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PM Cares Fund: 8,400 करोड़ से ज्यादा की दौलत, लेकिन खर्च सिर्फ 87 लाख! क्या है पूरा हिसाब?

PM Cares Fund: 8,400 करोड़ से ज्यादा की दौलत, लेकिन खर्च सिर्फ 87 लाख! क्या है पूरा हिसाब?

देश में आपदा और आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए बनाए गए 'पीएम केयर्स फंड' (PM Cares Fund) के ताजा आंकड़े एक बार پھر चर्चा के केंद्र में हैं। केंद्र सरकार की ओर से सार्वजनिक किए गए साल 2024-25 के ऑडिटेड अकाउंट्स ने एक बार फिर बहस छेड़ दी है कि आखिर भारी-भरकम राशि होने के बावजूद जरूरत के वक्त इस फंड से बहुत कम पैसे क्यों खर्च किए जा रहे हैं?

आधिकारिक वेबसाइट पर जारी आंकड़ों के मुताबिक, 31 मार्च 2025 तक इस फंड में कुल 8,452 करोड़ रुपये जमा हो चुके हैं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी पूंजी होने के बावजूद वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान इस फंड से महज 87.85 लाख रुपये ही खर्च किए गए हैं। आइए गहराई से समझते हैं कि इस फंड की ताज़ा वित्तीय स्थिति क्या कहती है और इसको लेकर एक्सपर्ट्स व विपक्ष के क्या सवाल हैं।

क्या है पीएम केयर्स फंड और क्यों हुई थी स्थापना?

साल 2020 में कोविड-19 महामारी की पहली लहर के दौरान देश में स्वास्थ्य आपातकाल की स्थिति से निपटने के उद्देश्य से 'प्राइम मिनिस्टर सिटीजन असिस्टेंस एंड रिलीफ इन इमरजेंसी सिचुएशंस फंड' यानी पीएम केयर्स फंड की स्थापना की गई थी। इसे एक सार्वजनिक सहयोग ट्रस्ट (Public Charitable Trust) के रूप में पंजीकृत किया गया है।

इस फंड का मुख्य उद्देश्य किसी भी पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी, प्राकृतिक आपदा (बाढ़, भूकंप, चक्रवात) या अन्य संकट के समय प्रभावित लोगों को राहत और सहायता पहुंचाना है। प्रधानमंत्री इस फंड के पदेन अध्यक्ष (Ex-officio Chairman) होते हैं, जबकि रक्षा मंत्री, गृह मंत्री और वित्त मंत्री इसके पदेन ट्रस्टी के रूप में शामिल होते हैं। शुरुआत में यह फंड महज 2.25 लाख रुपये से शुरू हुआ था, जो समय के साथ बढ़कर हजारों करोड़ तक पहुंच गया है।

ताजा ऑडिट रिपोर्ट: कहां से आया कितना पैसा?

हाल ही में जारी 2024-25 की ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, इस वित्तीय वर्ष के दौरान फंड को विभिन्न माध्यमों से धन प्राप्त हुआ है:

  • घरेलू डोनेशन: देश के भीतर से कुल 479.04 करोड़ रुपये का दान मिला।
  • विदेशी योगदान: विदेशों से लगभग 92 लाख रुपये की राशि दान के रूप में प्राप्त हुई।
  • ब्याज से कमाई: फंड को दान के अलावा 475.14 करोड़ रुपये सिर्फ ब्याज के रूप में मिले। इसमें से 469.37 करोड़ रुपये फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और 5.76 करोड़ रुपये बैंक खातों के ब्याज से आए।
  • एजेंसियों से वापसी: पूर्व में किसी प्रोजेक्ट के लिए दी गई राशि में से 324.65 करोड़ रुपये विभिन्न एजेंसियों द्वारा वापस लौटाए गए। हालांकि, ये एजेंसियां कौन थीं, इसका खुलासा रिपोर्ट में नहीं है।
  • अन्य स्रोत: टीडीएस रिफंड के रूप में 13.49 लाख रुपये भी फंड में जुड़े।

93 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ एफडी (FD) में सुरक्षित

लेटेस्ट ऑडिट डेटा पर नजर डालें तो पता चलता है कि पीएम केयर्स फंड की कुल राशि का लगभग 93 प्रतिशत हिस्सा यानी करीब 7,846 करोड़ रुपये फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के रूप में बैंकों में जमा है। दूसरी ओर, खर्च के आंकड़े इसके बिल्कुल उलट हैं। साल 2024-25 में इस फंड से कुल खर्च केवल 87.85 लाख रुपये रहा।

इसमें से 87.84 लाख रुपये 'पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन स्कीम' के तहत दिए गए, जबकि महज 451 रुपये बैंक और एसएमएस चार्जेज के रूप में कटे। हालांकि, बच्चों के लिए खर्च की गई इस राशि का जमीनी ब्योरा ऑडिट में स्पष्ट नहीं किया गया है।

पिछले सालों में कैसा रहा है खर्च का पैटर्न?

