विदेशों में नौकरी और पढ़ाई के लिए जाने वाले युवाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिर छिपाने के लिए एक अदद ठिकाना ढूंढने की होती है। पश्चिमी देशों में महंगे होते रियल एस्टेट मार्केट के किस्से अक्सर ही सोशल मीडिया पर बहस का मुद्दा बनते रहते हैं। इन दिनों इंटरनेट पर ब्रिटेन की राजधानी लंदन से जुड़ा एक ऐसा ही वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखकर भारतीय यूजर्स हैरान भी हैं और परेशान भी। इस वीडियो को एक भारतीय महिला ने शेयर किया है, जिसमें उन्होंने दिखाया है कि दो लाख रुपये महीने के भारी-भरकम किराये पर लंदन में आखिरकार कैसा आशियाना मिलता है।
दो लाख रुपये महीने का किराया और सिर्फ इतना सा स्पेस!
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हो रहे इस वीडियो में महिला ने अपने स्टूडियो अपार्टमेंट का कोना-कोना दिखाया है। भारतीय मुद्रा के हिसाब से लगभग दो लाख रुपये प्रति माह का किराया सुनने में भले ही बहुत बड़ा अमाउंट लगे, लेकिन इस कीमत पर मिलने वाली जगह को देखकर हर कोई चौंक रहा है। यह अपार्टमेंट महज 215 वर्ग फीट (Square Feet) में फैला हुआ है। यानी एक ऐसा कमरा जिसमें बेड, किचन और रहने की जगह सब कुछ एक ही छत के नीचे सिमटा हुआ है।
वीडियो की शुरुआत में महिला उस बेहद कॉम्पैक्ट स्पेस का परिचय कराती है, जिसे लंदन के मानकों के अनुसार एक 'स्टूडियो अपार्टमेंट' कहा जाता है। भारत के महानगरों के मध्यमवर्गीय घरों से तुलना करें, तो यह जगह बेहद छोटी और घुटन भरी लग सकती है, लेकिन यूरोपीय देशों के महंगे शहरों में यह आम बात बन चुकी है।
एक ही कमरे में सब कुछ: बेड से लेकर माइक्रोवेव तक
इस वायरल वीडियो में आगे दिखाया गया है कि कैसे इस छोटे से स्टूडियो अपार्टमेंट का हर एक इंच बहुत ही चालाकी से इस्तेमाल किया गया है। जगह की भारी कमी के कारण इसमें पारंपरिक अर्थों में कोई अलग बेडरूम या किचन नहीं है।
- बेड और लिविंग एरिया: कमरे के एक कोने में एक छोटा सा बेड लगा है, जिसके ठीक बगल में एक छोटी सी खिड़की है जिससे बाहर की हल्की रोशनी अंदर आती है।
- मिनी किचन: किचन के नाम पर कमरे की एक दीवार के साथ सिंक, इंडक्शन चूल्हा, फ्रिज और एक माइक्रोवेव फिट किया गया है। खाना बनाने और सोने की जगह के बीच बमुश्किल दो कदम की दूरी है।
- बाथरूम: अपार्टमेंट के अंदर ही एक छोटा सा बाथरूम है, जो साइज में इतना कॉम्पैक्ट है कि एक बार में वहां केवल एक ही व्यक्ति खड़ा हो सकता है।
महिला वीडियो में बताती है कि लंदन जैसे शहर में अकेले रहने वाले प्रोफेशनल्स के लिए ऐसे अपार्टमेंट ही एकमात्र विकल्प बचते हैं, क्योंकि बड़े घरों का किराया आसमान छू रहा है।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस, यूजर्स ने दिए ऐसे रिएक्शन
जैसे ही यह वीडियो इंटरनेट पर आया, इस पर कमेंट्स की बाढ़ आ गई। भारतीय यूजर्स इस वीडियो को देखकर हैरान हैं कि आखिर कोई दो लाख रुपये महीना सिर्फ 215 वर्ग फीट की जगह के लिए कैसे दे सकता है।
एक यूजर ने मजाक में लिखा, "भारत के इस कीमत में तो एक शानदार थ्री-BHK विला या आलीशान फ्लैट मिल जाता, जिसमें नौकर भी आ जाएंगे!" वहीं एक अन्य यूजर ने कमेंट किया, "लंदन में रहना अपने आप में एक लग्जरी है, और स्पेस वहां सबसे महंगी चीज है। इसलिए यह कीमत हैरान करने वाली नहीं है।"
इस वीडियो ने एक बार फिर ग्लोबल इकॉनमी और विदेशों में रहने वाले प्रवासियों के संघर्षों को उजागर कर दिया है। एक तरफ जहां सैलरी अच्छी होती है, वहीं दूसरी तरफ रहने का खर्च (Cost of Living) लोगों की आधी कमाई पानी की तरह बहा ले जाता है.
क्यूं इतने महंगे हैं लंदन के घर?
लंदन दुनिया के सबसे महंगे वित्तीय केंद्रों में से एक है। यहां मांग (Demand) और आपूर्ति (Supply) के बीच बहुत बड़ा अंतर है। भारी संख्या में छात्र और नौकरीपेशा लोग हर साल इस शहर का रुख करते हैं, जिसके मुकाबले घरों का निर्माण बहुत कम गति से होता है। यही कारण है कि प्राइम लोकेशंस या उसके आसपास जरा सी जगह पाने के लिए भी लोगों को अपनी जेब ढीली करनी पड़ती है।
यह वीडियो सिर्फ एक अपार्टमेंट की कहानी नहीं है, बल्कि यह ग्लोबल माइग्रेशन की हकीकत को भी आईना दिखाता है, जहां सपनों के शहर में बसने की कीमत बहुत भारी चुकानी पड़ती है।
1. लंदन में स्टूडियो अपार्टमेंट का औसत किराया कितना है?
लंदन के सेंट्रल इलाकों में एक छोटे स्टूडियो अपार्टमेंट का किराया आमतौर पर 1,500 पाउंड से लेकर 2,500 पाउंड (भारतीय रुपये में लगभग 1.5 लाख से 2.5 लाख रुपये) तक हो सकता है, जो लोकेशन पर निर्भर करता है।
2. 215 वर्ग फीट की जगह में क्या-क्या सुविधाएं मिलती हैं?
इतनी छोटी सी जगह में आमतौर पर एक सिंगल या डबल बेड, एक अटैच मिनी किचन (माइक्रोवेव और फ्रिज के साथ) और एक छोटा सा बाथरूम होता है, जिसमें वॉशिंग मशीन की सुविधा भी हो सकती है।
3. विदेश जाने वाले लोग ऐसे छोटे घरों में क्यों रहते हैं?
मुख्य कारण लोकेशन की सुविधा, ऑफिस या यूनिवर्सिटी की नजदीकी और अकेले रहने की आजादी है। बड़े घर शहर से बहुत दूर होते हैं और उनका किराया और ट्रेवल का खर्च मिलकर और भी महंगा पड़ता है।
