बिहार की राजधानी पटना में राजनीतिक सरगर्मी एक बार फिर अपने चरम पर पहुंच गई है। विपक्षी दलों द्वारा आहूत लोकभवन मार्च के दौरान प्रशासन और नेताओं के बीच तीखी झड़प देखने को मिली। पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार और प्रशासन पर तीखा प्रहार किया है। उनका यह तेवर साफ संकेत दे रहा है कि आने वाले दिनों में राजनीतिक पारा और अधिक चढ़ने वाला है।
पुलिसिया बैरिकेडिंग पर भड़के तेजस्वी
पटना की सड़कों पर उस वक्त तनाव का माहौल बन गया जब महागठबंधन के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने लोकभवन की ओर मार्च करना शुरू किया। सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के नाम पर पुलिस प्रशासन ने कई जगहों पर भारी बैरिकेडिंग कर रखी थी। पुलिस ने मार्च को आगे बढ़ने से रोकने की पूरी कोशिश की, जिसके बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
इस दौरान मीडिया से बात करते हुए तेजस्वी यादव ने आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा, 'आप चाहे जितनी बैरिकेडिंग लगा लें, रास्ते रोक लें, लेकिन हम न कभी रुके हैं और न ही झुकने वाले हैं। जनता के अधिकारों की यह लड़ाई पूरी ताकत से लड़ी जाएगी।'
ज्ञानेश कुमार को बचाने का लगाया गंभीर आरोप
मार्च रोके जाने के पीछे की मंशा पर सवाल उठाते हुए तेजस्वी यादव ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा प्रशासन और सरकार किसी खास व्यक्ति को बचाने की कोशिश में जुटी हुई है। उन्होंने विशेष रूप से ज्ञानेश कुमार का नाम लेते हुए कहा कि उन्हें बचाने के लिए पुलिस बल का दुरुपयोग किया जा रहा है।
तेजस्वी ने कहा कि लोकतंत्र में हर किसी को अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करने का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन सरकार पुलिस के दम पर इस आवाज को दबाना चाहती है।
महागठबंधन के तेवर हुए और तीखे
इस पूरी घटना के बाद से महागठबंधन के अन्य नेताओं के सुर भी कड़े हो गए हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलताओं को छुपाने के लिए तानाशाही रवैया अपना रही है। मार्च को जिस तरह से रोका गया, उसने राजनीतिक दलों को एक और बड़ा मुद्दा दे दिया है।
- लोकभवन मार्च: विपक्षी दलों द्वारा प्रशासनिक नीतियों के विरोध में निकाला गया था मार्च।
- प्रशासनिक सख्ती: भारी पुलिस बल और बैरिकेडिंग के जरिए नेताओं को आगे बढ़ने से रोका गया।
- तेजस्वी का बयान: सरकार पर तानाशाही का आरोप और पीछे हटने से साफ इंकार।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय
पटना की इस घटना ने एक बार फिर राज्य की राजनीति को गरमा दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में सड़क से लेकर सदन तक इस मुद्दे पर जोरदार हंगामा देखने को मिल सकता है। एक तरफ जहां सत्ता पक्ष अपनी व्यवस्था और सुरक्षा कारणों का हवाला दे रहा है, वहीं विपक्ष इसे दमनकारी नीति बताकर जनता के बीच जाने की तैयारी कर रहा है।
फिलहाल, शहर में स्थिति नियंत्रण में है लेकिन राजनीतिक तनाव जस का तस बना हुआ है। प्रशासन और पुलिस के आला अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके।