हीरानगर उपमंडल के कट्टली गुजरां इलाके में शुक्रवार को प्रशासन ने जनता के बीच पहुंचकर उनकी जमीनी हकीकत और परेशानियों का जायजा लिया। प्रशासनिक अमले के अचानक गांव में सक्रिय होने से स्थानीय लोगों में उम्मीद की एक नई किरण जगी है। इस दौरान आयोजित विशेष जन शिकायत निवारण शिविर में ग्रामीणों ने खुलकर अपनी समस्याएं प्रशासनिक अधिकारियों के सामने रखीं, जिस पर प्रशासन ने भी त्वरित और सख्त रुख अख्तियार करते हुए अधिकारियों को निश्चित समय सीमा के भीतर काम पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
सड़क, पानी और बिजली के मुद्दों पर घिरे अधिकारी
कट्टली गुजरां में आयोजित इस शिविर की अध्यक्षता एसडीएम हीरानगर, फूलैल सिंह (जेकेएएस) ने खुद की। शिविर की शुरुआत होते ही ग्रामीणों ने शिकायतों का पिटारा खोल दिया। मुख्य रूप से खराब सड़क संपर्क, पेयजल संकट, अघोषित बिजली कटौती और सड़कों पर अवैध अतिक्रमण जैसे गंभीर मुद्दे उठाए गए। लोगों का कहना था कि बुनियादी सुविधाओं के अभाव में उन्हें रोजाना भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों ने बताया कि कई रास्तों पर अवैध कब्जों की वजह से आवाजाही बाधित हो रही है, जिससे स्कूली बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। पेयजल की अनियमित सप्लाई ने गर्मी के इस दौर में लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। एसडीएम ने हर एक शिकायत को बेहद गंभीरता से सुना और मौके पर मौजूद संबंधित विभागों के अधिकारियों से जवाब तलब किया।एसडीएम का कड़ा संदेश: समय सीमा में हो समाधान
लोगों की समस्याएं सुनने के बाद एसडीएम फूलैल सिंह ने प्रशासनिक अमले को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि जनहित के मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे प्राथमिकता के आधार पर मामलों की जांच करें और तय समय सीमा के भीतर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें।
उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि सभी विभाग आपसी समन्वय (कोऑर्डिनेशन) के साथ काम करें, ताकि जनता को अपनी छोटी-छोटी समस्याओं के समाधान के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें। प्रशासनिक मुखिया के इस सख्त तेवर से यह साफ हो गया है कि अब फाइलों को अटकाने का दौर खत्म होने वाला है और धरातल पर काम दिखना तय है।
इन प्रमुख अधिकारियों की रही मौजूदगी
जनता की समस्याओं के त्वरित निस्तारण के लिए आयोजित इस उच्चस्तरीय शिविर में प्रशासन की पूरी फौज मौजूद रही। इस दौरान निम्नलिखित अधिकारी प्रमुख रूप से शामिल रहे:
- फूलैल सिंह (जेकेएएस): एसडीएम हीरानगर
- धीरज भीम बहादुर (जेकेएएस): बीडीओ हीरानगर
- एनटी शेरपुर
- एईई आरएंडबी (R&B) विभाग
- संबंधित क्षेत्र के पटवारी और विभिन्न विभागों के फील्ड अधिकारी
ग्रामीणों ने जताई उम्मीद, अब कार्रवाई पर टकी निगाहें
शिविर के समापन के बाद स्थानीय लोगों में इस बात की संतुष्टि नजर आई कि कम से कम उनकी आवाज सीधे प्रशासनिक तंत्र के शीर्ष तक पहुंची है। हालांकि, ग्रामीणों का यह भी कहना है कि कागजी निर्देशों और वादों से परे अब उन्हें धरातल पर बदलाव का इंतजार है। यदि तय समय सीमा के भीतर सड़कें दुरुस्त होती हैं, अतिक्रमण हटता है और पेयजल-बिजली की समस्या दूर होती है, तो यह जनता और प्रशासन दोनों के लिए एक बड़ी जीत होगी।
प्रशासन की इस पहल से यह संदेश स्पष्ट है कि अब सरकार जनता के द्वार पहुंचकर उनकी कठिनाइयों को दूर करने के लिए प्रतिबद्ध है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि संबंधित विभाग एसडीएम के इन निर्देशों पर कितनी तेजी से अमल करते हैं और आम जनता को कितनी जल्दी राहत मिलती है।