा जा रहा है।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की जुबानी भारत की तारीफ
महज यूक्रेन ही नहीं, बल्कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी खुलकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीति की सराहना की है। वल्दाई इंटरनेशनल डिस्कशन क्लब की वार्षिक बैठक के दौरान पुतिन ने स्वीकार किया कि पीएम मोदी इस संघर्ष को समाप्त करने को लेकर बेहद गंभीर हैं और हर द्विपक्षीय बातचीत में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हैं।
पुतिन ने रूसी समाचार एजेंसी TASS के हवाले से कहा था, "प्रधानमंत्री मोदी के पास आपसी तौर पर बातचीत से इस संकट का समाधान खोजने के मकसद से बहुत अच्छे विचार हैं। हमारे बीच घनिष्ठ संबंध हैं और वह लगातार इस संघर्ष को खत्म कराने के लिए व्यक्तिगत प्रयास कर रहे हैं।" याद रहे कि पिछले महीने नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन से ठीक पहले दोनों नेताओं के बीच लंबी मंत्रणा हुई थी, जिसमें शांति पहलों पर विस्तार से चर्चा हुई थी।
क्या कहती है वैश्विक राजनीति?
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की 'स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी' (सामरिक स्वायत्तता) की नीति इस बार दुनिया के लिए उम्मीद की एक नई किरण बनकर उभरी है। पश्चिमी देशों और रूस के बीच जहां गहरी खाई खुदी हुई है, वहीं भारत एकमात्र ऐसा देश है जो मॉस्को और कीव, दोनों राजधानियों में समान रूप से स्वीकार्य है।
यूक्रेन के ताजा रुख से यह साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में शांति वार्ताओं की मेज पर भारतीय प्रस्ताव मुख्य एजेंडा बन सकता है। हालांकि, जमीन पर हालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं और दोनों पक्षों की तरफ से सैन्य तैयारियां जारी हैं, लेकिन कूटनीतिक मोर्चे पर भारत की इस पहल ने युद्ध के अंत की एक धुंधली सी ही सही, लेकिन उम्मीद जरूर जगा दी है।