कानपुर में इंसानियत और रिश्तों को कलंकित कर देने वाली एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने हर किसी की रूह को झकझोर कर रख दिया है। विश्वास के सबसे पवित्र धागे माने जाने वाले 'नाते-रिश्ते' जब भक्षक बन जाएं, तो समाज का ताना-बाना किस कदर खोखला हो चुका है, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। मामला शहर के एक संवेदनशील इलाके से जुड़ा है, जहां एक नाबालिग छात्रा के साथ उसके अपने ही खून ने हैवानियत की सारी हदें पार कर दीं। ननिहाल में रहकर पढ़ाई कर रही एक मासूम बच्ची के साथ उसके मामा और उसके दोस्तों ने कथित तौर पर महीनों तक शारीरिक शोषण किया। इस पूरी घटना में हैरान करने वाली बात यह है कि परिवार के बड़े बुजुर्ग यानी नानी, नाना और मामी भी इस जुल्म में खामोश सहयात्री बने रहे।
कन्नौज में नाना-नानी के घर रहकर पढ़ रही थी पीड़िता
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रावतपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली एक महिला ने अपने ही मायके पक्ष के लोगों के खिलाफ पुलिस में जो शिकायत दी है, उसने सिस्टम और समाज दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। महिला की नौवीं कक्षा में पढ़ने वाली नाबालिग बेटी कन्नौज के तिरवा इलाके में अपने नाना-नानी के पास रहकर अपनी पढ़ाई पूरी कर रही थी। माता-पिता को क्या पता था कि जिस सुरक्षित आशियाने में वे अपनी जिगर के टुकड़े को बेहतर भविष्य के लिए भेज रहे हैं, वही घर उस बच्ची के लिए किसी नरक से भी बदतर साबित होगा।
आरोप है कि नाना-नानी और मामा-मामी की कथित मिलीभगत के साए में रहकर बच्ची पिछले छह महीने से लगातार इस अमानवीय प्रताड़ना का शिकार बनती रही। मामा और उसके कुछ दरिंदा किस्म के दोस्तों ने मिलकर इस नादान बच्ची को अपनी हवस का शिकार बनाया। जब किसी मासूम की जिंदगी से इस तरह का खिलवाड़ होता है, तो उसकी मानसिक और शारीरिक स्थिति पर क्या गुजरती है, इसकी कल्पना करना भी सिहरन पैदा कर देता है।
राज छिपाने के लिए खेला गया खौफनाक खेल
जुल्म की इंतहा तब हो गई जब लगातार शोषण के चलते नाबालिग बच्ची गर्भवती हो गई। जब इस बात की भनक घर के जिम्मेदार लोगों (नाना, नानी, मामा और मामी) को लगी, तो उन्होंने इस अपराध को छुपाने के लिए एक खतरनाक साजिश रची। कानून का दरवाजा खटखटाने या दोषियों को सजा दिलाने के बजाय, उन्होंने जुल्म को पर्दे के पीछे ही दफनाने की ठान ली।
बताया जा रहा है कि जब बच्ची का गर्भ ठहर गया, तो करीब साढ़े चार महीने (4 महीने 20 दिन) का गर्भ होने के बावजूद उसका चुपचाप गर्भपात (Abortion) करवा दिया गया। इस दौरान बच्ची की जान पर क्या बन आई होगी, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है। लेकिन दरिंदों को अपनी खाल बचाने की पड़ी थी। गर्भपात के बाद आरोपी नानी खुद उस पीड़िता को लेकर उसकी मां के घर कानपुर पहुंची, वहां एक दिन रुकी और फिर मौका पाकर रफूचक्कर हो गई।
अस्पताल के फोन कॉल से खुला राज
इस खौफनाक साजिश की परतें तब खुलीं जब एक के बाद एक संदिग्ध फोन कॉल्स आने शुरू हुए। शुरुआत में पीड़िता के नाना ने मां को फोन कर यह झूठी कहानी गढ़ी कि उनकी बेटी गायब हो गई है और मिल नहीं रही है। जब मां ने गुस्से और चिंता में कहा कि अगर मेरी बेटी को कुछ हुआ, तो पूरे परिवार की जिम्मेदारी होगी, तो अगले ही दिन पासा पलट दिया गया।
अगले दिन नानी का फोन आया कि लड़की की तबीयत खराब हो गई है और उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है, इसलिए आकर ले जाओ। मां की खुद की सेहत ठीक नहीं थी, इसलिए वह तुरंत जा पाने में असमर्थ थी। इसके बाद कन्नौज के तिरवा स्थित माधव हॉस्पिटल से एक डॉक्टर का फोन मां के पास आया कि, 'आपकी बेटी अब ठीक है, आकर ले जाइए।' जब मां ने कहा कि वहां तो उसके नाना-नानी मौजूद होंगे, तो अस्पताल से चौंकाने वाला जवाब मिला कि बच्ची अस्पताल में अकेली है।
मां के सामने खोली जुबान, डरी-सहमी बैठी थी बेटी
अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद नानी खुद उस बच्ची को लेकर रावतपुर स्थित उसकी मां के घर पहुंची। यहां एक दिन रुकने के बाद नानी ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि बेटी को पेट में दर्द और बुखार था, अब वह ठीक है बस कुछ दिन दवा चलेगी। नानी के जाने के बाद से ही वह नाबालिग बच्ची बेहद गुमसुम, डरी हुई और सदमे में नजर आ रही थी।
मां का दिल अपनी औलाद की इस हालत को देखकर बेचैन हो उठा। जब मां ने कड़ाई से और प्यार से बेटी से उसकी खामोशी की वजह पूछी, तो बच्ची का सब्र टूट गया। उसने अपनी मां के गले लगकर फफक-फफक कर रोते हुए वह आपबीती सुनाई, जिसे सुनकर मां के पैरों तले जमीन खिसक गई। बच्ची ने बताया कि पिछले छह महीने से उसके साथ क्या-क्या बीता है और किस तरह विरोध करने पर उसे जान से मारने की धमकियां दी जाती थीं।
पुलिस की कार्रवाई और आगे की सुगबुगाहट
रोते-बिलखते परिवार ने जब आरोपियों से संपर्क साधना चाहा, तो सबके फोन स्विच ऑफ मिले। किसी ने भी इस गंभीर मामले पर जवाब देना मुनासिब नहीं समझा। इसके बाद पीड़ित मां अपनी traumatized बेटी को लेकर सीधे रावतपुर थाने पहुंची और लिखित में न्याय की गुहार लगाई।
इस पूरे संवेदनशील और सनसनीखेज प्रकरण पर जब रावतपुर थाना अध्यक्ष कमलेश राय से बात की गई, तो उनका कहना था कि मामला अभी उनके संज्ञान में लाया जा रहा है और तहरीर मिलते ही त्वरित कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का यह भी कहना है कि इस गंभीर अपराध में शामिल एक-एक शख्स को बेनकाब कर सलाखों के पीछे भेजा जाएगा, चाहे वह रिश्ते में कोई भी क्यों न हो।
समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी
यह घटना सिर्फ एक परिवार का आपराधिक मामला नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज के उस नैतिक पतन का आईना है जहां अपने ही घर की बेटियां सुरक्षित नहीं हैं। जब परिवार के संरक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो न्याय की गुहार किससे लगाई जाए? इस खबर ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर हमें कितने ज्यादा सतर्क और संवेदनशील होने की जरूरत है। फिलहाल, पुलिस इस मामले की गहराई से छानबीन कर रही है और मेडिकल रिपोर्ट्स व बयानों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।