Breaking
► वाराणसी से डिजिटल पिंडदान: मॉरिशस और यूरोप के नागरिकों ने ऑनलाइन किया त्रिपिंडी श्राद्ध ► मालेगांव के सरकारी अस्पताल में गहराया ऑक्सीजन संकट, थमी सांसें ► चार दिनों से बिजली गुल: गुस्से में फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, सीताद्वार उपकेंद्र पर दिया धरना ► ग्वालियर जू घूमने गया था पति, पत्नी को मिला मौका; CCTV फुटेज देख पैरों तले खिसक गई जमीन ► चंदौली के नमो घाट पर गूंजेगा आसमान का गर्जन, भव्य एयर शो को लेकर प्रशासन सख्त ► बारिश में भीगते हुए मंडी पहुंचे विधायक, किसान की धान से भरी ट्रॉली छुड़ाई ► वाराणसी में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस का सड़क पर उग्र प्रदर्शन ► एंटीलिया केस: सचिन वझे की जमानत याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट में आज फिर होगी अहम सुनवाई ► रीवा जच्चा-बच्चा मौत मामला: डॉक्टर गुंजन गोस्वामी निलंबित, जांच का दायरा तेज ► टीबी के खिलाफ जंग में युवाओं की भागीदारी बढ़ाएगा प्रशासन, निक्षय मित्र बनने की अपील ► वाराणसी से डिजिटल पिंडदान: मॉरिशस और यूरोप के नागरिकों ने ऑनलाइन किया त्रिपिंडी श्राद्ध ► मालेगांव के सरकारी अस्पताल में गहराया ऑक्सीजन संकट, थमी सांसें ► चार दिनों से बिजली गुल: गुस्से में फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, सीताद्वार उपकेंद्र पर दिया धरना ► ग्वालियर जू घूमने गया था पति, पत्नी को मिला मौका; CCTV फुटेज देख पैरों तले खिसक गई जमीन ► चंदौली के नमो घाट पर गूंजेगा आसमान का गर्जन, भव्य एयर शो को लेकर प्रशासन सख्त ► बारिश में भीगते हुए मंडी पहुंचे विधायक, किसान की धान से भरी ट्रॉली छुड़ाई ► वाराणसी में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस का सड़क पर उग्र प्रदर्शन ► एंटीलिया केस: सचिन वझे की जमानत याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट में आज फिर होगी अहम सुनवाई ► रीवा जच्चा-बच्चा मौत मामला: डॉक्टर गुंजन गोस्वामी निलंबित, जांच का दायरा तेज ► टीबी के खिलाफ जंग में युवाओं की भागीदारी बढ़ाएगा प्रशासन, निक्षय मित्र बनने की अपील

अंतरिक्ष में बड़ा खुलासा: पृथ्वी से 63 प्रकाश-वर्ष दूर मिले रहस्यमयी रेडियो सिग्नल

अंतरिक्ष में बड़ा खुलासा: पृथ्वी से 63 प्रकाश-वर्ष दूर मिले रहस्यमयी रेडियो सिग्नल

मानव सभ्यता सदियों से इस एक बड़े सवाल से जूझती रही है कि क्या इस असीम ब्रह्मांड में हम अकेले हैं? अंतरिक्ष के अनंत विस्तार में न जाने कितने तारे, आकाशगंगाएं और ग्रह छिपे हैं, जिनका अब तक कोई छोर नहीं मिल पाया है। वैज्ञानिक लगातार इस खोज में जुटे हैं कि क्या पृथ्वी के अलावा भी किसी अन्य दुनिया में जीवन की कोई संभावना मौजूद है। इसी कड़ी में खगोलविदों के हाथ एक ऐसी सफलता लगी है, जिसने पूरी वैज्ञानिक दुनिया को रोमांचित कर दिया है। हमारी पृथ्वी से लगभग 63 प्रकाश-वर्ष की दूरी पर स्थित एक विशालकाय एक्सोप्लैनेट से कुछ ऐसे रहस्यमयी रेडियो सिग्नल प्राप्त हुए हैं, जिन्होंने अंतरिक्ष अनुसंधान के नए द्वार खोल दिए हैं।

क्या सोलर सिस्टम के बाहर सच में मिल गया है जीवन?

हाल ही में शोधकर्ताओं के एक दल ने जब अंतरिक्ष के डेटा का बारीकी से अध्ययन किया, तो वे तब हैरान रह गए जब उन्हें हमारे सौर मंडल से बाहर एक ग्रह से आती हुई अजीबोगरीब रेडियो तरंगों का पता चला। यह पहली बार था जब वैज्ञानिकों ने किसी ऐसे रेडियो सिग्नल का स्रोत सीधे तौर पर किसी बाहरी ग्रह से जुड़ा हुआ पाया। हालांकि, आम जनता और अंतरिक्ष प्रेमियों के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या यह किसी एलियन सभ्यता का संदेश है? इस पर वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल इन रेडियो संकेतों को सीधे तौर पर एलियन लाइफ या परग्रही जीवन का प्रमाण नहीं माना जा सकता है।

प्रारंभिक और गहन अनुसंधान से जो बातें सामने आई हैं, उनके अनुसार ये सिग्नल ग्रह के चारों ओर उत्पन्न होने वाली विशालकाय 'ऑरोरा' (ध्रुवीय रोशनी) जैसी प्राकृतिक प्रक्रियाओं का परिणाम हो सकते हैं। जिस ग्रह से ये रेडियो तरंगें निकल रही हैं, उसका नाम बीटा पिक्टोरिस बी (Beta Pictoris b) है। यह अपनी तरह का एक बेहद दिलचस्प और युवा आकाशीय पिंड है, जो 'बीटा पिक्टोरिस' नामक एक युवा तारे की परिक्रमा कर रहा है। इस खगोलीय पिंड को पहली बार साल 2008 में खोजा गया था और तब से लेकर अब तक यह वैज्ञानिकों के लिए अध्ययन का एक बड़ा केंद्र बना हुआ है।

