देश के सबसे प्रतिष्ठित और अग्रणी शिक्षण संस्थानों में शुमार श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) ने अपने गौरवशाली सफर के सौ वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस ऐतिहासिक अवसर पर आयोजित शताब्दी समारोह में देश के प्रधानमंत्री ने शिरकत की और अपने प्रेरणादायक संबोधन से युवाओं, शिक्षाविदों और उद्योग जगत के दिग्गजों को एक नई दिशा दिखाई। यह कार्यक्रम न केवल संस्थान के अतीत की उपलब्धियों को याद करने का मंच बना, बल्कि आने वाले दशकों के लिए भारत के आर्थिक और शैक्षणिक विजन को रेखांकित करने का भी एक अहम जरिया साबित हुआ।
शिक्षा का मंदिर और राष्ट्र निर्माण की नींव
किसी भी शिक्षण संस्थान का शताब्दी वर्ष मनाना केवल समय का फेर नहीं होता, बल्कि यह इस बात का प्रमाण होता है कि उस संस्था ने पीढ़ियों के वैचारिक निर्माण में कितनी गहरी भूमिका निभाई है। दिल्ली विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाला SRCC हमेशा से देश को बेहतरीन अर्थशास्त्री, उद्यमी, राजनेता और कॉरपोरेट लीडर देने के लिए जाना जाता है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में इसी ऐतिहासिक विरासत को याद करते हुए संस्थान के संस्थापकों और उन सभी शिक्षकों व छात्रों के योगदान को सराहा, जिन्होंने पिछले सौ वर्षों में इसकी प्रतिष्ठा को वैश्विक पटल पर स्थापित किया।
उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि जब कोई संस्थान सौ साल का सफर तय करता है, तो उसके साथ देश की कई पीढ़ियों के सपने जुड़े होते हैं। SRCC के प्रांगण से निकले छात्रों ने न केवल देश के भीतर बल्कि पूरी दुनिया में अपनी बौद्धिक क्षमता का लोहा मनवाया है। आज के इस दौर में जब भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर और भी ऊंचे लक्ष्यों को साध रहा है, ऐसे संस्थानों की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है।
युवाओं के कंधों पर विकसित भारत का दारोमदार
समारोह के दौरान प्रधानमंत्री के भाषण का मुख्य केंद्र बिंदु देश का युवा वर्ग और उनकी ऊर्जा रही। उन्होंने कहा कि आज का भारत महत्वाकांक्षाओं से भरा हुआ है और देश का युवा जोखिम उठाने से नहीं डरता। स्टार्टअप कल्चर, इनोवेशन और डिजिटल क्रांति के इस युग में भारत दुनिया का सबसे जीवंत इकोसिस्टम बन चुका है।
- नवाचार और जोखिम लेने की क्षमता: युवाओं को लीक से हटकर सोचने और नए प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया गया।
- वैश्विक दृष्टिकोण: केवल स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि ग्लोबल चुनौतियों का लोकल समाधान खोजने की सोच पर बल दिया गया।
- आर्थिक नेतृत्व: कॉमर्स और अर्थशास्त्र के छात्रों से अपेक्षा की गई कि वे देश की वित्तीय नीतियों और बाजार को नई ऊंचाइयों पर ले जाएं।
उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि आने वाले 25 वर्ष, जिन्हें 'अमृत काल' कहा गया है, देश के इतिहास के सबसे निर्णायक वर्ष हैं। इस दौरान भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प हर युवा के दिल में होना चाहिए। जब नीतियां सही हों और नीयत साफ हो, तो बड़े से बड़ा लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है, और इसमें देश के कॉमर्स और मैनेजमेंट प्रोफेशनल्स की भूमिका सबसे आगे रहने वाली है।
बदलते वैश्विक परिदृश्य और अर्थशास्त्र की नई परिभाषा
आज की वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चितताओं के दौर से गुजर रही है। भू-राजनीतिक तनाव, सप्लाई चेन में रुकावटें और क्लाइमेट चेंज जैसी बड़ी चुनौतियां पूरी दुनिया के सामने मुंह बाए खड़ी हैं। ऐसे में अर्थशास्त्र और बिजनेस मैनेजमेंट की पारंपरिक किताबों से आगे निकलकर व्यावहारिक समाधान तलाशने की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में इस बात को रेखांकित किया कि भारत का विकास मॉडल केवल जीडीपी के आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समावेशी विकास (Inclusive Growth) और अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के सशक्तिकरण पर आधारित है।
उन्होंने छात्रों को समझाया कि उन्हें केवल बैलेंस शीट और मुनाफे तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि देश के सामाजिक सरोकारों को भी अपनी व्यावसायिक प्राथमिकताओं में शामिल करना चाहिए। समावेशी विकास का यह मॉडल ही भारत को आत्मनिर्भर बनाने की कुंजी है।
भविष्य की रूपरेखा: एक आत्मनिर्भर और सशक्त भारत
समारोह के समापन की ओर बढ़ते हुए प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि SRCC जैसे संस्थान आने वाले समय में भी देश को वैचारिक और नेतृत्व के स्तर पर ऊर्जा देते रहेंगे। यहां से निकलने वाला हर छात्र जब कॉरपोरेट जगत या उद्यमिता की दुनिया में कदम रखेगा, तो वह देश के हितों को सर्वोपरि रखेगा।
यह शताब्दी समारोह केवल एक उत्सव नहीं था, बल्कि यह एक संकल्प था कि आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था का नेतृत्व करेगा और इस महायज्ञ में देश के युवा सबसे बड़ी आहुति देंगे। शिक्षा, संस्कार और समर्पण का यह संगम आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करता रहेगा।