उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले प्रशासनिक हलचल तेज
लोकतंत्र के सबसे बड़े महापर्व यानी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच उत्तर प्रदेश के औद्योगिक नगर कानपुर से एक बड़ी और हैरान करने वाली खबर सामने आ रही है। चुनाव आयोग की तमाम सख्ती और सुरक्षा के पुख्ता दावों के बीच प्रशासनिक महकमे में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब नियमित जांच के दौरान बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम (EVM) में तकनीकी खामियां पाई गईं।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, कानपुर जिले में मतदान की तैयारियों को अंतिम रूप देने से पहले जब मशीनों की फर्स्ट लेवल चेकिंग (FLC) और तकनीकी परीक्षण की प्रक्रिया शुरू की गई, तो कुल 143 ईवीएम में गड़बड़ी दर्ज की गई। इतनी बड़ी संख्या में मशीनों का खराब निकलना चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों के लिए भी चिंता का विषय बन गया है।
बेंगलुरू से आई विशेष इंजीनियरों की टीम
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला निर्वाचन प्रशासन ने तुरंत चुनाव आयोग के उच्च अधिकारियों को इसकी सूचना दी। स्थिति को संभालने और मशीनों में आई तकनीकी खामी की तह तक जाने के लिए भारत निर्वाचन आयोग ने तुरंत एक्शन लिया है। कर्नाटक की सिलिकॉन वैली कहे जाने वाले बेंगलुरू से इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ECIL) के 12 वरिष्ठ इंजीनियरों की एक विशेष तकनीकी टीम को तुरंत कानपुर रवाना किया गया।
यह विशेषज्ञ टीम पिछले कुछ दिनों से कानपुर के वेयरहाउस और स्ट्रांग रूम में डेरा डाले हुए है। टीम एक-एक मशीन की बारीकी से जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि आखिर इन मशीनों में समस्या कहां आ रही है। क्या यह कोई सॉफ्टवेयर से जुड़ी दिक्कत है या फिर हार्डवेयर में किसी प्रकार की खराबी आई है?
किन कारणों से आ सकती है ईवीएम में खराबी?
चुनावी जानकारों और तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक मशीनों को गोदाम में सुरक्षित रखने के दौरान तापमान, नमी या बैटरी डिस्चार्ज जैसी सामान्य समस्याएं आ सकती हैं। हालांकि, इतनी बड़ी संख्या में मशीनों का एक साथ प्रभावित होना प्रशासनिक लापरवाही की तरफ भी इशारा करता है, जिसकी जांच उच्च स्तर पर की जा रही है।
- बैलेट यूनिट (BU) और कंट्रोल यूनिट (CU): मशीनों के इन दोनों मुख्य हिस्सों के बीच सिंक्रोनाइजेशन की जांच की जा रही है।
- वीवीपैट (VVPAT) मशीनें: पर्ची निकलने वाली मशीनों के प्रिंटर और डिस्प्ले यूनिट का भी विशेष परीक्षण हो रहा है।
- बैटरी बैकअप और सीलिंग: मशीनों की बैटरी की क्षमता और उनकी सुरक्षा सील की अखंडता की भी दोबारा जांच की जा रही है।
प्रशासन का कड़ा पहरा और सुरक्षा व्यवस्था
इस पूरी प्रक्रिया के दौरान पारदर्शिता बनाए रखने के लिए स्थानीय राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया है। सीसीटीवी कैमरों की कड़ी निगरानी में बेंगलुरू से आए इंजीनियर अपनी जांच को अंजाम दे रहे हैं। प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि चुनाव से पहले किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो मशीनें ठीक हो जाएंगी, उन्हें दोबारा से परीक्षण के बाद उपयोग में लाया जाएगा, और जो मशीनें पूरी तरह से ठीक नहीं हो पाएंगी, उन्हें नियमानुसार बदलकर उनकी जगह नई मशीनें मंगाई जाएंगी।
मतदाताओं के मन में उठ रहे सवाल
इस घटना के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर मतदाताओं और राजनीतिक दलों के बीच चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। हालांकि, निर्वाचन आयोग और जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ईवीएम की यह शुरुआती जांच प्रक्रिया चुनाव का ही एक हिस्सा है, ताकि मतदान के दिन किसी भी प्रकार की तकनीकी बाधा से बचा जा सके।
आगामी विधानसभा चुनाव को निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है। बेंगलुरू के इंजीनियरों की रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि इन 143 मशीनों में से कितनी मशीनों को पूरी तरह दुरुस्त किया जा सका है और कितनों को हमेशा के लिए प्रक्रिया से बाहर किया जाएगा।