अगर पिछले कुछ वर्षों के खर्च के आंकड़ों की तुलना करें, तो यह ग्राफ लगातार नीचे की ओर आता दिखाई देता है:

  • साल 2020-21: 3,976.17 करोड़ रुपये
  • साल 2021-22: 3,716.29 करोड़ रुपये
  • साल 2022-23: 437.87 करोड़ रुपये
  • साल 2023-24: 15.59 करोड़ रुपये
  • साल 2024-25: 87.85 लाख रुपये

क्यों उठ रहे हैं पारदर्शिता और खर्च को लेकर सवाल?

देश के कई हिस्सों में पिछले कुछ सालों में गंभीर बाढ़, चक्रवात, भूस्खलन और अन्य प्राकृतिक आपदाएं देखने को मिली हैं। ऐसे में विश्लेषकों और विपक्षी दलों का कहना है कि जब आपदा राहत के लिए ही इस विशेष फंड का गठन किया गया था, तो जरूरत के इस दौर में राहत राशि बहुत कम क्यों जारी की जा रही है?

आईआईटी दिल्ली की प्रोफेसर रीतिका खेरा और प्रमुख आरटीआई कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज जैसे विशेषज्ञों का मानना है कि इस फंड में पारदर्शिता का अभाव एक बड़ी चिंता का विषय है। अंजलि भारद्वाज के अनुसार, चूंकि देश में सूचना का अधिकार (RTI) कानून है जिसके तहत जनता के पैसों से चलने वाले सार्वजनिक संस्थानों की जानकारी ली जा सकती है, लेकिन पीएम केयर्स फंड को आरटीआई के दायरे से बाहर रखा गया है। इसके अलावा, दान देने वाले विशिष्ट व्यकियों या संस्थाओं के नामों को भी सार्वजनिक नहीं किया गया है, जिससे नागरिकों के मन में कई तरह के संशय पैदा होते हैं।

निष्कर्ष

पीएम केयर्स फंड देश के संकटकाल में वित्तीय मदद के लिए एक बड़ा और अहम जरिया बनकर उभरा है। जनता और विशेषज्ञों की मांग है कि इस फंड के खर्च और दानकर्ताओं की सूची को लेकर अधिक से अधिक पारदर्शिता बरती जानी चाहिए, ताकि इस महत्वपूर्ण ट्रस्ट पर जनता का भरोसा और अधिक मजबूत हो सके।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1: पीएम केयर्स फंड का मुख्य उद्देश्य क्या है?

कोविड-19 जैसी महामारियों, प्राकृतिक आपदाओं या किसी भी अन्य आपातकालीन स्थिति में प्रभावित लोगों को राहत और वित्तीय सहायता प्रदान करना इस फंड का मुख्य उद्देश्य है।

Q2: पीएम केयर्स फंड के अध्यक्ष कौन होते हैं?

भारत के प्रधानमंत्री इस फंड के पदेन अध्यक्ष (Ex-officio Chairman) होते हैं, जबकि रक्षा मंत्री, गृह मंत्री और वित्त मंत्री इसके ट्रस्टी होते हैं।

Q3: क्या पीएम केयर्स फंड की जानकारी आरटीआई (RTI) के तहत मिल सकती है?

नहीं, पीएम केयर्स फंड को सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI Act) के दायरे से बाहर रखा गया है, हालांकि इसके ऑडिटेड अकाउंट्स को सरकार समय-समय पर अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक करती है।

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अनुराधा दुबे

अनुराधा दुबे

Content Writer

अनुराधा दुबे एक समर्पित और अनुभवी कंटेंट राइटर हैं, जो भारत से जुड़ी राजनीतिक, सामाजिक और नीतिगत खबरों को गहराई से समझकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। उन...

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