मध्य प्रदेश के धार्मिक और आध्यात्मिक नगर मैहर में शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को गणेश उत्सव का समापन बेहद खास अंदाज में हुआ। आसमान से बरस रही झमाझम बारिश भी भक्तों के उत्साह और आस्था को डिगा नहीं सकी। सुबह से ही हो रहे लगातार जलजमाव और बादलों की लुकाछिपी के बीच शहर के कोने-कोने से 'गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ' के गगनभेदी जयकारे गूंजते रहे। विघ्नहर्ता भगवान गणेश की प्रतिमाओं को विधि-विधान, पारंपरिक अनुष्ठानों और नम आंखों के साथ विदाई दी गई।
बारिश भी नहीं रोक पाई भक्तों का सैलाब
शुक्रवार को सुबह से ही मौसम का मिजाज बदला हुआ था और झमाझम बारिश का दौर जारी था। आमतौर पर ऐसी वेदर कंडीशंस में सड़कों पर चहल-पहल कम हो जाती है, लेकिन मैहर की तस्वीर बिल्कुल उलट थी। शहर के मुख्य मार्गों से लेकर गलियों तक हर तरफ भक्तों का रेला नजर आ रहा था। हाथों में छाता लिए और बारिश में पूरी तरह भीग चुके श्रद्धालु ढोल-नगाड़ों की थाप पर झूमते हुए नजर आए। डीजे और पारंपरिक वाद्यों की धुन पर युवा थिरक रहे थे, तो वहीं महिलाओं और बुजुर्गों ने भी बप्पा की विदाई यात्रा में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
भक्तों का कहना था कि विघ्नहर्ता की विदाई पर यह बारिश प्रकृति का आशीर्वाद है, जो शहर को और अधिक पवित्र बना रही है। पंडालों से लेकर विसर्जन घाटों तक हर जगह सिर्फ भक्तिमय माहौल ही दिखाई दे रहा था।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम और प्रशासनिक चौकसी
किसी भी संभावित अप्रिय घटना को रोकने और शांतिपूर्ण विसर्जन सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग पूरी तरह मुस्तैद नजर आया। मैहर थाना प्रभारी अभिषेक सिंह परिहार ने खुद कमान संभालते हुए विभिन्न विसर्जन स्थलों का मैराथन निरीक्षण किया। सुरक्षा व्यवस्था इस प्रकार डिजाइन की गई थी कि आम जनता को न्यूनतम असुविधा हो और नियमों का कड़ाई से पालन हो सके।
पुलिस बल की तैनाती चप्पे-चप्पे पर की गई थी। अधिकारी लगातार मॉनिटरिंग कर रहे थे ताकि जुलूस के दौरान ट्रैफिक बाधित न हो और कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में रहे।
निर्धारित विसर्जन कुंडों पर हुआ सुरक्षित अनुष्ठान
पर्यावरण संरक्षण और जनसुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नगर पालिका और प्रशासन ने इस बार विशेष तैयारियां की थीं। मुख्य रूप से निम्नलिखित स्थानों पर कृत्रिम विसर्जन कुंड और विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं:
- तमस नदी तट: मुख्य विसर्जन स्थल जहां सबसे अधिक भीड़ देखने को मिली।
- सोनवारी क्षेत्र: स्थानीय निवासियों की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम।
- बांधा बेरियल: जल स्रोतों की सुरक्षा और सुगम आवागमन के लिए प्रशासनिक केंद्र।
इन सभी स्थानों पर नगर पालिका और पुलिस के कर्मचारियों की ड्यूटियां लगाई गई थीं। प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि कोई भी व्यक्ति सीधे गहरे पानी में न उतरे, बल्कि बनाए गए कुंडों या निर्धारित सुरक्षा घेरे के भीतर ही प्रतिमाओं का विसर्जन करे।
भक्ति और अनुशासन का अद्भुत संगम
भारी बारिश के कारण कई जगहों पर फिसलन और कीचड़ की स्थिति बन गई थी, इसके बावजूद वालंटियर्स और पुलिसकर्मियों ने मिलकर ट्रैफिक और भीड़ को नियंत्रित रखा। बुजुर्गों और बच्चों की सुरक्षा के लिए विशेष सहायता केंद्र भी बनाए गए थे। मैहर के नागरिकों ने भी अनुशासित तरीके से प्रशासन का सहयोग किया, जिसके चलते पूरा विसर्जन कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सकुशल संपन्न हो गया।
शाम ढलते-ढलते अधिकांश प्रतिमाओं का विसर्जन विधि-विधान के साथ पूरा कर लिया गया। बप्पा को विदा करते समय हर आंख नम थी, लेकिन अगले साल फिर आने के वादे के साथ शहरवासियों के चेहरे पर एक संतोष और उम्मीद का भाव भी साफ झलक रहा था। मैहर का यह गणेशोत्सव अपनी अनूठी यादों और अनुशासित व्यवस्था के साथ इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है।