जिंदगी की भागदौड़ और उम्मीदों के बीच एक ऐसी मनहूस खबर सामने आई है जिसने हर किसी के कलेजे को झकझोर कर रख दिया है। उत्तर प्रदेश के मीरजापुर जिले से एक बेहद दर्दनाक और मार्मिक घटना प्रकाश में आई है, जहां एक चार साल का मासूम पानी से भरे गहरे गड्ढे की भेंट चढ़ गया। इस दुर्घटना के बाद से पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। खुशियों से भरा एक घर अचानक मातम के आगोश में समा गया है।
घटना की शुरुआत: सुबह भाई के साथ निकला था मासूम
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह हृदयविदारक हादसा मीरजापुर जिले के मड़िहान तहसील क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बभनी थपनवा गांव में शनिवार को हुआ। मृत मासूम की पहचान गांव निवासी संतोष के छोटे बेटे चार वर्षीय लक्ष्मण के रूप में हुई है। परिवार के लिए यह दिन जिंदगी का सबसे काला दिन बन गया, जिसकी कल्पना शायद किसी ने सपने में भी नहीं की होगी।
पारिवारिक सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों से मिली जानकारी के मुताबिक, शनिवार की सुबह लक्ष्मण अपने बड़े भाई दिव्यांश के साथ घर से बाहर निकला था। आमतौर पर बच्चों का यूं बाहर निकलना और आसपास खेलना एक सामान्य बात होती है, लेकिन किसे पता था कि यह सामान्य सी सुबह इस परिवार के लिए कभी न भूलने वाला वज्रपात साबित होगी। दोपहर का वक्त बीतने लगा और जब बच्चे घर वापस नहीं लौटे, तो परिजनों के माथे पर चिंता की लकीरें उभरने लगीं।
तलाश शुरू हुई और मिला गहरे सदमे का संकेत
जब काफी देर तक बच्चे घर नहीं पहुंचे, तो मां रंजना देवी और अन्य परिजनों की बेचैनियां बढ़ने लगीं। उन्होंने आसपास के इलाकों में बच्चों की तलाश शुरू कर दी। मां रंजना देवी ने हिम्मत जुटाते हुए पड़ोसियों के साथ मिलकर गांव की गलियों और संभावित ठिकानों पर खोजबीन तेज कर दी। तलाश करते-करते वे सब अपने घर से करीब 150 मीटर की दूरी पर स्थित एक सड़क किनारे पहुंचे।
उस सुनसान जगह पर पहुंचते ही मां की नजर एक ऐसी चीज पर पड़ी जिसने उनके पैरों तले जमीन खिसका दी। सड़क के किनारे बने एक पानी से भरे गहरे गड्ढे में चार वर्षीय लक्ष्मण का स्कूल बैग तैर रहा था। बैग को देखते ही परिजनों की सांसे अटक गईं। उन्हें अनहोनी की आशंका सताने लगी और उनका दिल जोर-जोर से धड़कने लगा।
गड्ढे में उतरा ग्रामीण, मिला मासूम का शव
स्कूल बैग को पानी में तैरता देख वहां मौजूद लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई। बिना एक पल गंवाए, ग्रामीणों ने अपनी सूझबूझ और हिम्मत का परिचय देते हुए उस पानी से भरे खतरनाक गड्ढे में उतरकर तलाश शुरू कर दी। पानी मटमैला और गहरा था, जिसके कारण अंदर कुछ साफ नहीं दिख रहा था। ग्रामीणों ने जब अंदर टटोला, तो मासूम लक्ष्मण पानी के भीतर अछूता डूबा हुआ मिला।
जैसे ही बच्चे को पानी से बाहर निकाला गया, वहां चीख-पुकार मच गई। शरीर पूरी तरह बेजान हो चुका था और सांसें थम चुकी थीं। एक पल के लिए वहां मौजूद हर शख्स का गला रुंध गया। मां का रोना और विलाप देखकर पत्थर दिल इंसान भी पिघल जाए।
अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने की पुष्टि
उम्मीद की एक आखिरी किरण बाकी थी, इसलिए परिजन बिना समय गंवाए आनन-फानन में मासूम को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) मड़िहान भागे। वहां पहुंचते ही डॉक्टरों ने तुरंत बच्चे का परीक्षण किया। प्रभारी चिकित्सक डॉ. राधेश्याम वर्मा ने गहन जांच के बाद लक्ष्मण को मृत घोषित कर दिया।
डॉक्टर वर्मा ने स्पष्ट किया कि बच्चे की मौत पानी में डूबने की वजह से ही हुई है। अस्पताल पहुंचते-पहुंचते बहुत देर हो चुकी थी। इस अधिकारिक पुष्टि के बाद परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। अस्पताल परिसर में रोते-बिलखते परिवार को संभालना वहां मौजूद लोगों के लिए भी बहुत कठिन हो रहा था।
प्रशासनिक और स्थानीय स्तर पर जानकारी
घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग के अधिकारी भी सक्रिय हुए। पटेहरा के बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) रामनिवास ने इस मामले पर जानकारी देते हुए बताया कि जिउतिया पर्व के पावन अवसर पर शनिवार को आंगनबाड़ी केंद्र पूरी तरह से बंद था। इसके कारण बच्चे स्कूल या आंगनबाड़ी में नहीं थे और घर के बाहर खेल रहे थे।
मृतक बच्चे के पिता संतोष के बारे में पता चला है कि वे परिवार के भरण-पोषण के लिए देश की राजधानी दिल्ली में रहकर स्कूल बस चलाने का काम करते हैं। घर से दूर रोजी-रोटी कमाने वाले पिता को जब इस भयानक हादसे की खबर मिली, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। वे फौरन मीरजापुर के लिए रवाना हो गए। इस आकस्मिक त्रासदी ने पूरे गांव को सदमे में डाल दिया है और हर कोई इस परिवार की इस दुखद घड़ी में संवेदना व्यक्त कर रहा है।
सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल और सबक
इस हृदयविदारक घटना ने एक बार फिर हमारे समाज के सामने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि रिहायशी इलाकों या सड़कों के किनारे इस तरह के असुरक्षित और खुले पानी से भरे गड्ढे क्यों छोड़े जाते हैं? क्या स्थानीय प्रशासन या निर्माण कार्यों से जुड़े लोगों की यह जिम्मेदारी नहीं है कि वे ऐसे जानलेवा गड्ढों को समय रहते बंद करें या उनकी बैरिकेडिंग करें?
- खुले गड्ढे बने मौत का कुआं: सड़कों के किनारे बिना सुरक्षा के छोड़े गए गड्ढे अक्सर ऐसे हादसों को न्योता देते हैं।
- अभिभावकों के लिए चेतावनी: छोटे बच्चों को कभी भी पानी के स्रोतों या असुरक्षित स्थानों के पास अकेला न छोड़ें।
- प्रशासनिक लापरवाही: स्थानीय स्तर पर ऐसे जोखिम भरे स्थानों की पहचान कर त्वरित कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में किसी अन्य हंसते-खेलते परिवार को इस तरह का गम न झेलना पड़े।
फिलहाल, इस घटना के बाद से बभनी थपनवा गांव के हर घर में चूल्हा नहीं जला है। ग्रामीण इस बात से बेहद आहत हैं कि जरा सी लापरवाही ने एक मासूम की हंसती-खेलती जिंदगी को हमेशा के लिए छीन लिया। प्रशासन और समाज दोनों को मिलकर ऐसे खतरों के प्रति जागरूक होने की सख्त जरूरत है ताकि आगे से किसी मां की गोद इस तरह सूनी न हो।