भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि के साथ ही देश भर में गणेश उत्सव का भव्य और उल्लासपूर्ण पर्व शुरू हो चुका है। इस पावन अवसर पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समस्त देशवासियों को गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में विघ्नहर्ता भगवान गणेश से हर नागरिक के जीवन में सुख, शांति, सौभाग्य और आरोग्य की कामना की है।
वर्ष 2026 के इस पावन पर्व पर चारों तरफ बप्पा के जयकारे गूंज रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से देश की जनता को बधाई देते हुए कहा कि भगवान गणेश की कृपा सभी के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करे और देश निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़े।
गणेशोत्सव का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
भारत में गणेश चतुर्थी का त्योहार केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक एकता और सामाजिक सौहार्द का एक बड़ा प्रतीक है। प्राचीन काल से ही भगवान गणेश को 'प्रथम पूज्य' और 'बुद्धि के देवता' के रूप में पूजा जाता है। किसी भी नए कार्य की शुरुआत करने से पहले उनका आह्वान किया जाता है, ताकि कार्य में आने वाली हर बाधा दूर हो सके।
लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान इस पर्व को एक सार्वजनिक आंदोलन का रूप दिया था, ताकि लोग एकजुट होकर स्वतंत्रता की अलख जगा सकें। आज भी यह पर्व विभिन्न राज्यों, विशेषकर महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और देश के अन्य हिस्सों में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है।
देशभर में उत्सव का माहौल
14 सितंबर 2026 को गणेश चतुर्थी के इस पावन पर्व पर सुबह से ही मंदिरों और घरों में बप्पा की मूर्तियों की स्थापना का सिलसिला जारी है। भक्त पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ 'गणपति बाप्पा मोरया, मंगल मूर्ति मोरया' के जयकारे लगाते हुए अपने आराध्य को घर और पंडालों में लेकर आ रहे हैं।
देश के विभिन्न हिस्सों से मिल रही रिपोर्ट के मुताबिक, बड़े-बड़े पंडालों को बेहद आकर्षक ढंग से सजाया गया है। सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि आने वाले दस दिनों तक चलने वाले इस महाउत्सव में भक्तों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
पर्यावरण अनुकूल गणेशोत्सव पर जोर
हाल के वर्षों में गणेशोत्सव के दौरान पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता में काफी वृद्धि हुई है। प्रशासन और पर्यावरणविदों की अपील पर इस बार भी देश के अधिकांश हिस्सों में इको-फ्रेंडली (मिट्टी की) मूर्तियों का उपयोग किया जा रहा है।
- प्लास्टर ऑफ पेरिस (PoP) के बजाय प्राकृतिक मिट्टी की मूर्तियों को प्राथमिकता दी जा रही है।
- विसर्जन के लिए कृत्रिम तालाबों का निर्माण किया गया है ताकि प्राकृतिक जल स्रोतों को प्रदूषित होने से बचाया जा सके।
- पंडालों में सिंगल-यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है।
अर्थव्यवस्था और पर्यटन को मिलता है बढ़ावा
गणेशोत्सव जैसे बड़े धार्मिक पर्वों का भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इस दौरान मूर्ति निर्माण करने वाले कारीगरों, फूल विक्रेताओं, सजावट का सामान बेचने वालों और लघु उद्योगों को जबरदस्त आजीविका मिलती है। साथ ही, मुंबई के प्रसिद्ध लालबागचा राजा सहित विभिन्न प्रमुख पंडालों में दर्शन के लिए देश-विदेश से पर्यटक पहुंचते हैं, जिससे पर्यटन क्षेत्र को भी बड़ा प्रोत्साहन मिलता है।
आगामी दस दिनों तक पूरा देश भक्ति के रंग में रंगा रहेगा और अनंत चतुर्दशी के दिन बप्पा की विदाई के साथ इस महापर्व का समापन होगा। प्रधानमंत्री मोदी के संदेश ने देशवासियों के इस उत्साह को और अधिक बढ़ा दिया है।