सड़कों पर दौड़ने वाले वाहनों की सुरक्षा और उनके रखरखाव को लेकर प्रशासन जितना सख्त नजर आता है, हकीकत उससे कहीं ज्यादा चौंकाने वाली है। महाराष्ट्र के परिवहन विभाग से एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने मोटर वाहन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्य में वाहनों को फिटनेस सर्टिफिकेट (प्रमाण पत्र) जारी करने में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं और धांधली पकड़ी गई है। इस गंभीर मामले का संज्ञान लेते हुए परिवहन आयुक्त ने प्रदेशभर के कुल 334 आरटीओ (RTO) और एआरटीओ (ARTO) अधिकारियों को आधिकारिक नोटिस थमाया है।
ठाणे आरटीओ के 730 वाहनों की संदिग्ध भूमिका
इस पूरे घोटाले की आंच सबसे ज्यादा ठाणे क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) पर पड़ी है। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि अकेले ठाणे आरटीओ के अधिकार क्षेत्र में आने वाले करीब 730 वाहनों के फिटनेस मामलों में भारी गड़बड़ियां की गई हैं। नियमों को ताक पर रखकर उन वाहनों को भी फिटनेस सर्टिफिकेट दे दिए गए, जो शायद तकनीकी रूप से सड़कों पर उतरने के लायक नहीं थे। परिवहन विभाग के उच्च अधिकारियों द्वारा की गई इस आंतरिक जांच ने महकमे में हड़कंप मचा दिया है।
सूत्रों के अनुसार, यह सिर्फ ठाणे तक ही सीमित नहीं है, बल्कि राज्य के अन्य जिलों के परिवहन कार्यालयों से भी इस तरह की अनियमितताएं सामने आ रही हैं। बिना किसी भौतिक निरीक्षण (Physical Inspection) के कागजों पर ही वाहनों को फिट घोषित कर देना और भारी भरकम कमर्शियल वाहनों को सड़कों पर दौड़ने की अनुमति देना एक बड़ा सड़क सुरक्षा संकट पैदा कर सकता है।
कैसे खुला इस सनसनीखेज खेल का राज?
किसी भी कमर्शियल या प्राइवेट वाहन को एक तय समय के बाद सड़क पर चलने के लिए फिटनेस टेस्ट पास करना अनिवार्य होता है। यह टेस्ट वाहन के ब्रेक, स्टीयरिंग, प्रदूषण स्तर, टायर और समग्र यांत्रिक स्थिति की जांच के लिए किया जाता है। लेकिन पिछले कुछ महीनों से लगातार मिल रही शिकायतों के आधार पर परिवहन विभाग ने डिजिटल रिकॉर्ड और डेटा की स्क्रूटनी शुरू की।
जब डेटा का मिलान किया गया, तो पाया गया कि कई मामलों में तय मानदंडों को पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया था। कुछ मामलों में तो वाहन बिना आरटीओ परिसर में आए ही पास हो गए। इस डिजिटल ऑडिट के बाद परिवहन आयुक्त कार्यालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए तुरंत प्रभाव से संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने का फैसला किया।
334 अधिकारियों को नोटिस, बढ़ सकती है मुश्किलें
परिवहन विभाग द्वारा उठाए गए इस कड़े कदम के तहत कुल 334 आरटीओ और एआरटीओ स्तर के अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। इन अधिकारियों से पूछा गया है कि उनके कार्यकाल के दौरान नियमों के विरुद्ध जाकर फिटनेस प्रमाण पत्र क्यों और किस परिस्थिति में जारी किए गए।
- जांच का दायरा: राज्य के कई प्रमुख जिलों के आरटीओ कार्यालय इस जांच के दायरे में हैं।
- कार्रवाई की प्रकृति: नोटिस का संतोषजनक जवाब न मिलने पर विभागीय जांच के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
- सड़क सुरक्षा पर असर: इस तरह के फर्जीवाड़े से राज्य में सड़क हादसों की आशंकाएं काफी बढ़ जाती हैं।
सड़क सुरक्षा और आम जनता की जान से खिलवाड़
विशेषज्ञों का मानना है कि वाहन फिटनेस सर्टिफिकेट में इस तरह की धांधली सीधे तौर पर आम जनता की जान के साथ खिलवाड़ है। अनफिट वाहन जब तेज रफ्तार से हाइवे या शहरी सड़कों पर दौड़ते हैं, तो उनके ब्रेक फेल होने या तकनीकी खराबी आने के कारण भीषण सड़क हादसे होते हैं। हाल के दिनों में सड़क सुरक्षा को लेकर केंद्र और राज्य सरकारें दोनों ही गंभीर हैं, ऐसे में सरकारी तंत्र के भीतर से ही इस तरह की अनियमितताओं का सामने आना बेहद चिंताजनक विषय है।
आगे क्या होगी कार्रवाई?
परिवहन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस पूरे मामले की तह तक जाया जा रहा है। जिन 334 अधिकारियों को नोटिस मिले हैं, उनके जवाबों की समीक्षा के बाद एक उच्च स्तरीय कमेटी अपनी रिपोर्ट पेश करेगी। यदि इस घोटाले में किसी भी बिचौलिए या संगठित गिरोह की संलिप्तता पाई जाती है, तो उनके खिलाफ भी पुलिस में आपराधिक मामले दर्ज किए जाएंगे।
यह देखना दिलचस्प होगा कि महाराष्ट्र सरकार का यह विभाग इस भ्रष्टाचार की परतें किस हद तक खोल पाता है और क्या वाकई दोषी अधिकारियों पर गाज गिरती है या मामला कागजों तक ही सिमट कर रह जाता है। फिलहाल इस कार्रवाई से पूरे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा हुआ है और हर कोई अगली रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है।