स्विट्जरलैंड के जिनेवा में आयोजित संयुक्त राष्ट्र के यूएन फोरम ऑफ मेयर्स में नासिक की महापौर हिमगौरी आहेर आडके ने शहर के भविष्य का खाका प्रस्तुत किया। इस वैश्विक मंच पर नासिक की सांस्कृतिक विरासत, आगामी सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियों, गोदावरी नदी के पुनर्जीवन और पर्यावरण अनुकूल शहरी विकास के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया। महापौर ने 2030 तक शहर में प्रति व्यक्ति 5 वर्ग मीटर हरित क्षेत्र विकसित करने के लक्ष्य के लिए संयुक्त राष्ट्र से आर्थिक एवं तकनीकी सहयोग की मांग की है।
जिनेवा में वैश्विक मंच पर नासिक के विकास की प्रस्तुतियां
जिनेवा दौरे से लौटने के बाद महापौर हिमगौरी आहेर आडके ने एक पत्रकार परिषद में अपने अनुभवों और मंच पर हुई चर्चाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर नासिक की पहचान को वैश्विक स्तर पर मजबूत करने के लिए सतत शहरी विकास, यातायात प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक तकनीक के उपयोग पर जोर दिया गया। तेजी से बढ़ते शहरीकरण के दौर में नासिक के सामने अपने हरित क्षेत्रों को सुरक्षित रखने और उनका दायरा बढ़ाने की बड़ी चुनौती है। इसी को ध्यान में रखते हुए अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से सहयोग की अपेक्षा जताई गई है।
2030 तक हरित नासिक का लक्ष्य
घोषित योजनाओं के अनुसार, वर्ष 2030 तक नासिक में प्रति व्यक्ति 5 वर्ग मीटर हरित क्षेत्र विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। महापौर ने स्पष्ट किया कि हरित नासिक की यह संकल्पना केवल कागजी वृक्षारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें शहर की मौजूदा वृक्ष संपदा का संरक्षण, सार्वजनिक खुली जगहों का सुनियोजित विकास और स्थानीय नागरिकों को स्वच्छ तथा स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराना शामिल है। इसके अलावा, यूरोपीय देशों की सतत विकास प्रणालियों का अध्ययन करने और उन्हें स्थानीय स्तर पर लागू करने की दिशा में भी विचार किया जा रहा है।
सिंहस्थ कुंभ मेले में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग
आगामी सिंहस्थ कुंभ मेले के दौरान नासिक में देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना है। इस विशाल आयोजन को ध्यान में रखते हुए भीड़ प्रबंधन, यातायात नियोजन, कड़ी सुरक्षा और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्थाओं को सुदृढ़ बनाने पर विशेष जोर दिया गया है। इसके लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और अन्य आधुनिक तकनीकों का उपयोग करने की रूपरेखा प्रस्तुत की गई है। महापौर ने रेखांकित किया कि कुंभ मेले के लिए तैयार किया जाने वाला बुनियादी ढांचा केवल अस्थायी न हो, बल्कि भविष्य में भी शहर के नागरिकों के लिए स्थायी रूप से उपयोगी साबित हो। साथ ही, सड़कों, सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था और दिव्यांगजनों के लिए सुगम सुविधाओं के विकास को भी प्राथमिकता दी जाएगी।
गोदावरी नदी का पुनर्जीवन और तकनीकी सहयोग
नासिक के लिए गोदावरी नदी का प्रदूषण रोकना और उसका समग्र पुनर्जीवन अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषय है। जिनेवा के इस मंच पर नदी में मिलने वाले सांडपानी के सटीक प्रबंधन, उन्नत जलशुद्धीकरण प्रणालियों और नदी के प्राकृतिक पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखने के लिए आधुनिक तकनीकों की मांग की गई है। गोदावरी की स्वच्छता के लिए दीर्घकालीन और वैज्ञानिक उपायों परवान चढ़ाने हेतु विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं, शैक्षणिक संस्थानों और औद्योगिक क्षेत्रों के साथ तकनीकी सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं तलाशी गई हैं।
सिंगापुर के साथ सिस्टर सिटी साझेदारी की उम्मीद
अंतरराष्ट्रीय सहयोग के दायरे को बढ़ाते हुए नासिक और सिंगापुर के बीच 'सिस्टर सिटी' साझेदारी स्थापित करने की संभावनाएं भी टटोली गई हैं। इससे शहरी नियोजन और तकनीकी आदान-प्रदान में मदद मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, वैश्विक मंच पर महिला सशक्तीकरण के प्रसंग में राजमाता जिजाऊ और पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर की ऐतिहासिक विरासत के महत्व को भी रेखांकित किया गया। इन उच्चस्तरीय बैठकों और चर्चाओं के निष्कर्षों को अब नासिक महानगरपालिका के आगामी विकास कार्यों में शामिल करने और उनका व्यावहारिक लाभ उठाने का प्रयास किया जाएगा।