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मुंबई में इतिहास रचने की तैयारी! संजय गांधी नेशनल पार्क के नीचे शुरू हुई सुरंग की खुदाई

मुंबई में इतिहास रचने की तैयारी! संजय गांधी नेशनल पार्क के नीचे शुरू हुई सुरंग की खुदाई

क्या आपने कभी सोचा है कि मुंबई के ट्रैफिक जाम में जो डेढ़-दो घंटे बर्बाद होते हैं, वे अगर सिर्फ 20 मिनट में बदल जाएं तो कैसा रहेगा? जी हां, आर्थिक राजधानी मुंबई के लोगों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। शहर के पूर्वी और पश्चिमी उपनगरों को सीधे जोड़ने वाली महत्वाकांक्षी गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड (GMLR) परियोजना के तहत एक ऐतिहासिक काम की शुरुआत हो चुकी है। अब संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान (SGNP) के नीचे विशालकाय सुरंग की खुदाई का काम आधिकारिक तौर पर शुरू कर दिया गया है, जो मुंबई की तस्वीर और तकदीर दोनों बदलकर रख देगा।

अत्याधुनिक 'तुलसी' टीबीएम मशीन ने संभाला मोर्चा

इस मेगा प्रोजेक्ट के तहत गोरेगांव (पूर्व) स्थित दादासाहेब फाल्के चित्रनगरी (फिल्म सिटी) से लेकर मुलुंड (पश्चिम) के अमर नगर के बीच अत्याधुनिक टनल बोरिंग मशीन (TBM) तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। यहाँ 5.30 किलोमीटर लंबी दोहरी सुरंगों का निर्माण किया जाना है।

सुरंग खोदने के लिए लाई गई इस पहली विशालकाय और अत्याधुनिक मशीन का नाम बेहद खूबसूरत रखा गया है—'तुलसी'। इस मशीन ने सोमवार को अपना काम पूरी क्षमता के साथ शुरू कर दिया है। बीएमसी (BMC) अधिकारियों के अनुसार, इस पूरी परियोजना की कुल लंबाई 12.20 किलोमीटर है, जिसे कुल चार चरणों में पूरा किया जा रहा है। फिलहाल, चरण 3 (बी) के तहत संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के ठीक नीचे तीन-तीन लेन वाली दो समानांतर सुरंगें बनाई जा रही हैं।

पर्यावरण और जैव विविधता का रखा जा रहा है विशेष ध्यान

संजय गांधी नेशनल पार्क जैसे संवेदनशील और घने जंगल के नीचे टनलिंग करना अपने आप में एक बड़ा चैलेंज है। लेकिन प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निर्माण कार्य के दौरान पर्यावरण, वन्यजीवों और जैव विविधता को कम से कम नुकसान पहुंचे, इसके लिए बेहद कड़े कदम उठाए गए हैं।

  • परियोजना के लिए सभी जरूरी पर्यावरणीय मंजूरी और वृक्ष कटाई की वैधानिक अनुमति पहले ही ली जा चुकी है।
  • इस प्रोजेक्ट में कुल 17 क्रॉस पैसेज, 720 मीटर लंबी ट्विन बॉक्स सुरंगें और गोरेगांव-मुलुंड में 600 मीटर लंबे एप्रोच रोड शामिल हैं।
  • सुरंग के भीतर सुरक्षा और सुविधा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, जैसे आधुनिक यांत्रिक वेंटिलेशन सिस्टम, मिस्ट आधारित अग्निशमन प्रणाली (Fire Fighting System), सीसीटीवी निगरानी, स्काडा (SCADA) नियंत्रण प्रणाली और स्मार्ट एलईडी लाइटिंग।
  • इतना ही नहीं, भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक सुरंग के अंदर 1,800 मिलीमीटर व्यास की पानी की पाइपलाइन बिछाने की भी विशेष व्यवस्था की गई है।

90 मिनट का सफर अब सिमटकर रह जाएगा 20 मिनट

वर्तमान स्थिति की बात करें तो गोरेगांव से मुलुंड या पूर्वी-पश्चिमी उपनगरों के बीच आने-जाने में पीक आवर्स के दौरान 90 मिनट (डेढ़ घंटा) तक का समय लग जाता है। लेकिन इस सुरंग के बन जाने के बाद यह दूरी महज़ 20 मिनट में पूरी हो जाएगी।

"यह परियोजना मुंबई के बुनियादी ढांचे में एक मील का पत्थर साबित होगी। इससे न केवल दोनों छोर के बीच की दूरी कम होगी, बल्कि महानगर में बढ़ते ट्रैफिक का दबाव घटेगा, ईंधन की भारी बचत होगी और एम्बुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाएं भी बिना किसी देरी के समय पर पहुंच सकेंगी।" — वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी

पुनर्वास और आगे की क्या है प्लानिंग?

इस विशाल परियोजना के रास्ते में आने वाले लगभग 906 प्रभावित परिवारों का पुनर्वास कांजूरमार्ग में छह नई इमारतों में किया जा रहा है। बीएमसी के आंकड़ों के मुताबिक, इस पूरी परियोजना का लगभग 21 प्रतिशत भौतिक काम (Physical Work) पहले ही पूरा किया जा चुका है।

प्रोजेक्ट की मुख्य समय-सीमा (Timeline):

  • तुलसी टीबीएम (TBM): पहली मशीन की असेंबली और साइट परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा होने के बाद इसने खुदाई शुरू कर दी है।
  • दूसरी टीबीएम: दूसरी अत्याधुनिक मशीन की असेंबली का काम तेजी से जारी है, जिससे अक्टूबर 2026 तक खुदाई का काम शुरू करने का लक्ष्य है।
  • अंतिम लक्ष्य: इस पूरे मेगा प्रोजेक्ट को फरवरी 2029 तक पूरी तरह से जनता को समर्पित करने का डेडलाइन तय किया गया है।

मुंबईकरों के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है। जैसे-जैसे यह सुरंग जमीन के अंदर आगे बढ़ेगी, वैसे-वैसे मुंबई के ट्रैफिक के दिन सुधरते नजर आएंगे। अब बस इंतजार है साल 2029 का, जब मुंबईवासी इस अंडरग्राउंड एक्सप्रेसवे पर फर्राटा भर सकेंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1: गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड (GMLR) सुरंग की कुल लंबाई कितनी है?

Ans: संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के नीचे बनाई जा रही दोहरी सुरंगों की लंबाई लगभग 5.30 किलोमीटर है, जबकि पूरी GMLR परियोजना की कुल लंबाई 12.20 किलोमीटर है।

Q2: इस सुरंग के बन जाने से यात्रा के समय में कितनी कमी आएगी?

Ans: पूर्व और पश्चिम उपनगरों के बीच की दूरी तय करने में जो समय अभी लगभग 90 मिनट (डेढ़ घंटा) लगता है, वह घटकर मात्र 20 मिनट रह जाएगा।

Q3: इस पूरी परियोजना को कब तक पूरा करने का लक्ष्य है?

Ans: बीएमसी (BMC) और संबंधित प्राधिकरणों द्वारा इस महत्वाकांक्षी परियोजना को फरवरी 2029 तक पूरी तरह से पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

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रिपोर्टर: Alka Singh

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