काशी की पावन भूमि एक बार फिर भारतीय संस्कृति और लोक-आस्था के महाकुंभ की गवाह बनी। मौका था महाकवि गोस्वामी तुलसीदास की जयंती का, और स्थान था देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में शुमार बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU)। विश्वविद्यालय के भारत अध्ययन केंद्र के सहयोग से मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र में आयोजित एक भव्य और गरिमामयी समारोह में देश की 28 दिग्गज विभूतियों को प्रतिष्ठित ‘रामायणी सम्मान’ से अलंकृत किया गया। इस आयोजन ने न केवल अकादमिक जगत बल्कि कला, संगीत, अध्यात्म और समाज सेवा से जुड़े लोगों का भी ध्यान अपनी ओर खींचा है।
संगीत के दिग्गजों और संतों का संगम
इस राष्ट्रीय स्तर के आयोजन में देश के कोने-कोने से शिक्षाविद, संत, सांसद और संस्कृति मर्मज्ञ शामिल हुए। समारोह का मुख्य आकर्षण रहे देश के जाने-माने भजन सम्राट पद्मश्री अनूप जलोटा और प्रख्यात गायिका अनुराधा पौडवाल। कार्यक्रम के दौरान जब अनूप जलोटा ने अपना प्रसिद्ध भजन ‘ऐसी लागी लगन, मीरा हो गई मगन’ की प्रस्तुतियां दीं, तो पूरा सभागार भक्ति रस में सराबोर हो गया। उनकी सुरीली आवाज ने वहां मौजूद हर शख्स का मन मोह लिया।
रामायण रिसर्च काउंसिल और बीएचयू के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज, साहित्य, संगीत और अध्यात्म के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान देने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित करना था।
इन 28 हस्तियों को मिला प्रतिष्ठित सम्मान
समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले जिन 28 महानुभावों को ‘रामायणी सम्मान’ प्रदान किया गया, उनकी सूची खासी लंबी और प्रतिष्ठित है। इस लिस्ट में शामिल प्रमुख नाम:
- पद्मश्री अनूप जलोटा (गायक)
- अनुराधा पौडवाल (प्रसिद्ध पार्श्व गायिका)
- आरके सिन्हा (उद्योगपति एवं विचारक)
- स्वर्गीय किशोर कुणाल
- डॉ. अर्चना प्रकाश
- भगवान दास
- डॉ. उदय प्रताप सिंह
- डॉ. अवधी हरि
- योगेश्वर प्रसाद देवरानी, आदित्य जैन और अभय माणके
- संत हरिओम, नरेंद्रनाथ गगन, योगेश चंद्र शर्मा योगी
- संजीव कुमार, डॉ. आशा ओझा, मद्गुल्ला प्रफुल्ला
- विनोद कुमार तिवारी, डॉ. चंद्र प्रभा मदान, आचार्य संतोष पांडेय
- अजय याग्निक, विंध्याचल मणि त्रिपाठी, राजराधे कृष्ण शर्मा
- प्रेम प्रकाश दुबे, त्रिलोकी नाथ पांडेय, रामभनी विवेदी
- डॉ. रविशंकर पांडेय और रेखा मेहरा
देश के हर जिले तक पहुंचेगा यह अभियान
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि और रामायण रिसर्च काउंसिल के बोर्ड ऑफ ट्रस्टी के अध्यक्ष एवं नैनीताल-उधमसिंह नगर से सांसद अजय भट्ट ने अपने संबोधन में एक बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस ‘रामायणी सम्मान’ को आने वाले समय में देश के प्रत्येक जिले तक ले जाने की योजना है। भारत में रामायण के आदर्शों और संस्कृति के संरक्षण के लिए जमीनी स्तर पर काम करने वाले कई लोग छिपे हुए हैं, जिन्हें पहचान दिलाना इस अभियान का लक्ष्य है ताकि नई पीढ़ी को प्रेरणा मिल सके।
छत्तीसगढ़ के सरगुजा से सांसद चिंतामणि महाराज ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि सकारात्मक ऊर्जा और समाज सुधार के कार्यों से जुड़े लोगों का उत्साहवर्धन बेहद जरूरी है। वहीं, पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने कहा कि काशी से इस अभियान की शुरुआत होना सनातन संस्कृति के लिए एक ऐतिहासिक कदम है।
बीएचयू कुलपति ने सराहा, सीतामढ़ी में भव्य योजना की तैयारी
समारोह की अध्यक्षता करते हुए बीएचयू के कुलपति प्रोफेसर अजित चतुर्वेदी ने कहा कि यह विश्वविद्यालय के लिए अत्यंत गौरव का विषय है कि इतने बड़े सांस्कृतिक और वैचारिक समागम का केंद्र बीएचयू बना। उन्होंने जोर देकर कहा कि रामायण के आदर्श केवल धार्मिक ग्रंथ तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे एक आदर्श जीवन जीने का मार्गदर्शक हैं।
रामायण रिसर्च काउंसिल के ट्रस्टी और सम्मान समारोह के संयोजक देवदत्त शर्मा ने बताया कि काउंसिल इससे पहले भी कई बड़े सांस्कृतिक कार्य कर चुकी है। कोरोना काल के कठिन दौर में डिजिटल रामलीला का सफल आयोजन हो या फिर अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन पर आधारित 1250 पृष्ठों का विशाल ग्रंथ ‘श्रीरामलला-मन से मंदिर तक’ तैयार करना, काउंसिल लगातार सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को मजबूत कर रही है।
उन्होंने आगे बताया कि सीतामढ़ी में प्राचीन श्रीरामजानकी स्थान के विकास के लिए 12 एकड़ जमीन आवंटित की गई है। इस पवित्र स्थल पर देश के 51 शक्तिपीठों से लाई गई मिट्टी और ज्योत से अखंड ज्योत स्थापित की जाएगी। साथ ही वहां चतुर्भुजा महालक्ष्मी की स्थापना का भी संकल्प लिया गया है, जिसके लिए जीर्णोद्धार का काम शुरू हो चुका है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: 'रामायणी सम्मान' किस संस्था द्वारा प्रदान किया जाता है?
Ans: यह सम्मान 'रामायण रिसर्च काउंसिल' द्वारा बीएचयू के भारत अध्ययन केंद्र और मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र के सहयोग से प्रदान किया जाता है।
Q2: इस वर्ष यह सम्मान कितने लोगों को दिया गया?
Ans: तुलसीदास जयंती के अवसर पर इस वर्ष संगीत, साहित्य, अध्यात्म और समाज सेवा के क्षेत्र से जुड़े कुल 28 प्रख्यात लोगों को यह सम्मान दिया गया है, जिसमें अनूप जलोटा और अनुराधा पौडवाल भी शामिल हैं।
Q3: इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
Ans: इसका मुख्य उद्देश्य रामायण के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाना और भारतीय संस्कृति, कला, साहित्य और समाज सेवा में उल्लेखनीय कार्य करने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित करना है।