छत्तीसगढ़ के जंगलों से एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है। घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच से गुजरने वाले रेलवे ट्रैक की एक सुरंग के भीतर तेंदुए का एक छोटा शावक बिल्कुल बेखौफ अंदाज में टहलता हुआ नजर आया है। इस अनोखे और हैरान करने वाले नजारे को जिसने भी देखा, वह देखता ही रह गया। वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
कहां का है यह वायरल वीडियो?
मिली जानकारी के अनुसार, यह वीडियो छत्तीसगढ़ के बेहद खूबसूरत और घने जंगलों के बीच बने खोंगसरा-भानवारटंक रेल सेक्शन का है। यह पूरा इलाका पहाड़ों और जंगलों से घिरा हुआ है, जहां वन्यजीवों की प्राकृतिक आवाजाही हमेशा से बनी रहती है। अक्सर ऐसे इलाकों से गुजरने वाली ट्रेनें या पटरियां जानवरों के रास्ते में आ जाती हैं।
वायरल हो रहे वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि अंधेरी रेलवे सुरंग के अंदर एक तेंदुए का शावक रेलवे ट्रैक के बिल्कुल किनारे-किनारे चल रहा है। उसके हाव-भाव और चाल से ऐसा बिल्कुल नहीं लग रहा था कि वह किसी बात से डरा हुआ है या किसी खतरे में है। वह बेहद शांत और सामान्य मुद्रा में सुरंग के एक छोर से दूसरे छोर की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। सुरंग के चारों ओर घना जंगल और पथरीला इलाका नजर आ रहा है, जो इस वीडियो को और अधिक रोमांचक बनाता है।
वन विभाग ने बढ़ाई चौकसी
सोशल मीडिया पर यह वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय वन विभाग पूरी तरह से हरकत में आ गया है। अधिकारियों ने तुरंत प्रभाव से उस इलाके में अपनी गश्त और निगरानी बढ़ा दी है। वन विभाग की विशेष टीमें यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह शावक अपनी मां से बिछड़ तो नहीं गया है या फिर वह अभी भी इसी रेलवे कॉरिडोर के आसपास ही घूम रहा है।
वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि खोंगसरा-भानवारटंक रेल सेक्शन वन्यजीव बहुल क्षेत्र में आता है। ऐसे में इस तरह की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं, लेकिन सुरंग के अंदर इस तरह शावक का बेखौफ घूमना थोड़ा अलग मामला है। टीम लगातार इस बात की मॉनिटरिंग कर रही है कि शावक सुरक्षित रूप से वापस घने जंगल में लौट जाए ताकि किसी भी प्रकार की अनहोनी से बचा जा सके।
रेलवे कर्मचारियों की सुरक्षा पर बढ़ी चिंता
इस वीडियो के वायरल होने के बाद जहां एक तरफ लोग इस दृश्य की खूबसूरती और रोमांच की चर्चा कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ रेलवे कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंताएं जताई जाने लगी हैं। यह रूट ऐसा है जहां से रोजाना दर्जनों मालगाड़ी और यात्री ट्रेनें गुजरती हैं। इसके अलावा रेलवे ट्रैक के रखरखाव और अन्य तकनीकी कार्यों के लिए कर्मचारी अक्सर पटरियों पर मौजूद रहते हैं।
- कर्मचारियों के लिए निर्देश: रेलवे और वन विभाग ने इस रूट पर काम करने वाले कर्मचारियों को अत्यधिक सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।
- ट्रेन की गति: वन्यजीव corridors से गुजरने वाली ट्रेनों की स्पीड को लेकर भी चालकों को एहतियात बरतने को कहा गया है।
- नाइट पेट्रोलिंग: रात के समय ट्रैक पर गश्त बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है ताकि वन्यजीवों और इंसानों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
प्रकृति और इंसानी दखल का मेल
यह घटना एक बार फिर इस बहस को छेड़ती है कि कैसे इंसानों द्वारा बनाए गए बुनियादी ढांचे (जैसे रेलवे ट्रैक और सुरंगें) प्राकृतिक जंगलों के बीच से गुजरते हैं। हालांकि जानवर इन रास्तों के आदी हो चुके हैं, लेकिन फिर भी पटरियों पर उनकी मौजूदगी हमेशा से जोखिम भरी रही है। वन विभाग और रेलवे प्रशासन की संयुक्त कोशिश यही है कि इस शावक को सुरक्षित उसके प्राकृतिक आवास में रहने दिया जाए और किसी भी प्रकार के इंसानी संघर्ष से उसे बचाया जाए।
फिलहाल, शावक के मूवमेंट पर लगातार नजर रखी जा रही है और वन विभाग की टीमें इलाके में कैंप किए हुए हैं। आने वाले दिनों में सुरक्षा के लिहाज से इस रूट पर कुछ विशेष कदम भी उठाए जा सकते हैं ताकि वन्यजीवों की आवाजाही के दौरान किसी भी दुर्घटना से बचा जा सके।