विशालकाय ग्रह 'बीटा पिक्टोरिस बी' का आकार और विशेषताएं

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) और अन्य खगोल भौतिकी संस्थानों के अनुमानों के मुताबिक, बीटा पिक्टोरिस बी कोई छोटा-मोटा ग्रह नहीं है, बल्कि यह हमारे सौर मंडल के सबसे बड़े ग्रह बृहस्पति (Jupiter) से भी कई गुना अधिक भारी है। इसका कुल द्रव्यमान (Mass) बृहस्पति से लगभग 11.7 गुना अधिक आंका गया है। इसके आकार और स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह अपने केंद्रीय तारे से लगभग 1.496 अरब किलोमीटर की विशाल दूरी पर स्थित है।

इतनी भारी-भरकम दूरी के कारण इस ग्रह को अपने तारे का एक चक्कर पूरा करने में एक लंबा समय लगता है। बीटा पिक्टोरिस बी को अपनी कक्षा (Orbit) का एक चक्कर पूरा करने में करीब 23.6 पृथ्वी वर्ष का समय लगता है। यानी इस ग्रह पर एक साल हमारे लगभग 24 सालों के बराबर होता है।

वैज्ञानिकों के सामने थी एक बड़ी पहेली

इस खगोलीय सिस्टम से रेडियो गतिविधियों के संकेत वैज्ञानिकों को पहले भी मिल चुके थे, लेकिन लंबे समय तक यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा था कि ये रहस्यमयी तरंगें वास्तव में केंद्रीय तारे से आ रही हैं या उसके चक्कर लगा रहे किसी ग्रह से उत्पन्न हो रही हैं। इस गुत्थी को सुलझाने के लिए दुनिया भर के कई प्रतिष्ठित संस्थानों के शोधकर्ता एकजुट हुए।

हार्वर्ड एंड स्मिथसोनियन सेंटर फॉर एस्ट्रोफिजिक्स और यूनिवर्सिटी ऑफ ओरेगन के शोधकर्ताओं ने इस रहस्य से पर्दा उठाने के लिए दक्षिण अफ्रीका में स्थित अत्यधिक उन्नत MeerKAT रेडियो टेलीस्कोप एरे का सहारा लिया। इस शक्तिशाली टेलीस्कोप की मदद से मिले आंकड़ों ने वैज्ञानिकों को इस बात की पुष्टि करने में मदद की कि इन रेडियो तरंगों का संबंध सीधे तौर पर बीटा पिक्टोरिस बी ग्रह से ही है।

ऑरोरा और रेडियो तरंगों का कनेक्शन

विज्ञान की भाषा में समझें तो जैसे हमारी पृथ्वी पर उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों पर 'ऑरोरा बोरेलिस' और 'ऑरोरा ऑस्ट्रलिस' जैसी खूबसूरत ध्रुवीय रोशनी दिखाई देती है, जो सूर्य से आने वाले आवेशित कणों (Charged Particles) के कारण पैदा होती है, ठीक कुछ वैसी ही या उससे भी कई गुना शक्तिशाली प्रक्रियाएं इन विशालकाय बाहरी ग्रहों के चुंबकत्व (Magnetism) के कारण होती हैं।

जब ग्रह का शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र अंतरिक्ष से आने वाले कणों के साथ क्रिया करता है, तो भारी मात्रा में ऊर्जा और रेडियो तरंगें उत्सर्जित होती हैं। बीटा पिक्टोरिस बी से आ रहे इन सिग्नल्स ने वैज्ञानिकों को यह समझने का एक अनूठा अवसर दिया है कि हमारे सौर मंडल से बाहर मौजूद विशाल ग्रहों (Gas Giants) का चुंबकीय क्षेत्र अंदर से कैसे काम करता है।

भविष्य की अंतरिक्ष खोजों के लिए एक मील का पत्थर

साल 2026 में तकनीकी मोर्चे पर हो रही ये खोजें इस बात का प्रमाण हैं कि हमारी अंतरिक्ष विज्ञान की क्षमताएं कितनी उन्नत हो चुकी हैं। हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि इन सिग्नल्स के पीछे किसी एलियन सभ्यता का हाथ है, लेकिन यह खोज ब्रह्मांड के रहस्यों को परत-दर-परत उघाड़ने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम जरूर है।

जैसे-जैसे जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) और अन्य आधुनिक रेडियो टेलीस्कोप अपनी क्षमता का विस्तार कर रहे हैं, आने वाले दिनों में अंतरिक्ष के ऐसे कई अनसुने और अनसुलझे पहलू हमारे सामने आ सकते हैं। क्या ब्रह्मांड के किसी दूसरे कोने में जीवन का अस्तित्व है? इस सवाल का जवाब पाने की यह यात्रा अभी लंबी है, लेकिन हर नई खोज हमें उस मंजिल के एक कदम और करीब ले जा रही है।

About the Author

गुंजा पांडेय

गुंजा पांडेय

Chief Sub Editor

गुंजा पांडेय तेज़ी से बदलती खबरों की दुनिया में अपनी पकड़ के लिए जानी जाती हैं। वे खेल और विज्ञान जैसे विषयों को न सिर्फ अपडेटेड रखती हैं, बल्कि उन...

Read More

ज़रूर पढ़ें (You May Also Like)

अगली खबर पढ़ें:

आगे पढ़ें →