लखनऊ के राष्ट्रीय राजमार्ग पर मंगलवार को एक ऐसी नाटकीय घटना घटी जिसने प्रशासनिक गलियारों से लेकर वाहन चालकों तक में हलचल मचा दी है। लखनऊ-सीतापुर राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-30) पर स्थित इटौंजा टोल प्लाजा की कार्यप्रणाली उस वक्त अचानक थम गई, जब उत्तर प्रदेश विशेष कार्य बल (एसटीएफ) की टीम ने वहां छापा मारा। एसटीएफ की इस औचक कार्रवाई के दौरान टोल प्लाजा का पूरा सर्वर ही सीज कर लिया गया और टीम उसे अपने साथ ले गई। इस हाई-प्रोफाइल कार्रवाई के बाद से टोल पर टैक्स वसूली पूरी तरह से ठप हो चुकी है और वाहन बिना किसी शुल्क के धड़ल्ले से गुजर रहे हैं।
अदालत के आदेश पर हुई बड़ी कार्रवाई
सूत्रों और आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, यह पूरी कार्रवाई किसी सामान्य चेकिंग का हिस्सा नहीं थी, बल्कि एक पुख्ता कानूनी प्रक्रिया के तहत अंजाम दी गई है। एसटीएफ ने न्यायालय के स्पष्ट आदेश का हवाला देते हुए इटौंजा टोल प्लाजा पर यह कदम उठाया है। मंगलवार को जब एसटीएफ के विशेषज्ञ तकनीकी दल ने टोल प्लाजा पर दस्तक दी, तो वहां करीब एक घंटे तक गहन सर्च ऑपरेशन चलाया गया। इस दौरान टोल के कर्मचारियों को सर्वर रूम से बाहर कर दिया गया और पूरी तकनीकी व्यवस्था को अपने कब्जे में ले लिया गया।
जांच टीम मुख्य रूप से टोल प्लाजा पर कथित वित्तीय और प्रशासनिक गड़बड़ियों के मामलों की थाह ले रही है। हालांकि, एसटीएफ की तरफ से अभी तक आधिकारिक तौर पर यह पूरी तरह से स्पष्ट नहीं किया गया है कि आखिर किस विशिष्ट गड़बड़ी या वित्तीय अनियमितता की गहराई से जांच की जा रही है, लेकिन इस अप्रत्याशित कदम ने टोल संचालन से जुड़े महकमों में हड़कंप जरूर मचा दिया है।
फुटेज को लेकर शुरू हुआ था विवाद
इस पूरे प्रकरण की पृष्ठभूमि कुछ हफ्ते पहले शुरू हुई पत्र और डेटा की मांग से जुड़ी है। एसटीएफ द्वारा टोल संचालन एजेंसी से इस साल जनवरी से मार्च 2026 तक के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड मांगे गए थे। टोल संचालक एजेंसी 'लखनऊ-सीतापुर एक्सप्रेसवे लिमिटेड' ने अपने पक्ष में सफाई देते हुए कहा कि उनके नियमों और तकनीकी क्षमताओं के अनुसार, प्लाजा पर अमूनन केवल एक माह पुरानी रिकॉर्डिंग ही सुरक्षित रखी जाती है।
एजेंसी का यह भी तर्क है कि उसने इस साल 1 जनवरी से 31 मार्च 2026 के बीच के वाहनों के आवागमन का डेटा और फास्टैग (FASTag) से जुड़े लेनदेन की तमाम जानकारियां पहले ही जांच एजेंसियों को उपलब्ध करा दी थीं। इसके बावजूद जब बात आगे बढ़ी और कड़ा रुख अपनाया गया, तो एसटीएफ ने कानूनी रास्ता चुनते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट से विधिवत आदेश प्राप्त करने के बाद ही टीम ने मंगलवार को सीधे प्लाजा के सर्वर डेटा को खंगालना शुरू किया और अंततः उसे जब्त कर अपने साथ ले गई।
एनएचएआई और टोल एजेंसी का कड़ा विरोध
इस कार्रवाई के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और टोल संचालन एजेंसी आमने-सामने आ गए हैं। दोनों ही पक्षों ने एसटीएफ द्वारा सर्वर को सीधे जब्त किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। टोल एजेंसी का कहना है कि यदि सर्वर से जुड़े किसी डेटा की आवश्यकता थी, तो उसे औपचारिक पत्राचार के माध्यम से भी एक्सेस किया जा सकता था या डेटा की कॉपी मांगी जा सकती थी, लेकिन सर्वर ही उठा ले जाने से पूरा सिस्टम ही ध्वस्त हो गया है।
एनएचएआई के परियोजना निदेशक नवरत्न ने इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए बताया कि एसटीएफ के अधिकारियों ने उन्हें यह भरोसा दिलाया है कि जांच की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सर्वर जल्द ही वापस लौटा दिया जाएगा। एनएचएआई की ओर से पहले ही सहयोग करते हुए 28 से 30 पन्नों में मांगी गई समग्र और विस्तृत जानकारी एसटीएफ को सौंपी जा चुकी है। इसके बावजूद सर्वर सीज किए जाने से प्रशासनिक स्तर पर नाराजगी और असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
रोजाना लाखों रुपये के राजस्व का भारी नुकसान
टोल प्लाजा का सर्वर सीज होने का सबसे बड़ा तात्कालिक असर वित्तीय मोर्चे पर देखने को मिल रहा है। टोल के रेजिडेंट इंजीनियर प्रमोद सिंह ने मीडिया से बातचीत में बताया कि उन्हें स्वयं इस बात की पुख्ता जानकारी नहीं है कि आखिर किस गड़बड़ी के शक में यह सब हो रहा है। चूंकि सर्वर ही गायब है, इसलिए वैकल्पिक और दुरुस्त व्यवस्था स्थापित करने में कम से कम 15 दिनों का वक्त लग सकता है।
आंकड़ों के लिहाज से देखें तो यह व्यवधान बहुत बड़ा आर्थिक झटका साबित हो सकता है। इस राष्ट्रीय राजमार्ग से रोजाना औसतन 42 हजार से 45 हजार छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। सर्वर ठप होने और बैरियर उठ जाने के कारण अब ये सभी वाहन बिना एक भी रुपया टैक्स दिए धड़ल्ले से निकल रहे हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि इस स्थिति के चलते हर एक दिन में लगभग 18 से 20 लाख रुपये के राजस्व का सीधा नुकसान हो रहा है।
आगे क्या होगी अगली कानूनी प्रक्रिया?
फिलहाल, इटौंजा टोल प्लाजा से गुजरने वाले आम चालकों के लिए यह स्थिति किसी वरदान से कम नहीं है क्योंकि उन्हें टोल टैक्स नहीं चुकाना पड़ रहा है, लेकिन टोल संचालन करने वाली एजेंसी और एनएचएआई के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी हो गई हैं। एसटीएफ के तकनीकी विशेषज्ञ जप्त किए गए सर्वर की फॉरेंसिक और तकनीकी जांच में जुटे हुए हैं। यह जांच रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगा कि इस टोल प्लाजा पर पर्दे के पीछे क्या खेल चल रहा था और क्या वाकई कोई बड़ा वित्तीय घोटाला या गड़बड़ी सामने आती है। आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और चौंकाने वाले खुलासे होने की पूरी संभावना है।