साइबर अपराधियों के खिलाफ कोलकाता पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए एटीएम धोखाधड़ी (ATM Fraud) करने वाले एक शातिर गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है। आरोपियों के पास से भारी मात्रा में संदिग्ध दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स बरामद किए गए हैं, जो इस बात की गवाही दे रहे हैं कि ये लोग कितने बड़े पैमाने पर आर्थिक अपराध को अंजाम दे रहे थे।
छापेमारी में मिला अपराध का भारी जखीरा
कोलकाता पुलिस के खुफिया विभाग और साइबर सेल की संयुक्त कार्रवाई के दौरान आरोपियों के ठिकानों से जो बरामदगी हुई है, उसने जांच अधिकारियों को भी हैरान कर दिया है। पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, आरोपियों के पास से कुल 62 संदिग्ध एटीएम कार्ड और 8 प्वाइंट ऑफ सेल (POS) मशीनें जब्त की गई हैं। इन मशीनों और कार्डों का इस्तेमाल भोले-भाले नागरिकों के बैंक खातों में सेंध लगाने और अवैध तरीके से नकदी निकालने के लिए किया जाता था।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह गिरोह पिछले काफी समय से शहर और आसपास के इलाकों में सक्रिय था। आम लोगों के बैंक खातों से अचानक पैसे गायब होने की मिल रही लगातार शिकायतों के बाद पुलिस ने एक विशेष टीम का गठन किया था। तकनीकी निगरानी और ह्यूमन इंटेलिजेंस के आधार पर इस गिरोह के ठिकानों का पता लगाया गया और फिर यह सुनियोजित छापेमारी की गई।
कैसे काम करता था यह एटीएम क्लोनिंग गिरोह?
साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह के गिरोह बेहद शातिर तरीके से काम करते हैं। ये लोग आमतौर पर ऐसे एटीएम बूथों को अपना निशाना बनाते हैं जहां सुरक्षा गार्ड की तैनाती नहीं होती है। एटीएम मशीन के अंदर स्कैमर डिवाइस (Skimmer) और पिनहोल कैमरे फिट कर दिए जाते हैं, जिससे यूजर के कार्ड का मैग्नेटिक स्ट्रिप डेटा और उसका सीक्रेट पिन कोड चोरी हो जाता है।
- डेटा चोरी: स्किमर डिवाइस के जरिए कार्ड की सारी जानकारी चुराई जाती है।
- क्लोनिंग: चुराए गए डेटा को सादे प्लास्टिक कार्ड्स पर डंप करके फर्जी या क्लोन एटीएम कार्ड तैयार किए जाते हैं।
- पैसे की निकासी: इन क्लोन कार्ड्स का उपयोग करके एटीएम या पीओएस मशीनों के जरिए खातों से रकम साफ कर दी जाती है।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ का सिलसिला जारी है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं और क्या इनके तार राज्य के बाहर या देश के बाहर के साइबर अपराधियों से जुड़े हुए हैं। अब तक की जांच में कई अहम सुराग हाथ लगे हैं, जिनके आधार पर और भी गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।
पुलिस की आम जनता से विशेष अपील
इस बड़ी घटना के सामने आने के बाद कोलकाता पुलिस ने आम नागरिकों के लिए एक बार फिर सुरक्षा परामर्श (Advisory) जारी किया है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे एटीएम का उपयोग करते समय पूरी तरह सतर्क रहें।
सतर्कता ही बचाव है: इन बातों का रखें विशेष ध्यान
- एटीएम बूथ के अंदर प्रवेश करते समय यह जरूर देखें कि कार्ड डालने वाली स्लॉट जगह पर कोई अतिरिक्त या संदिग्ध उपकरण तो नहीं लगा है।
- अपना पिन नंबर दर्ज करते समय हमेशा कीपैड को अपने दूसरे हाथ से ढक लें ताकि कोई हिडन कैमरा उसे रिकॉर्ड न कर सके।
- किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना कार्ड या पिन बिल्कुल भी न दें, भले ही वह मदद करने का नाटक ही क्यों न कर रहा हो।
- अपने बैंक खाते से जुड़े एसएमएस अलर्ट को हमेशा चालू रखें ताकि किसी भी ट्रांजैक्शन की तुरंत जानकारी मिल सके।
- यदि किसी प्रकार का अनधिकृत लेनदेन दिखाई दे, तो तुरंत अपने बैंक के कस्टमर केयर को कॉल करके कार्ड ब्लॉक कराएं और साइबर सेल में शिकायत दर्ज करें।
फिलहाल, पुलिस पकड़े गए आरोपियों को अदालत में पेश कर रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है ताकि इस पूरे सिंडिकेट की जड़ों तक पहुंचा जा सके। देश में बढ़ते डिजिटल फ्रॉड के दौर में इस तरह की गिरफ्तारियां पुलिस की सक्रियता को तो दर्शाती ही हैं, साथ ही यह भी याद दिलाती हैं कि डिजिटल लेन-देन के समय थोड़ी सी भी लापरवाही कितनी भारी पड़ सकती है।