उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से लेकर नेपाल की पहाड़ियों तक हुई मूसलाधार बारिश ने इस बार प्रकृति का विकराल रूप दिखाया है। मैदानी इलाकों में जीवनदायिनी मानी जाने वाली गोमती नदी ने जब उग्र रूप धारण किया, तो लखनऊ के कई इलाकों की गलियां और घर पानी में डूब गए। हालात की गंभीरता को भांपते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद मोर्चा संभाल लिया है। हाल ही में उन्होंने फैजुल्लागंज से लेकर नैमिष तक के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया और अधिकारियों को युद्ध स्तर पर राहत कार्य चलाने के कड़े निर्देश दिए हैं।गोमती का बढ़ा जलस्तर और शहर की मुश्किलें
हालिया दिनों में पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, सीतापुर और पड़ोसी देश नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में लगातार हुई भारी बारिश के कारण गोमती नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार करते हुए 107 मीटर के आंकड़े को पार कर गया। जलस्तर में इस अचानक और भारी उछाल के कारण लखनऊ शहर के निचले इलाकों में पानी तेजी से घुसने लगा। कई रिहायशी कॉलोनियों और सड़कों पर नाव चलाने जैसी नौबत आ गई, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है।
जलभराव की इस गंभीर स्थिति ने न केवल आम नागरिकों को मुसीबत में डाला, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी सरगर्मी बढ़ा दी है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने सरकार की पूर्व तैयारियों पर सवाल उठाते हुए उनके आवास के पास हुए जलभराव का मुद्दा भी उठाया। हालांकि, इन राजनीतिक बयानों के बीच शासन और प्रशासन का पूरा फोकस फिलहाल बाढ़ पीड़ितों की मदद और राहत सामग्री पहुंचाने पर केंद्रित है।ग्रीन कॉरिडोर की तर्ज पर बनेगा नया तटबंध
हवाई सर्वेक्षण के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्थिति का बारीकी से जायजा लिया और अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। सीएम योगी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि भविष्य में लखनऊ को इस तरह की बाढ़ से बचाने के लिए एक स्थायी समाधान निकाला जाना चाहिए। इसके तहत, गोमती नदी के किनारे ग्रीन कॉरिडोर प्रोजेक्ट की तर्ज पर एक मजबूत और आधुनिक तटबंध (Embankment) का निर्माण किया जाएगा।
इस प्रस्तावित तटबंध की सबसे बड़ी खूबी यह होगी कि यह न केवल शहर को बाढ़ के पानी से सुरक्षित रखेगा, बल्कि इसके ऊपर एक ऑल-वेदर रोड (All-weather road) भी बनाई जाएगी। इससे न केवल यातायात सुगम होगा, बल्कि भविष्य के लिए एक बेहतरीन बुनियादी ढांचा भी तैयार हो जाएगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को मानसून के तुरंत बाद इस परियोजना पर काम शुरू करने के निर्देश दिए हैं।युद्ध स्तर पर राहत और बचाव कार्य जारी
- बाढ़ प्रभावित परिवारों की मदद के लिए प्रशासनिक मशीनरी पूरी ताकत से जुटी हुई है। सरकार की ओर से तत्काल प्रभाव से राहत उपायों की झड़ी लगा दी गई है:आर्थिक सहायता: जिन दुर्भाग्यपूर्ण मामलों में परिवारों ने अपनों को खोया है, उनके परिजनों को तत्काल चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि दी जा रही है।
- खाद्य और चिकित्सा सामग्री: प्रभावित बस्तियों में नावों के जरिए भोजन के पैकेट, पेयजल और आवश्यक जीवन रक्षक दवाएं पहुंचाई जा रही हैं।
- स्वास्थ्य शिविर: बाढ़ के पानी उतरने के बाद होने वाली बीमारियों से निपटने के लिए जगह-जगह मेडिकल कैंप लगाए गए हैं।सुरक्षित ठिकाने: बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों जैसे संवेदनशील वर्गों को सुरक्षित निकालकर नजदीकी स्कूलों और राहत शिविरों में शरण दी गई है।
- फसल और आवास नुकसान का मुआवजा: कृषि भूमि पर फसलों के नुकसान और घरों को पहुँची क्षति का आकलन कर जल्द ही मुआवजा देने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन और जनता के सामने चुनौतियां
हालांकि सरकार की ओर से हरसंभव मदद का दावा किया जा रहा है और अधिकारी लगातार जमीनी स्तर पर निगरानी बनाए हुए हैं, लेकिन इस तरह की प्राकृतिक आपदाएं हमेशा से शहरी नियोजन (Urban Planning) और ड्रेनेज सिस्टम पर गंभीर सवालिया निशान छोड़ जाती हैं। लखनऊ जैसी तेजी से विकसित होती महानगर में जल निकासी की व्यवस्था को और अधिक वैज्ञानिक बनाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि गोमती नदी के डूब क्षेत्र (Floodplains) में पिछले कुछ दशकों में हुए अनियोजित निर्माण भी इस तबाही के बड़े कारणों में से एक हैं। यदि भविष्य में ऐसी आपदाओं से स्थायी रूप से बचना है, तो प्रशासनिक सख्ती के साथ-साथ दीर्घकालिक योजनाओं पर गंभीरता से काम करना होगा। फिलहाल, प्रशासन की प्राथमिकता बाढ़ के पानी से घिरे हर एक नागरिक तक राहत पहुंचाना और उनकी जिंदगी को दोबारा पटरी पर लाना है