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पटना में रिटायर्ड इंजीनियर 3 दिन रहे डिजिटल अरेस्ट, ठगों ने उड़ाए 33 लाख

पटना में रिटायर्ड इंजीनियर 3 दिन रहे डिजिटल अरेस्ट, ठगों ने उड़ाए 33 लाख

साइबर अपराधियों के हौसले किस कदर बुलंद हो चुके हैं, इसकी बानगी बिहार की राजधानी पटना से सामने आई है। तकनीक के इस दौर में ठगी का एक ऐसा नायाब और खौफनाक तरीका सामने आया है, जिसे सुनकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो जाएं। पटना में पथ निर्माण विभाग के एक सेवानिवृत्त (रिटायर्ड) इंजीनियर को साइबर ठगों ने पूरे तीन दिनों तक अपने वर्चुअल शिकंजे मेंकसे रखा। इस दौरान उन्हें इस बात का अहसास तक नहीं होने दिया गया कि वे किसी असली जांच एजेंसी के संपर्क में नहीं, बल्कि शातिर अपराधियों के जाल में फंस चुके हैं।

वर्चुअल दुनिया की कैद: क्या है डिजिटल अरेस्ट का पूरा मामला?

मिली जानकारी के मुताबिक, ठगों ने खुद को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई (CBI) और मुंबई क्राइम ब्रांच का वरिष्ठ अधिकारी बताया। पीड़ित रिटायर्ड इंजीनियर के पास एक अनजान वीडियो कॉल आई, जिसमें उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग और एक गंभीर आपराधिक मामले में संलिप्त होने का डर दिखाया गया। ठगों ने इतने पेशेवर तरीके से डराया कि बुजुर्ग इंजीनियर मानसिक रूप से पूरी तरह टूट गए।

अपराधियों ने उन्हें हिदायत दी कि वे अगले तीन दिनों तक अपने घर से बाहर नहीं निकलेंगे, किसी से फोन पर बात नहीं करेंगे और लगातार वीडियो कॉल पर बने रहेंगे। इस पूरी अवधि के दौरान पीड़ित अपने ही घर के एक कमरे में 'डिजिटल रूप से गिरफ्तार' यानी वर्चुअल निगरानी के तहत रहे।

मनी लॉन्ड्रिंग का खौफ दिखाकर ऐंठे 33.83 लाख रुपये

साइबर अपराधियों ने पीड़ित के मन में गिरफ्तारी और जेल जाने का ऐसा खौफ पैदा किया कि वे उनकी हर बात मानने को मजबूर हो गए। ठगों ने उनके बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की जांच के नाम पर कुल 33.83 लाख रुपये आरटीजीएस (RTGS) के जरिए अपने खातों में ट्रांसफर करवा लिए।

बुजुर्ग इंजीनियर ने डर के मारे अपनी जीवनभर की गाढ़ी कमाई उन खातों में भेज दी, जो ठगों ने बताए थे। पैसे ट्रांसफर होने के बाद जब ठगों का संपर्क अचानक टूट गया और उनका फोन बंद आने लगा, तब जाकर पीड़ित को अहसास हुआ कि उनके साथ बहुत बड़ा धोखा हुआ है।

साइबर सेल में दर्ज कराई गई प्राथमिकी

इस सनसनीखेज घटना के बाद पीड़ित परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्होंने तुरंत इसकी सूचना पटना के साइबर थाने को दी। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अज्ञात साइबर अपराधियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है और तकनीकी अनुसंधान शुरू कर दिया है।

  • कॉल डिटेल और बैंक खातों की जांच: पुलिस उन बैंक खातों का विवरण खंगाल रही है जिनमें पैसे ट्रांसफर किए गए हैं।
  • आईपी एड्रेस ट्रेसिंग: साइबर सेल की विशेष टीम अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर और आईपी एड्रेस की लोकेशन का पता लगाने में जुटी है।
  • अंतरराज्यीय गिरोह की आशंका: पुलिस का मानना है कि इस ठगी के पीछे किसी बड़े अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का हाथ हो सकता है, जो सुनियोजित तरीके से बुजुर्गों और रिटायर्ड अधिकारियों को निशाना बना रहा है।

सतर्कता ही बचाव है: डिजिटल अरेस्ट से कैसे बचें?

हाल के दिनों में देश भर में 'डिजिटल अरेस्ट' के मामलों में भारी इजाफा हुआ है। साइबर ठग आए दिन नए-नए हथकंडे अपनाकर लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। विशेषज्ञ लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि कोई भी सरकारी एजेंसी, चाहे वह CBI हो, ED हो या मुंबई क्राइम ब्रांच, कभी भी वीडियो कॉल के जरिए किसी व्यक्ति को 'डिजिटल अरेस्ट' नहीं करती है और न ही ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर करने की मांग करती है।

यदि आपके पास भी ऐसा कोई संदिग्ध फोन कॉल या वीडियो कॉल आता है, तो घबराएं बिल्कुल नहीं। तुरंत फोन काट दें और इसकी सूचना नजदीकी पुलिस स्टेशन या राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर दें। आपकी जरा सी सतर्कता आपको और आपके परिवार को इस तरह के जालसाजों से बचा सकती है।

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नसीम अहमद

नसीम अहमद

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नसीम अहमद जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं। उन...

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