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चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाने वाली कांग्रेस पर भड़के महेंद्र भट्ट, कह दी बड़ी बात

चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाने वाली कांग्रेस पर भड़के महेंद्र भट्ट, कह दी बड़ी बात

उत्तराखंड की राजनीति में इन दिनों चुनावी प्रक्रियाओं और संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को लेकर सियासी पारा सातवें आसमान पर है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। देहरादून स्थित प्रदेश मुख्यालय में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत के दौरान महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस पार्टी द्वारा उठाए जा रहे 'वोट चोरी' और एसआईआर (SIR) से जुड़े तमाम सवालों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि कांग्रेस पार्टी अपनी संभावित और आसन्न राजनीतिक हार को देखकर पूरी तरह घबरा चुकी है, और इसी बौखलाहट में वह देश की स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव व्यवस्था पर बेबुनियाद संशय पैदा करने की कोशिश कर रही है।

नियुक्ति प्रक्रिया पर मोदी सरकार का बचाव, विपक्ष को दी गई जगह

कांग्रेस के आरोपों का कड़ा जवाब देते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने केंद्र सरकार की पारदर्शी कार्यशैली का खुलकर बचाव किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अपने लंबे शासनकाल के उन काले अध्यायों और तौर-तरीकों को भी एक बार जरूर याद करना चाहिए, जब देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पूरी तरह से राजनीतिक इच्छाशक्ति के अधीन होती थी। तब ऐसी कोई पुख्ता और पारदर्शी वैधानिक चयन प्रक्रिया मौजूद नहीं थी, जैसी आज नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यकाल में स्थापित की गई है।

महेंद्र भट्ट ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली मौजूदा सरकार ने ऐतिहासिक सुधार करते हुए चुनाव आयुक्तों की चयन समिति में विपक्ष के नेता को भी आधिकारिक तौर पर शामिल किया है। यह इस बात का सबसे बड़ा और पुख्ता प्रमाण है कि सरकार चुनावी संस्थाओं की स्वायत्तता, पारदर्शिता और शुचिता बनाए रखने के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसके विपरीत, कांग्रेस के दौर में इन संवैधानिक पदों पर नियुक्तियों को लेकर अक्सर गंभीर सवाल खड़े होते रहे हैं।

चुनाव आयोग की वर्तमान संरचना और कार्यप्रणाली

भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली का जिक्र करते हुए भाजपा नेता ने बताया कि वर्तमान में आयोग एक बेहद मजबूत और बहुसदस्यीय संस्था के रूप में कार्य कर रहा है। निर्वाचन आयोग के मौजूदा ढांचे के तहत ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जबकि सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी चुनाव आयुक्त के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्वाचन आयोग जैसी संस्था कोई एक व्यक्ति विशेष की मर्जी से नहीं चलती, बल्कि यह एक बहुसदस्यीय निकाय है जहाँ हर महत्वपूर्ण निर्णय पूर्ण बहुमत के आधार पर लिया जाता है। ऐसे में किसी एक प्रक्रिया या निर्णय को लेकर पूरी संस्था की निष्पक्षता पर सवाल उठाना न केवल अनुचित है, बल्कि यह देश के लोकतंत्र के लिए भी बेहद खतरनाक मिसाल कायम करता है।

कांग्रेस के पुराने इतिहास पर कटाक्ष, दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप

महेंद्र भट्ट यहीं नहीं रुके। उन्होंने कांग्रेस के इतिहास की ओर इशारा करते हुए पुराने विवादास्पद प्रकरणों की भी लंबी फेरिहर सामने रखी। उन्होंने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एन. गोपालस्वामी और नवीन चावला के बीच के विवादित प्रकरणों का हवाला देते हुए कांग्रेस को आईना दिखाया। भाजपा नेता ने यह भी याद दिलाया कि कैसे कांग्रेस शासनकाल में बड़े पदों पर रहे पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टी.एन. शेषन और एम.एस. गिल जैसे दिग्गज अधिकारी सेवानिवृत्ति के ठीक बाद सक्रिय राजनीति के मैदान में उतर गए थे।

  • पारदर्शी चयन प्रक्रिया: वर्तमान सरकार ने चयन समिति में विपक्ष के नेता को शामिल किया है।
  • बहुसदस्यीय संस्था: चुनाव आयोग के फैसले बहुमत के आधार पर लिए जाते हैं।
  • ऐतिहासिक उदाहरण: पूर्व के कई आयुक्तों का राजनीतिक जुड़ाव जगजाहिर है।
  • संवैधानिक मर्यादा: राजनीतिक स्वार्थ के लिए संस्थाओं पर कीचड़ नहीं उछालना चाहिए।

इन पुराने और ऐतिहासिक उदाहरणों के जरिए महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस पार्टी पर तीखा तंज कसते हुए कहा कि जो दल खुद अपने इतिहास में चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं का राजनीतिक इस्तेमाल करने के लिए कुख्यात रहा हो, आज वही दल निष्पक्षता का ढोंग रच रहा है। यह कांग्रेस के स्पष्ट दोहरे मापदंडों को उजागर करता है।

वोट चोरी और एसआईआर के मुद्दे पर सियासी संग्राम

हाल के दिनों में विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे 'वोट चोरी' के गंभीर आरोपों पर बोलते हुए भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि जब-जब चुनावी मैदान में हार सामने दिखाई देती है, तब-तब विपक्ष का हौसला डगमगा जाता है और वे ईवीएम या चुनाव आयोग पर ठीकरा फोड़ने लगते हैं। वर्तमान में एसआईआर (SIR) और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्ष द्वारा जो बेवजह का बवंडर खड़ा किया जा रहा है, उसका एकमात्र उद्देश्य जनता के मन में भ्रम और अविश्वास के बीज बोना है।

दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग ने अपनी तरफ से यह स्पष्ट कर दिया है कि उसकी तमाम प्रक्रियाएं पूरी तरह से कानून के दायरे में रहकर और नियमों का पालन करते हुए संचालित होती हैं। चूंकि यह पूरा मामला अब न्यायिक जांच के कानूनी दायरे में भी आ चुका है, इसलिए किसी भी राजनीतिक दल द्वारा इस पर अनर्गल बयानबाजी करना न्यायपालिका और संविधान दोनों का अनादर करने के समान है।

लोकतंत्र की साख से खिलवाड़ बंद करे विपक्ष

प्रेसवार्ता के अंत में महेंद्र भट्ट ने सभी राजनीतिक दलों से अपील करते हुए कहा कि भारत का लोकतंत्र दुनिया भर में अपनी मजबूती के लिए जाना जाता है। चुनाव आयोग जैसी स्वायत्त और संवैधानिक संस्थाएं हमारे इस लोकतांत्रिक ढांचे की मजबूत रीढ़ हैं। चंद राजनीतिक फायदों और चुनावी असफलताओं को छिपाने के लिए इन पवित्र संस्थाओं की विश्वसनीयता पर बार-बार सवालिया निशान लगाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

उन्होंने आम जनता से भी यह आह्वान किया कि वे ऐसे राजनीतिक षड्यंत्रों और भ्रामक प्रचारों से पूरी तरह सतर्क रहें, जो देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति जनता के अटूट विश्वास को कमजोर करने का कुत्सित प्रयास कर रहे हैं। भाजपा अध्यक्ष के इस कड़े बयान के बाद राज्य की राजनीति में बहस और तेज होने के पूरे आसार बन गए हैं।

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नसीम अहमद

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नसीम अहमद जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं। उन...

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