खेल के मैदान पर पसीना बहाने वाले खिलाड़ियों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर सामने आ रही है। अक्सर देखा जाता है कि बेहतर ट्रेनिंग के दौरान या मैच खेलते समय खिलाड़ियों को गंभीर चोटें लग जाती हैं। इसके इलाज और सही पुनर्वास (Rehabilitation) के लिए उन्हें या तो देश के महानगरों का रुख करना पड़ता था या फिर विदेश जाना पड़ता था। लेकिन अब इस समस्या का स्थायी समाधान उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में तैयार हो रहा है। राज्य सरकार की पहल पर लखनऊ स्पोर्ट्स कॉलेज परिसर में एक अत्याधुनिक 'स्पोर्ट्स साइंस एंड इंजरी मैनेजमेंट सेंटर' का निर्माण तेजी से चल रहा है, जो आने वाले समय में देश के सबसे आधुनिक स्पोर्ट्स मेडिकल हब के रूप में उभरेगा।राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं से लैस होगा नया केंद्र
इस प्रोजेक्ट से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इस सेंटर को पूरी तरह से वर्ल्ड-क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ तैयार किया जा रहा है। यहां खिलाड़ियों को रिकवरी के लिए वे सभी हाई-टेक मशीनें और चिकित्सीय सुविधाएं मिलेंगी, जो अब तक केवल चुनिंदा राष्ट्रीय केंद्रों पर ही उपलब्ध थीं। स्पोर्ट्स इंजरी के इलाज में आधुनिक तकनीक और फिजियोथेरेपी की भूमिका सबसे अहम होती है। इसे ध्यान में रखते हुए इस सेंटर में बायोमैकेनिक्स लैब, हाइड्रोथेरेपी पूल, क्रायोथैरेपी यूनिट और एडवांस्ड रिहैबिलिटेशन सेंटर जैसी विश्वस्तरीय सुविधाएं स्थापित की जा रही हैं।
उत्तर प्रदेश में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार विशेष कदम उठा रहे हैं। इसी कड़ी में इस सेंटर की स्थापना को खेल जगत के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर माना जा रहा है। प्रदेश के युवा एथलीटों को अब अपनी चोट के इलाज के लिए महंगे निजी अस्पतालों या दूसरे राज्यों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
दूसरे राज्यों के खिलाड़ियों को भी मिलेगा इसका लाभ
यह केंद्र केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आसपास के राज्यों के खिलाड़ियों के लिए भी यह एक वरदान साबित होगा। अक्सर आर्थिक तंगी या जानकारी के अभाव में कई प्रतिभावान खिलाड़ी छोटी-छोटी चोटों के कारण अपना करियर बीच में ही छोड़ देते हैं। स्पोर्ट्स साइंस सेंटर के शुरू होने से ऐसे खिलाड़ियों को समय पर सही इलाज और मार्गदर्शन मिल सकेगा।
- बायोमैकेनिक्स लैब: खिलाड़ियों के मूवमेंट्स का बारीकी से अध्ययन कर चोट के कारणों का पता लगाना।
- हाइड्रोथेरेपी पूल: जोड़ों और मांसपेशियों की चोटों से तेजी से उबरने के लिए विशेष जल चिकित्सा।
- क्रायोथैरेपी यूनिट: अत्यधिक ठंडक के जरिए मांसपेशियों की सूजन और दर्द को तुरंत कम करना।
- विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम: खेल चिकित्सा (Sports Medicine) के जाने-माने विशेषज्ञों और फिजियोथेरेपिस्ट की तैनाती।
युवा प्रतिभाओं को मिलेगा नया जीवन
किसी भी खिलाड़ी के लिए उसकी फिटनेस उसका सबसे बड़ा गहना होती है। जरा सी चोट कई बार महीनों या सालों की मेहनत पर पानी फेर देती है। लखनऊ में बन रहे इस अत्याधुनिक सेंटर के जरिए खिलाड़ियों के रिहैबिलिटेशन पर विशेष जोर दिया जाएगा। रिकवरी पीरियड के दौरान खिलाड़ियों की मानसिक स्थिति को मजबूत रखने के लिए खेल मनोवैज्ञानिकों (Sports Psychologists) की सेवाएं भी यहां उपलब्ध कराई जाएंगी।
स्थानीय खेल प्रेमियों और प्रशिक्षकों में इस प्रोजेक्ट को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है। उनका मानना है कि इस सेंटर के शुरू होने से उत्तर प्रदेश से और अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी निकलकर सामने आएंगे, क्योंकि अब उन्हें अपनी फिटनेस को लेकर किसी प्रकार की अनिश्चितता का सामना नहीं करना पड़ेगा।
आने वाले समय में खेल के क्षेत्र में मील का पत्थर
निर्माण कार्य तय समय सीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि जल्द से जल्द इसका लाभ प्रदेश और देश के खिलाड़ियों को मिल सके। इस सेंटर के संचालन से न सिर्फ उत्तर प्रदेश में खेल चिकित्सा का स्तर ऊंचा उठेगा, बल्कि यह भारत को ग्लोबल स्पोर्ट्स मैप पर एक मजबूत स्थिति में लाने में भी मददगार साबित होगा। खेल और खिलाड़ियों के विकास की दिशा में योगी सरकार का यह कदम आने वाले वर्षों में एक बड़ा बदलाव लेकर आएगा।