विकास के दावों और हकीकत के बीच का फर्क जब किसी की जान ले ले, तो सवाल उठना लाजिमी है। महाराष्ट्र के सांस्कृतिक और धार्मिक केंद्र माने जाने वाले नासिक शहर से एक ऐसा ही दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां सड़क की बदहाली और प्रशासनिक सुस्ती ने एक हंसते-खेते परिवार को कभी न भरने वाला जख्म दे दिया है। शहर के व्यस्त माने जाने वाले कैनडा कॉर्नर इलाके में एक जाने-माने कारोबारी की सड़क पार करते समय तेज रफ्तार बाइक की टक्कर से मौत हो गई। इस घटना के बाद से स्थानीय नागरिकों में भारी गुस्सा है और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सड़क की बदहाली और पार्किंग की समस्या बनी जी का जंजाल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतक की पहचान 65 वर्षीय प्रसिद्ध टेलीकॉम व्यवसायी हेमंत चंद्रनारायण राठी के रूप में हुई है। हेमंत राठी का कैनडा कॉर्नर स्थित वसंत मार्केट में अपना कारोबार था। स्थानीय लोगों और चश्मदीदों के मुताबिक, दुकान के ठीक सामने महानगरपालिका (मनपा) द्वारा विकास कार्यों के नाम पर लंबे समय से खुदाई की गई थी, जिसके चलते सड़क पूरी तरह से उखड़ी हुई थी और वहां चलना दूभर हो गया था।
सड़क पर फैली अव्यवस्था और पार्किंग के लिए कोई उचित जगह न होने के कारण हेमंत राठी ने अपनी गाड़ी पास ही की पाटिल लेन में पार्क की थी। वह अपनी गाड़ी को देखने या लाने के लिए जब सड़क पार कर रहे थे, तभी यह भीषण हादसा हो गया। उखड़ी हुई सड़क और गड्ढों के कारण वे संभल नहीं पाए और एक तेज रफ्तार बाइक ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया।
ब्रेनडेड होने के बाद अस्पताल में तोड़ा दम
हादसा इतना भयानक था कि हेमंत राठी के सिर में गंभीर आंतरिक चोटें आईं। टक्कर के तुरंत बाद मौके पर मौजूद लोगों ने तत्परता दिखाते हुए बाइक सवार को वहीं दबोच लिया। गनीमत यह रही कि घटनास्थल के पास ही ट्रैफिक पुलिसकर्मी भी मौजूद था, जिसने बिना देर किए घायल राठी को नजदीकी अस्पताल पहुंचाया।
चिकित्सकों ने उनकी जान बचाने के लिए तुरंत ब्रेन सर्जरी समेत कई आपातकालीन उपाय किए, लेकिन सिर पर लगी गहरी चोट के कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका। इलाज के दौरान ही उन्हें डॉक्टरों ने 'ब्रेनडेड' घोषित कर दिया। कुछ दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करने के बाद आखिरकार उन्होंने दम तोड़ दिया। शनिवार को पंचवटी अमरधाम में उनका अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें शहर के तमाम गणमान्य लोग और व्यापारी मौजूद रहे।
अंगदान का नेक इरादा चिकित्सीय कारणों से रहा अधूरा
इस पूरे घटनाक्रम के बीच राठी परिवार ने एक मिसाल पेश की, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। इस अथाह दुख और शोक के माहौल में भी परिवार ने संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हेमंत राठी के अंगों को दान करने का फैसला किया। इस नेक काम के लिए उनके विदेशी रिश्तेदार भी तुरंत नासिक पहुंचे थे।
हालांकि, तमाम कोशिशों और परिवार की सहमति के बावजूद कुछ चिकित्सीय (मेडिकल) कारणों की वजह से अंगदान की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी और यह महान कार्य अधूरा रह गया। इसके बावजूद, संकट की इस घड़ी में परिवार द्वारा लिया गया यह निर्णय समाज के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन गया है।
नाबालिगों के हाथों में बेकाबू रफ्तार और ट्रैफिक पुलिस की चुप्पी
इस हादसे ने नासिक की यातायात व्यवस्था और सुरक्षा के दावों की पोल खोलकर रख दी है। स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों का कहना है कि यह केवल एक दुर्घटना नहीं है, बल्कि सिस्टम की नाकामी का परिणाम है। शहरभर में सड़कों को खोदकर महीनों के लिए छोड़ दिया जाता है। न तो वहां सुरक्षा के लिए कोई बैरिकेड्स लगाए जाते हैं और न ही रात या दिन में ड्राइवरों को सतर्क करने के लिए रेडियम के चेतावनी संकेत होते हैं।
इसके अलावा, शहर की सड़कों पर नाबालिग बच्चों द्वारा बेपरवाही से तेज रफ्तार में गाड़ियां चलाने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। हैरानी की बात यह है कि यातायात विभाग और पुलिस आंखें मूंदकर बैठी हुई है। जनता अब खुलकर सवाल पूछ रही है कि आखिर ऐसी लापरवाहियों पर लगाम कब लगेगी और जिम्मेदार अधिकारियों व नाबालिगों के अभिभावकों पर सख्त कानूनी कार्रवाई कब की जाएगी?
जिम्मेदारियों से कब तक भागेगा प्रशासन?
हेमंत राठी की असामयिक मृत्यु ने नासिक के व्यापारिक जगत को झकझोर कर रख दिया है। लोग सोशल मीडिया और स्थानीय बैठकों के जरिए अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। उनका साफ कहना है कि अगर समय रहते सड़कों की मरम्मत पूरी कर ली जाती और ट्रैफिक नियमों का सख्ती से पालन कराया जाता, तो शायद आज एक कीमती जान बच सकती थी। अब देखना यह होगा कि क्या इस दर्दनाक हादसे के बाद प्रशासन गहरी नींद से जागेगा या फिर शहर की बदहाल सड़कें यूं ही किसी और की जान लेती रहेंगी।