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दिग्विजय सिंह को एमपी-एमएलए कोर्ट से बड़ा झटका, मानहानि केस में लगा जुर्माना

दिग्विजय सिंह को एमपी-एमएलए कोर्ट से बड़ा झटका, मानहानि केस में लगा जुर्माना

राजनीतिक गलियारों में बयानों के तीर अक्सर राजनेताओं को कानूनी उलझनों में फंसा देते हैं। मध्य प्रदेश की राजनीति के दिग्गज और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह को एक बार फिर अदालती कार्यवाही के दौरान बड़ा झटका लगा है। भोपाल की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने मानहानि के एक पुराने मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए दिग्विजय सिंह पर 1000 रुपये का जुर्माना (शास्ति) लगाया है। यह कार्रवाई अदालत की प्रक्रिया में देरी और परिवादी पक्ष के साक्षी का प्रतिपरीक्षण (Cross Examination) समय पर पूरा न करने के कारण की गई है।

क्या है पूरा मानहानि मामला?

यह पूरा कानूनी विवाद साल 2014 में दिए गए एक बयान से जुड़ा हुआ है। उस दौरान भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता और वर्तमान में खजुराहो से सांसद विष्णु दत्त शर्मा (VD Sharma) ने दिग्विजय सिंह के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था। वीडी शर्मा का आरोप था कि कांग्रेस नेता ने उन पर गंभीर और निराधार सार्वजनिक आरोप लगाए थे, जिससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को भारी ठेस पहुंची।

शिकायत के मुताबिक, 4 जुलाई 2014 को इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया के सामने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस या बयानबाजी के दौरान दिग्विजय सिंह ने कुख्यात 'व्यापमं घोटाले' को लेकर वीडी शर्मा का नाम घसीटा था। आरोप लगाया गया था कि वीडी शर्मा, जो अपने छात्र जीवन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े रहे हैं, इस घोटाले में बिचौलिए या मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे थे। बीजेपी नेता ने इसे अपनी छवि धूमिल करने का एक राजनीतिक षड्यंत्र बताया और अदालत की शरण ली।

कोर्ट ने क्यों लगाया 1000 रुपये का जुर्माना?

भोपाल स्थित न्यायिक दंडाधिकारी एमपी एवं एमएलए कोर्ट में इस मामले की सुनवाई चल रही है। अदालत की कार्यवाही के दौरान कई बार डिफेंस कौंसिल (बचाव पक्ष के वकील) को परिवादी साक्षी के प्रतिपरीक्षण के लिए पर्याप्त अवसर और समय दिए गए थे। हालांकि, लगातार तारीखें मिलने के बावजूद प्रतिपरीक्षण की प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया गया।

अदालत ने बचाव पक्ष के इस रवैये और लगातार हो रही देरी को बहुत गंभीरता से लिया। न्यायिक प्रक्रिया में हो रहे विलंब को देखते हुए अदालत ने भारतीय दंड संहिता (IPC) और सीआरपीसी के प्रावधानों के तहत दिग्विजय सिंह पर एक हजार रुपये की शास्ति अधिरोपित की है। साथ ही, अदालत ने उनके अधिवक्ता के आचरण पर भी नाराजगी जताई है।

अगली सुनवाई पर टिकी निगाहें

अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट कर दिया है कि अगली पेशी के दौरान हर हाल में साक्षी का प्रतिपरीक्षण पूरा किया जाना चाहिए। इसके लिए दिग्विजय सिंह पक्ष को पाबंद भी कर दिया गया है। इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक हलकों में एक बार फिर बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि न्याय की प्रक्रिया में अब तेजी आ रही है और झूठ बोलने वालों को कानूनी शिकंजे का सामना करना ही पड़ेगा।

दूसरी ओर, कानूनी जानकारों का मानना है कि इस तरह के मामलों में तारीखों पर उपस्थित रहना और अदालती निर्देशों का पालन करना बेहद जरूरी होता है, अन्यथा ऐसे जुर्माने और सख्त टिप्पणियां विपक्षी दलों को राजनीतिक हमला करने का मौका दे देती हैं। इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब आगामी सुनवाई की तारीख बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जहां क्रॉस एग्जामिनेशन की प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिकी होंगी।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

प्र. दिग्विजय सिंह पर कोर्ट ने जुर्माना क्यों लगाया है?

उ. मानहानि मामले की सुनवाई के दौरान परिवादी साक्षी का प्रतिपरीक्षण (Cross Examination) तय समय पर और लगातार अवसर मिलने के बावजूद न करने पर कोर्ट ने यह जुर्माना लगाया है।

प्र. यह मानहानि का मामला किसने और कब दर्ज कराया था?

उ. यह मामला बीजेपी नेता वीडी शर्मा द्वारा 5 दिसंबर 2022 को दर्ज कराया गया था, जो साल 2014 में दिए गए बयानों से संबंधित है।

प्र. मामला किस घटना से जुड़ा है?

उ. यह मामला साल 2014 में व्यापमं घोटाले को लेकर दिए गए बयानों से जुड़ा है, जिसमें वीडी शर्मा पर मध्यस्थ होने के आरोप लगाए गए थे।

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गुंजा पांडेय

गुंजा पांडेय

Chief Sub Editor

गुंजा पांडेय तेज़ी से बदलती खबरों की दुनिया में अपनी पकड़ के लिए जानी जाती हैं। वे खेल और विज्ञान जैसे विषयों को न सिर्फ अपडेटेड रखती हैं, बल्कि उन...

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