मध्य पूर्व में जारी संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक बार फिर गाजा पट्टी से दिल दहला देने वाली तस्वीरें और खबरें सामने आ रही हैं। इजरायली सेना द्वारा किए गए ताजा हवाई हमलों में दो मासूम बच्चों समेत कम से कम आठ फिलिस्तीनियों की दर्दनाक मौत हो गई है। इस घटना ने एक बार फिर से इस खूनी संघर्ष के बीच सुलग रही चिंगारी को भड़का दिया है, जिससे इलाके में मानवीय संकट और गहरा गया है।
अंधाधुंध एयरस्ट्राइक्स से कांप उठा गाजा
स्थानीय सूत्रों और चिकित्सा अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, इजरायली युद्धक विमानों ने गाजा के विभिन्न हिस्सों को निशाना बनाकर ताबड़तोड़ बमबारी की। इन हमलों में रिहायशी इलाकों को भी नहीं बख्शा गया, जिसके चलते आम नागरिकों को भारी कीमत चुकानी पड़ी है। मरने वालों में वे परिवार भी शामिल हैं जो अपने ही घरों के भीतर सुरक्षित महसूस कर रहे थे।

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हमले की तीव्रता इतनी अधिक थी कि आसपास की कई इमारतें मलबे के ढेर में तब्दील हो गई हैं। राहत और बचाव कार्य में जुटी टीमों ने मलबे के नीचे से शवों को बाहर निकाला। घायलों की संख्या भी काफी ज्यादा बताई जा रही है, जिनमें से कई की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। स्थानीय अस्पतालों में इमरजेंसी घोषित कर दी गई है और डॉक्टरों की टीम दिन-रात घायलों की जान बचाने में जुटी हुई है।
मासूमों की मौत पर उठा मानवाधिकारों का सवाल
इस ताजा हमले में दो मासूम बच्चों की जान जाने के बाद पूरी दुनिया में एक बार फिर संवेदनाओं का ज्वार उठ गया है। युद्ध के मैदान में बच्चों और महिलाओं की होती मौतों ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों को झकझोर कर रख दिया है। जानकारों का मानना है कि इस तरह के हमलों से शांति स्थापना की दिशा में हो रहे तमाम diplomatic प्रयास धरे के धरे रह जाते हैं।
- हमले का समय: आज तड़के शुरू हुई एयरस्ट्राइक्स।
- प्रभावित क्षेत्र: गाजा पट्टी के घनी आबादी वाले रिहायशी इलाके।
- नुकसान: 8 लोगों की मौत, दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल।
इजरायल और हमास संघर्ष का बढ़ता दायरापिछले कई महीनों से चल रहे इस संघर्ष का कोई स्थाई समाधान निकलता नहीं दिख रहा है। इजरायल का कहना है कि उसका यह सैन्य अभियान देश की सुरक्षा और आतंकवाद के खातले के लिए जरूरी है। वहीं, फिलिस्तीनी पक्ष लगातार इन हमलों को आम नागरिकों का नरसंहार करार दे रहा है। दोनों पक्षों के बीच चल रही इस खूनी जंग में सबसे ज्यादा पिस आम इंसान रहा है, जिनके पास न तो रहने को छत बची है और न ही खाने को पर्याप्त भोजन।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार युद्धविराम की अपील कर रहा है, लेकिन जमीन पर हालात इसके बिल्कुल उलट नजर आ रहे हैं। गाजा के अस्पतालों में दवाओं की कमी, बिजली संकट और बुनियादी सुविधाओं के अभाव ने स्थिति को और भी अधिक भयावह बना दिया है।