शुक्रवार का दिन मुरादाबाद के लिए एक बेहद खास और भावनात्मक पलों से भरा रहा। शहर के कोने-कोने से गूंजते 'गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ...' के जयकारों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। अवसर था अनंत चतुर्दशी का, जिसके साथ ही दस दिनों तक चलने वाले गणेश उत्सव का समापन हो गया। महानगर में लगभग ढाई सौ से अधिक स्थानों पर स्थापित विघ्नहर्ता की मूर्तियों को नम आंखों और भारी उत्साह के साथ विदा किया गया।
ढोल-नगाड़ों और गुलाल की बौछार के बीच निकली भव्य शोभायात्राएं
विसर्जन यात्राओं की शुरुआत से पहले विभिन्न पंडालों और कॉलोनियों में विशेष हवन-पूजन का आयोजन किया गया। इसके बाद जब भव्य शोभायात्राएं सड़कों पर उतरीं, तो हर तरफ उत्सव का माहौल देखने लायक था। बैंड-बाजों की धुनों और ढोल-नगाड़ों की थाप पर श्रद्धालु झूमते नजर आए। हवा में उड़ता हुआ अबीर-गुलाल और पीले परिधानों में सजे महिलाएं, पुरुष व बच्चे इस पूरी यात्रा का सबसे बड़ा आकर्षण रहे।
कटघर, रामगंगा विहार, दीनदयाल नगर, हिमगिरी कॉलोनी, चंद्रनगर, लाइनपार, कोठीवाल नगर, गांधीनगर, लाजपत नगर, डबल फाटक, जयंतीपुर, बुद्धि विहार, हरथला और आशियाना समेत तमाम प्रमुख मोहल्लों और कॉलोनियों में निकाली गई इन शोभायात्राओं का मार्ग में जगह-जगह भव्य स्वागत किया गया। स्थानीय लोगों ने पुष्प वर्षा कर बप्पा का अभिनंदन किया और आरती उतारी। कई जगहों पर भक्तों के लिए विशेष भंडारों का भी आयोजन किया गया था, जहां प्रसाद ग्रहण करने के लिए भारी भीड़ जुटी.
पवित्र नदियों और घाटों की ओर बढ़ा आस्था का सैलाबप्रतिमाओं के विसर्जन के लिए श्रद्धालुओं ने अपने-अपने वाहनों को बेहद खूबसूरती से सजाया था। इन सजे हुए वाहनों पर सवार गणेश जी की मूर्तियों के साथ भक्त नाचते-गाते हुए आगे बढ़ रहे थे। मुरादाबाद से श्रद्धालुओं के जत्थे स्थानीय रामगंगा नदी के अलावा बृजघाट (गढ़मुक्तेश्वर) और पवित्र नगरी हरिद्वार (उत्तराखंड) तक पहुंचे। जल स्रोतों के पास पहुंचते ही 'बप्पा मोरया' के जयकारे और तेज हो गए।
श्रद्धालुओं की आंखें हुईं नम, की सुख-समृद्धि की कामना
जब बप्पा की प्रतिमा को जल में विसर्जित करने का समय आया, तो कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। दस दिनों तक घर और पंडालों में मेहमान की तरह रहने वाले गणेश जी को विदा करना किसी अपने को अलविदा कहने जैसा था। हालांकि, इस विदाई के साथ ही अगले वर्ष फिर से आने का जो संकल्प था, उसने सभी के चेहरों पर एक संतुष्टि भरा भाव भी ला दिया।
- प्रमुख आकर्षण: पीले वस्त्रों में सजे बच्चे और महिलाएं जो पूरे रास्ते भजन-कीर्तन करते रहे।
- सुरक्षा और व्यवस्था: जिला प्रशासन और स्थानीय समितियों के सहयोग से विसर्जन यात्राएं शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुईं।
- मुख्य विसर्जन स्थल: रामगंगा नदी, बृजघाट और हरिद्वार के घाट।
विसर्जन के इन अंतिम पलों में लोगों ने देश और समाज में सुख, शांति तथा समृद्धि की कामना की। हर किसी की जुबान पर बस एक ही प्रार्थना थी कि विघ्नहर्ता सबके जीवन के सभी संकटों को हर लें और अगले साल फिर से जल्दी आएं। इसी भावना के साथ मुरादाबाद में गणेश उत्सव 2026 का यह महापर्व संपन्न हुआ।