बिहार की राजधानी पटना समेत राज्य के कई हिस्सों में कुदरत का कहर एक बार फिर देखने को मिल रहा है। लगातार बढ़ रहे जलस्तर ने साल 2016 की डरावनी यादों को ताजा कर दिया है। गंगा नदी ने पटना में अपने पिछले सभी रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए नया उच्च स्तर दर्ज किया है, जिससे प्रशासन और आम जनता दोनों की चिंताएं सातवें आसमान पर पहुंच गई हैं। राज्य के कुल 11 जिलों में बाढ़ का गंभीर खतरा मंडरा रहा है, और निचले इलाकों में रहने वाले लोग सुरक्षित स्थानों की तलाश में अपने आशियाने छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं।
साल 2016 का रिकॉर्ड ध्वस्त, उफान पर गंगा
केंद्रीय जल आयोग और आपदा प्रबंधन विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, पटना के विभिन्न घाटों पर गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार करते हुए लगातार ऊपर की ओर बह रहा है। पिछले कुछ दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश और नेपाल तथा उत्तर भारत के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों से छोड़े गए पानी के कारण नदियों का वेग अचानक तेज हो गया है। जानकारों का मानना है कि वर्ष 2016 में बाढ़ के दौरान जो पानी का स्तर दर्ज किया गया था, इस बार गंगा ने उससे भी आगे निकलकर नया मुकाम छू लिया है, जो कि बेहद चिंताजनक स्थिति है।
गांधी घाट और हाथीदह जैसे महत्वपूर्ण जल मापन केंद्रों पर गंगा की रफ्तार और उसका दबाव लगातार बढ़ रहा है। जल स्तर में हो रही इस बेतहाशा वृद्धि के कारण पटना के दियारा इलाके पूरी तरह से जलमग्न हो चुके हैं। मुख्य शहर और गंगा के बीच संपर्क लगभग टूट चुका है और कई जगहों पर आवागमन के लिए केवल नावों का ही सहारा बचा है।
बिहार के 11 जिलों पर बाढ़ की सबसे बड़ी मार
गंगा और उसकी सहायक नदियों के उफान पर होने की वजह से बिहार के करीब 11 जिलों में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। इन जिलों में केवल पटना ही नहीं, बल्कि बक्सर, भोजपुर, वैशाली, लखीसराय, बेगूसराय, मुंगेर, खगड़िया, भागलपुर, कटिहार और सारण जैसे संवेदनशील इलाके भी शामिल हैं। इन सभी जिलों के जिला प्रशासन को युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य चलाने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
- निचले इलाके खाली कराए गए: प्रशासन द्वारा नदी किनारे बसे गांवों और शहरी बस्तियों को खाली कराने का अभियान चलाया जा रहा है।
- फसलों को भारी नुकसान: हज़ारों एकड़ में खड़ी धान और सब्ज़ियों की फसलें पानी में डूब जाने से किसानों को भारी आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ रहा है।
- सड़क संपर्क बाधित: कई ग्रामीण सड़कों पर पानी भर जाने के कारण जिला मुख्यालयों से संपर्क कट गया है।
प्रशासन की तैयारियां और राहत शिविरों का गठन
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बिहार सरकार और जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नज़र आ रहा है। मुख्य सचिव और आपदा प्रबंधन मंत्री खुद हालात पर लगातार नज़र बनाए हुए हैं। प्रभावित जिलों में एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों को तैनात कर दिया गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा सके।
सुरक्षित स्थानों पर ऊंचे टीलों या बांधों पर राहत शिविर स्थापित किए गए हैं। इन शिविरों में शरण लेने वाले विस्थापित परिवारों के लिए खाने-पीने, शुद्ध पेयजल और चिकित्सा सुविधाओं का इंतजाम किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग को भी अलर्ट पर रखा गया है ताकि जलजनित बीमारियों (Water-borne diseases) के फैलने से समय रहते रोका जा सके।
आम जनता से अपील और एहतियाती कदम
प्रशासन ने नदी के तटबंधों के आसपास रहने वाले लोगों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की लापरवाही न बरतें और पानी बढ़ने पर तुरंत सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं। पालतू मवेशियों को भी ऊंचे स्थानों पर ले जाने के निर्देश दिए गए हैं। जलस्तर में अभी और उतार-चढ़ाव की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में कुछ और इलाकों में बारिश की आशंका व्यक्त की है।
यह आपदा एक बार फिर हमारे बुनियादी ढांचे और बाढ़ नियंत्रण प्रणालियों की मजबूती पर बड़े सवाल खड़े करती है। हालांकि, मौजूदा समय की सबसे बड़ी प्राथमिकता लोगों की जान बचाना और उन्हें सुरक्षित रखना है। जैसे-जैसे आने वाले घंटों में पानी का बहाव आगे बढ़ेगा, प्रशासन की चौकसी और अधिक कड़ी कर दी जाएगी।