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क्रांतिवीर उमाजी नाईक की जयंती पर सीएम फडणवीस ने किया नमन, याद किया शौर्य

क्रांतिवीर उमाजी नाईक की जयंती पर सीएम फडणवीस ने किया नमन, याद किया शौर्य

भारतीय इतिहास के पन्नों में कुछ नाम ऐसे दर्ज हैं, जिनकी वीरता और स्वाभिमान की गूंज सदियों तक सुनाई देती है। अंग्रेजी हुकूमत की चूलें हिला देने वाले महान क्रांतिकारी योद्धा आद्य क्रांतिवीर राजे उमाजी नाईक की जयंती के अवसर पर पूरा महाराष्ट्र उन्हें याद कर गर्व महसूस कर रहा है। इसी क्रम में, प्रदेश के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आगे आकर इस महान नायक को अपनी आत्मीय श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके अदम्य साहस को सलाम किया।

प्रतिमा पर पुष्पहार अर्पित कर किया गया नमन

जयंती के इस पावन अवसर पर आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आद्य क्रांतिवीर राजे उमाजी नाईक की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। पुष्पहार अर्पित करने के बाद उन्होंने कुछ पल निकालकर इस महान योद्धा के संघर्षपूर्ण जीवन और उनके द्वारा दिए गए बलिदान को गहराई से याद किया। मुख्यमंत्री ने इस दौरान कहा कि ऐसे स्वाभिमानी नायकों का जीवन आज की पीढ़ी के लिए एक ऐसी पाठशाला है, जो देशभक्ति और न्याय के रास्ते पर चलना सिखाती है।

कार्यक्रम में मौजूद अन्य गणमान्य लोगों और अधिकारियों ने भी क्रांतिवीर की प्रतिमा के समक्ष शीश झुकाया। इस दौरान पूरा माहौल देशभक्ति के नारों और राजे उमाजी नाईक की जय-जयकार से गूंज उठा। राज्यभर में विभिन्न आयोजनों के जरिए उनके योगदान को याद किया जा रहा है, जिससे नई पीढ़ी उनके इतिहास से रूबरू हो सके।

ब्रिटिश राज के खिलाफ बगावत का बिगुल

जब देश पर विदेशी ताकतों का शिकंजा कसता जा रहा था और आम जनता ब्रिटिश हुकूमत के अत्याचारों तले पिस रही थी, तब राजे उमाजी नाईक ने अंग्रेजी सत्ता के सामने घुटने टेकने से साफ इनकार कर दिया था। महाराष्ट्र की धरती पर उनका नाम अदम्य साहस और प्रतिरोध का पर्याय बन चुका था। उन्होंने न सिर्फ अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा खोला, बल्कि अन्याय के खिलाफ डटकर मुकाबला करने की एक मजबूत परंपरा की नींव रखी।

  • अन्याय के खिलाफ मुखर विरोध: विदेशी हुकूमत के हर काले कानून और जुल्म का उन्होंने पुरजोर विरोध किया।
  • स्वाभिमान की मिसाल: तमाम मुश्किलों के बावजूद उन्होंने कभी किसी सत्ता के आगे अपनी स्वाभिमानी पीठ नहीं झुकने दी।
  • ऐतिहासिक योगदान: महाराष्ट्र के क्रांतिकारी इतिहास में उन्हें आद्य क्रांतिवीर का सर्वोच्च सम्मान प्राप्त है।

युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्त्रोत

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपने संबोधन में इस बात पर विशेष जोर दिया कि राजे उमाजी नाईक का संपूर्ण जीवन समाज और देश के प्रति समर्पण की एक अनूठी मिसाल है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जब युवा विभिन्न प्रकार की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, तब ऐसे महान नायकों का इतिहास उन्हें भीतर से मजबूत बनाता है।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि राजे उमाजी नाईक का संघर्ष हमें यह सिखाता है कि अन्याय चाहे कितना भी ताकतवर क्यों न हो, अगर इरादे बुलंद हों तो उसका मुकाबला किया जा सकता है। उनके बलिदान की गाथाओं को घर-घर और जन-जन तक पहुंचाना बेहद आवश्यक है, ताकि हमारी आने वाली पीढ़ियां अपने गौरवशाली इतिहास को कभी न भूलें।

इतिहास के पन्नों से वर्तमान तक गूंजता संदेश

आज 07 September 2026 के इस दिन जब हम आधुनिक भारत में सांस ले रहे हैं, तो इन अधिकारों और स्वतंत्रता के पीछे उमाजी नाईक जैसे अनगिनत सेनानियों का खून और पसीना शामिल है। उनकी जयंती केवल एक औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह आत्मविश्लेषण करने का अवसर है कि हमने अपने राष्ट्र निर्माण में उनके सपनों को कितना साकार किया है।

राज्य सरकार द्वारा इस दिन को जिस भव्यता और सम्मान के साथ मनाया गया है, वह इस बात का सबूत है कि सरकार ऐतिहासिक महापुरुषों के सम्मान के प्रति पूरी तरह कटिबद्ध है। अंत में, मुख्यमंत्री ने सभी प्रदेशवासियों से अपील की कि वे राजे उमाजी नाईक के आदर्शों को अपने जीवन में उतारें और एक सशक्त, भयमुक्त और स्वाभिमानी समाज के निर्माण में अपना योगदान दें।

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निवेदिता ठाकुर

निवेदिता ठाकुर

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निवेदिता ठाकुर जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती है...

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