झारखंड की राजनीति इन दिनों एक नए मोड़ पर खड़ी है, जहाँ राजनीतिक दल आगामी चुनौतियों और रणनीतियों को अमलीजामा पहनाने में जुटे हैं। इसी कड़ी में राजधानी रांची से सटे कांके के बुकरू स्थित आवास पर आजसू पार्टी की केंद्रीय कार्यसमिति की एक बेहद अहम और उच्चस्तरीय बैठक संपन्न हुई। इस बैठक की अध्यक्षता पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष और राज्य के जाने-माने नेता सुदेश महतो ने की। बैठक का मुख्य फोकस संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक धारदार बनाना और आम जनता के मुद्दों को पूरी मुखरता के साथ उठाना रहा।
जनता के सवालों पर केंद्रित होगी राजनीति: सुदेश महतो
बैठक के दौरान पार्टी सुप्रीमो सुदेश महतो ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि झारखंड की राजनीति का मुख्य केंद्र यहां की आम जनता के वास्तविक सवाल होने चाहिए। उन्होंने पार्टी के तमाम नेताओं और कार्यकर्ताओं को याद दिलाया कि एक राजनीतिक दल होने के नाते आजसू का यह नैतिक और राजनीतिक दायित्व बनता है कि वह राज्य के शोषित, वंचित और आम नागरिकों की आवाज बने। जनता के अधिकार, उनके सम्मान और समग्र विकास से जुड़े तमाम मुद्दों को सड़क से लेकर सदन तक पूरी मजबूती के साथ उठाया जाना चाहिए।
सुदेश महतो ने पार्टी कैडर से आह्वान किया कि वे अपनी बैठकों और कमेटियों तक सीमित न रहें, बल्कि जनता के बीच निरंतर संवाद बनाए रखें। सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर पार्टी का रुख बेहद स्पष्ट और आक्रामक होना चाहिए ताकि लोगों को यह महसूस हो सके कि आजसू उनके हक की लड़ाई के लिए हमेशा तत्पर है।
11 अक्टूबर को गिरिडीह के पीरटांड़ में 'युवा संवाद' का शंखनाद
बैठक में सबसे महत्वपूर्ण एजेंडा आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करना था। पार्टी ने युवाओं को अपने साथ जोड़ने और उनकी समस्याओं को समझने के लिए 'युवा संवाद' कार्यक्रम की घोषणा की है। इस विशेष अभियान की शुरुआत आगामी 11 अक्टूबर को गिरिडीह विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पीरटांड़ से की जाएगी।
पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पीरटांड़ में होने वाले इस 'युवा संवाद' के सफल आयोजन के बाद झारखंड के अन्य विधानसभा क्षेत्रों में भी इस तरह के कार्यक्रमों की झड़ी लगाई जाएगी। इसके जरिए पार्टी राज्य के बेरोजगार युवाओं, छात्रों और युवा वर्ग की आकांक्षाओं को मंच प्रदान करना चाहती है, जिससे उनकी आवाज नीति निर्माताओं तक पहुंच सके।
संगठन के पुनर्गठन और बूथ स्तर की मजबूती पर मंथन
आगामी चुनावी और राजनीतिक लड़ाइयों को जीतने के लिए केवल बड़े कार्यक्रम काफी नहीं होते, इसके लिए मजबूत सांगठनिक ढांचे की जरूरत होती है। आजसू की इस केंद्रीय बैठक में इसी बात को ध्यान में रखते हुए जिला समितियों के अब तक के क्रियाकलापों की गहन समीक्षा की गई।
- जिला और प्रखंड स्तर पर संगठन के पुनर्गठन पर विस्तार से चर्चा हुई।
- पंचायत स्तर तक पार्टी के नेटवर्क को सक्रिय करने की रणनीति बनाई गई।
- बूथ स्तर पर पकड़ मजबूत करने के लिए विशेष टास्क बांटे गए।
- कार्यकर्ताओं में जोश भरने के लिए स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता से उठाने का निर्देश दिया गया।
बैठक में मौजूद वरिष्ठ नेताओं ने अपने-अपने क्षेत्रों के अनुभवों को साझा किया और संगठन को मजबूत करने के लिए व्यावहारिक सुझाव दिए। यह माना गया कि जब तक बूथ स्तर पर पार्टी का सिपाही मजबूत नहीं होगा, तब तक बड़े राजनीतिक लक्ष्यों को हासिल करना कठिन होगा।
दिग्गज नेताओं की मौजूदगी ने बढ़ाई बैठक की गंभीरता
इस उच्चस्तरीय बैठक में आजसू पार्टी के कई दिग्गज नेता और प्रमुख चेहरे शामिल हुए, जिससे पार्टी के भीतर इस मंथन की गंभीरता साफ झलकती है। बैठक में मुख्य रूप से निम्नलिखित नेता उपस्थित रहे:
- सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी
- विधायक निर्मल महतो उर्फ तिवारी महतो
- पूर्व मंत्री रामचंद्र सहिस
- पूर्व विधायक डॉ. लंबोदर महतो
- केंद्रीय उपाध्यक्ष प्रवीण प्रभाकर
- केंद्रीय उपाध्यक्ष हसन अंसारी
- प्रवक्ता डॉ. देवशरण भगत
इन सभी नेताओं ने अपने अनुभवों के आधार पर पार्टी की भावी रणनीतियों को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव दिए। विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों में पार्टी की पकड़ को कैसे और गहरा किया जाए, इस पर विस्तार से विमर्श हुआ।
झारखंड की राजनीतिक फिजा में सुगबुगाहट
आजसू की इस केंद्रीय कार्यसमिति की बैठक के बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी एक बार फिर आक्रामक रुख अपनाते हुए जनता के बीच जाने की तैयारी कर रही है। खासकर 'युवा संवाद' के जरिए युवा मतदाताओं को अपने पाले में लाने की यह रणनीति आने वाले समय में कितना असर दिखाती है, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि झारखंड की राजनीति में तापमान बढ़ने लगा है।