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वाराणसी के करसड़ा प्लांट की बदलेगी तस्वीर, 1100 टन कचरे के निपटान की तैयारी

वाराणसी के करसड़ा प्लांट की बदलेगी तस्वीर, 1100 टन कचरे के निपटान की तैयारी

वाराणसी में शहरीकरण के तेज़ रफ्तार और बदलती जीवनशैली के बीच कचरे का पहाड़ एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। इसी समस्या से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए नगर निगम प्रशासन ने अब कमर कस ली है। शहर के सबसे बड़े सॉलिड वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट यानी करसड़ा प्लांट की क्षमता को बढ़ाने का बड़ा फैसला लिया गया है। वर्तमान में शहर से निकलने वाले भारी-भरकम कचरे के आंकड़ों को देखते हुए यह कदम बेहद जरूरी माना जा रहा है।

रविवार को वाराणसी के नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने खुद करसड़ा प्लांट का औचक और स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने प्लांट की कार्यप्रणाली को बारीकी से परखा और कचरा प्रसंस्करण की क्षमता को मौजूदा जरूरतों के हिसाब से अपग्रेड करने के लिए कई सख्त व महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए।

क्यों पड़ी करसड़ा प्लांट की क्षमता बढ़ाने की जरूरत?

किसी भी शहर की स्वच्छता व्यवस्था इस बात पर निर्भर करती है कि वहां से निकलने वाले कचरे का निस्तारण कितनी तेजी और वैज्ञानिक तरीके से होता है। वाराणसी में पिछले कुछ समय में कचरे की मात्रा में अप्रत्याशित उछाल आया है।

आंकड़ों के मुताबिक, पहले शहर भर से रोजाना औसतन 600 से 700 टन कूड़ा ही करसड़ा प्लांट तक पहुंच पाता था। लेकिन बदलते समय, आबादी के विस्तार और शहरी गतिविधियों के बढ़ने के कारण यह आंकड़ा अब सीधे बढ़कर लगभग 1100 टन प्रतिदिन तक पहुंच चुका है। कचरे की मात्रा दोगुनी के करीब पहुंचने से पुराने सेटअप पर भारी दबाव पड़ रहा था, जिसे दूर करने के लिए अब बुनियादी ढांचे में विस्तार किया जा रहा है।

अतिरिक्त ट्रॉमेल और आरडीएफ लाइन स्थापना के निर्देश

बढ़े हुए 1100 टन कचरे का सुगम और समय पर प्रसंस्करण सुनिश्चित करने के लिए नगर आयुक्त ने प्लांट परिसर में अतिरिक्त ट्रॉमेल (Trommel) लगाने के निर्देश दिए हैं। ट्रॉमेल वे मशीनें होती हैं जो कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में छांटने का काम करती हैं। इनके बढ़ जाने से कचरा अलगाव की प्रक्रिया में तेजी आएगी।

इसके साथ ही, आरडीएफ (RDF - Refuse Derived Fuel) लाइन से जुड़ा सारा आवश्यक सामान अब प्लांट पर पहुंच चुका है। नगर आयुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इस लाइन को बिना किसी विलंब के स्थापित किया जाए और जल्द से जल्द चालू किया जाए, ताकि कचरे से ऊर्जा या ईंधन बनाने की प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके।

पर्यावरण संरक्षण और लीचेट मैनेजमेंट पर विशेष जोर

कूड़े के प्रसंस्करण के दौरान निकलने वाले दूषित पानी और बदबू से आसपास के पर्यावरण को बचाने के लिए लीचेट ट्रीटमेंट प्लांट (LTP) की भूमिका सबसे अहम होती है। निरीक्षण के दौरान नगर आयुक्त ने एलटीपी को शत-प्रतिशत फंक्शनल (सक्रिय) बनाने के लिए तुरंत एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने को कहा।

प्लांट में कचरे से बनने वाली कंपोस्ट (जैविक खाद) की गुणवत्ता और सुरक्षा भी एक बड़ा मुद्दा है। खाद को बारिश या धूप से खराब होने से बचाने और उसे सुरक्षित रखने के लिए पक्का फ्लोर (फर्श) और शेड का निर्माण करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, यह भी अनिवार्य किया गया है कि उत्पादित खाद की नियमित रूप से लैब में जांच कराई जाए ताकि उसकी गुणवत्ता उच्च स्तर की बनी रहे।

हर महीने होगा ड्रोन सर्वे, मॉनिटरिंग होगी डिजिटल

प्रशासन ने इस पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता और सटीकता लाने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लेने का निर्णय लिया है। करसड़ा प्लांट की कार्यप्रणाली और वहां जमा होने वाले कचरे की स्थिति की सटीक निगरानी के लिए अब हर महीने पूरे प्लांट परिसर का ड्रोन सर्वे कराया जाएगा। इससे अधिकारियों को यह देखने में आसानी होगी कि कचरे का प्रबंधन किस गति से हो रहा है और कहां सुधार की गुंजाइश है।

सड़क किनारे के कचरे से मिलेगी मुक्ति, मार्ग होगा चौड़ा

निरीक्षण के दौरान वेस्ट टू वेस्टर्न मार्ग की वेस्ट स्टेम सड़क के किनारे लंबे समय से फैले कचरे का मुद्दा भी सामने आया। नगर आयुक्त ने इस सड़क के किनारे जमा कचरे का तुरंत प्रसंस्करण कर उसे पूरी तरह हटाने के निर्देश दिए हैं।

कचरा हटने से न सिर्फ सड़क के किनारे कीमती जमीन खाली होगी, बल्कि इस मार्ग को चौड़ा करने का रास्ता भी साफ हो जाएगा। इसके अलावा, इससे कूड़ा ढोने वाले भारी वाहनों के प्लांट तक आने-जाने में किसी प्रकार की बाधा नहीं आएगी और आवागमन सुगम बनेगा।

अधिकारियों की टीम रही मौजूद

इस महत्वपूर्ण निरीक्षण अभियान के दौरान नगर आयुक्त के साथ नगर निगम के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। इनमें अपर नगर आयुक्त दुर्गेश मिश्रा और सहायक नगर आयुक्त इंद्र विजय प्रमुख रूप से शामिल थे। इन अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे व्यक्तिगत रूप से मॉनिटरिंग करें ताकि सभी कार्य तय समयसीमा के भीतर पूरे किए जा सकें।

काशी को स्वच्छ और सुंदर रखने की दिशा में बड़ा कदम

धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी वाराणसी में देश-दुनिया से रोजाना लाखों पर्यटक और श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में शहर की साफ-सफाई केवल नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए ही नहीं, बल्कि शहर की वैश्विक छवि के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। करसड़ा प्लांट की क्षमता 1100 टन कचरा प्रसंस्करण तक बढ़ाए जाने के इस निर्णय से आने वाले दिनों में वाराणसी की कचरा प्रबंधन व्यवस्था देश के अन्य शहरों के लिए एक मिसाल बन सकती है। नगर निगम की इस तैयारी से साफ है कि आने वाले समय में काशी की गलियों से लेकर मुख्य मार्गों तक कचरा प्रबंधन की एक बेहद मजबूत और आधुनिक व्यवस्था धरातल पर नजर आएगी।

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रोशनी गुप्ता

रोशनी गुप्ता

Writer (स्थानीय खबरें)

रोशनी गुप्ता जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं।...

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