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करोड़ों के फ्लैट और दो कौड़ी का ड्रेनेज सिस्टम! बारिश से गुरुग्राम फिर पानी-पानी

करोड़ों के फ्लैट और दो कौड़ी का ड्रेनेज सिस्टम! बारिश से गुरुग्राम फिर पानी-पानी

सोमवार का दिन गुरुग्राम के निवासियों के लिए एक बार फिर से किसी इम्तिहान से कम नहीं रहा। आसमान से बरसी राहत की बूंदें शहर के लोगों के लिए आफत बन गईं। देश की वित्तीय और कॉरपोरेट राजधानी के रूप में अपनी पहचान रखने वाला 'मिलिअम सिटी' कुछ ही घंटों की बारिश में पानी-पानी हो गया। यहां करोड़ों रुपये की कीमत वाले लग्जरी फ्लैट और विला हैं, लेकिन जब बात ड्रेनेज सिस्टम (जल निकासी व्यवस्था) की आती है, तो सारा विकास दो कौड़ी का साबित होता नजर आता है।

झमाझम बारिश और थम गई गुरुग्राम की रफ्तार

सुबह शुरू हुई मूसलाधार बारिश ने कुछ ही मिनटों में सड़कों को समंदर में बदल दिया। स्थिति इतनी भयावह थी कि प्रमुख सड़कें और अंडरपास पूरी तरह डूब गए। वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। गाड़ियां बीच सड़क पर बंद हो गईं, जिससे शहर के मुख्य चौराहों पर कई किलोमीटर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया। ऑफिस जाने वाले लोगों और स्कूली बच्चों को सबसे ज्यादा दुश्वारियों का सामना करना पड़ा।

सोमवार के इस हाल ने एक बार फिर नगर निगम और प्रशासन के उन दावों की हवा निकाल दी, जिनमें मानसून से पहले नाले साफ करने और जलभराव से निपटने के पुख्ता इंतजाम किए जाने की बात कही जाती है। हर साल बारिश के मौसम में यही कहानी दोहराई जाती है, लेकिन सिस्टम अपनी नींद से जागने का नाम नहीं लेता।

इन इलाकों का रहा सबसे बुरा हाल

बारिश के चलते गुरुग्राम के कई पॉश और व्यस्त इलाके जलमग्न हो गए। नीचे दिए गए क्षेत्रों में स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर रही:

  • राजीव चौक और हीरो होंडा चौक: मुख्य मार्गों पर पानी भर जाने से वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
  • सुशांत लोक और गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन: करोड़ों के फ्लैट वाले इन इलाकों में गलियां तालाब बन गईं।
  • नरसिंहपुर और उद्योग विहार: इंडस्ट्रियल एरिया होने के कारण यहां जलभराव से फैक्ट्रियों और दफ्तरों में कामकाज प्रभावित हुआ।
  • दिल्ली-जयपुर हाईवे (NH-48): इस मुख्य हाइवे पर पानी भरने से यातायात कई घंटों तक रेंगता नजर आया।

प्रशासन की एडवाइजरी और वर्क फ्रॉम होम का दौर

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस ने तुरंत हरकत में आते हुए एडवाइजरी जारी की। प्रशासन ने कॉरपोरेट दफ्तरों और निजी कंपनियों को सलाह दी कि वे अपने कर्मचारियों को 'वर्क फ्रॉम होम' (घर से काम) का विकल्प दें, ताकि सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव कम किया जा सके।

प्रशासन की यह एडवाइजरी इस बात का खुला प्रमाण है कि वे भारी बारिश से निपटने में कितने लाचार हैं। समस्या का दीर्घकालिक समाधान ढूंढने के बजाय हर बार वर्क फ्रॉम होम का सहारा लेना अब आम जनता के लिए मजाक बन चुका है।

रियल एस्टेट और बुनियादी ढांचे पर उठ रहे गंभीर सवाल

गुरुग्राम में प्रॉपर्टी के दाम आसमान छू रहे हैं। यहां एक छोटे से फ्लैट की कीमत भी करोड़ों में है। लोग अपनी गाढ़ी कमाई का एक बड़ा हिस्सा लगाकर इन तथाकथित 'लक्जरी' कॉलोनियों में घर खरीदते हैं। लेकिन जैसे ही आसमान में बादल घिरते हैं, इन आलीशान सोसाइटियों के बेसमेंट पानी से भर जाते हैं, लिफ्ट खराब हो जाती हैं और रास्ते पानी में डूब जाते हैं।

सवाल यह उठता है कि क्या करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी आम नागरिक को सिर्फ जलभराव और ट्रैफिक जाम ही मिलेगा? बिल्डर्स और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डिपार्टमेंट की मिलीभगत के कारण प्राकृतिक जल निकास के रास्तों (नैचुरल ड्रेनेज चैनल्स) पर अवैध कब्जे हो चुके हैं, जिसका खामियाजा आज हर आम नागरिक भुगत रहा है।


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अनुराधा दुबे

अनुराधा दुबे

Content Writer (देश खबरें)

अनुराधा दुबे एक समर्पित और अनुभवी कंटेंट राइटर हैं, जो भारत से जुड़ी राजनीतिक, सामाजिक और नीतिगत खबरों को गहराई से समझकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। उन...

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