महाराष्ट्र की आबोहवा और कृषि क्षेत्र पर इस बार मौसम की दोहरी मार पड़ी है। राज्य में बारिश की भारी कमी के चलते उत्पन्न हुए गंभीर हालात को देखते हुए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नागपुर में एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यह घोषणा की कि राज्य की 265 तहसीलों में आधिकारिक रूप से सूखा घोषित कर दिया गया है। सरकार के इस फैसले से प्रभावित इलाकों के लाखों किसानों और आम नागरिकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि इन क्षेत्रों में अब विशेष राहत उपाय लागू कर दिए गए हैं।
सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए 12 विशेष उपाययोजनाएं लागू
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इस प्राकृतिक आपदा की घड़ी में सरकार पूरी तरह से अन्नदाताओं और आम जनता के साथ खड़ी है। घोषित की गई 265 सूखाग्रस्त तहसीलों में प्रशासनिक स्तर पर युद्धस्तर पर काम शुरू कर दिया गया है। इन क्षेत्रों के लिए कुल 12 प्रकार की विशेष उपाययोजनाएं और रियायतें लागू की गई हैं, जिनका सीधा फायदा प्रभावित परिवारों को मिलेगा।
सरकार की इन योजनाओं के तहत किसानों को फसल नुकसान का मुआवजा, कर्ज वसूली पर रोक, बिजली बिलों में राहत और अन्य प्रशासनिक सहायता शामिल हैं। हालांकि, मुआवजे की यह राशि निर्धारित सरकारी प्रक्रियाओं और नियमों को पूरा करने के बाद सीधे किसानों के खातों में पहुंचाई जाएगी। प्रशासन ने यह भी सुनिश्चित किया है कि इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती जाए ताकि किसी भी वास्तविक पीड़ित को असुविधा का सामना न करना पड़े।
'ट्रिगर-3' के तहत छूटे हुए इलाकों को भी मिलेगा लाभ
नागपुर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने उन इलाकों की चिंताओं को भी दूर किया जो इस पहली सूची में शामिल नहीं हो पाए हैं। कई किसानों और स्थानीय प्रतिनिधियों द्वारा यह शिकायत की जा रही थी कि उनकी तहसील सूखे की मार झेल रही है लेकिन नाम सूची में नहीं है।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सीएम फडणवीस ने आश्वासन दिया कि:
- जिन तहसीलों को अभी इस सूची में शामिल नहीं किया गया है, उनके मामलों की दोबारा और गहराई से जांच की जाएगी।
- इन सभी छूटे हुए क्षेत्रों को 'ट्रिगर-3' के मानदंडों के तहत शामिल किया जाएगा।
- जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन इलाकों को भी तयशुदा सरकारी सहायता तुरंत उपलब्ध कराई जाएगी।
- सूखे की इस विभीषिका में राज्य का कोई भी नागरिक सरकारी मदद से वंचित नहीं रहने पाएगा।
पेयजल संकट से निपटने के लिए तैयार हुई खास कार्ययोजना
कृषि संकट के साथ-साथ गर्मियों के दिनों में गहराने वाले पेयजल संकट को लेकर भी सरकार पूरी तरह सतर्क नजर आ रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि हर जिले के लिए एक विशेष कार्ययोजना (Action Plan) तैयार की गई है, जिसके तहत पीने के पानी की आपूर्ति को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
वर्तमान स्थिति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य की अधिकांश प्रमुख जल परियोजनाओं में अभी पर्याप्त मात्रा में पीने का पानी उपलब्ध है। सरकार की योजना जुलाई और अगस्त महीने तक पेयजल की सुचारू उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए पानी आरक्षित रखने की है। इसके बाद ही यह विचार किया जाएगा कि बचा हुआ अतिरिक्त पानी रबी फसलों की सिंचाई के लिए दिया जा सकता है या नहीं।
अल नीनो के प्रभाव और फरवरी के खतरे पर सरकार की नजर
मौजूदा जलवायु परिवर्तन और 'अल नीनो' (El Nino) के कारण मौसम में हो रहे खतरनाक बदलावों का वैज्ञानिक अध्ययन किया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, अल नीनो का असर आने वाले महीनों में और गहरा सकता है और फरवरी के अंत तक इसके अपने चरम स्तर पर पहुंचने की पूरी संभावना है।
इस संभावित चुनौती से निपटने के लिए राज्य प्रशासन अभी से कमर कस चुका है। मुख्यमंत्री ने बताया कि भविष्य की आपात स्थितियों का सामना करने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे और जल प्रबंधन से जुड़े निर्णय अभी से प्राथमिकता के आधार पर लिए जा रहे हैं ताकि ऐन वक्त पर जनता को किसी बड़ी मुसीबत का सामना न करना पड़े।
गडचिरोली में बाढ़ और आम जनता से विशेष अपील
एक तरफ जहां राज्य का बड़ा हिस्सा सूखे की चपेट में है, वहीं दूसरी तरफ मौसम की बेरुखी का दूसरा रूप भी देखने को मिला है। छत्तीसगढ़ राज्य में हुई मूसलाधार बारिश के कारण महाराष्ट्र के गडचिरोली जिले के भामरागड इलाके में अचानक बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई थी।
इस बारे में अपडेट देते हुए सीएम ने कहा कि स्थानीय प्रशासन बाढ़ प्रभावितों को हरसंभव राहत सामग्री और सहायता मुहैया कराने में जुटा हुआ है। वे खुद लगातार जिला प्रशासन के संपर्क में हैं। राहत की बात यह है कि अब बाढ़ का पानी उतर रहा है, स्थिति धीरे-धीरे नियंत्रण में आ रही है और जनजीवन सामान्य होने की पटरी पर लौट रहा है।
अंत में, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य की जनता से एक अपील करते हुए कहा कि इस कठिन समय में सभी नागरिकों को जिम्मेदारी का परिचय देना चाहिए। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे अनावश्यक खर्चों से बचें और सरकार के साथ-साथ सूखाग्रस्त क्षेत्रों के जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए आगे आएं, क्योंकि सामूहिक सहयोग से ही इस बड़ी आपदा से पार पाया जा सकता है।