वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन के अवसर पर गुरुवार, 17 सितंबर 2026 को आस्था और उल्लास का एक अनूठा संगम देखने को मिला। धार्मिक नगरी काशी में सुबह से ही विशेष अनुष्ठानों का दौर शुरू हो गया था, जिसमें देश के प्रधानमंत्री के दीर्घायु और स्वस्थ जीवन की कामना की गई। इसी कड़ी में प्रसिद्ध सामने घाट पर 'नमामि गंगे' के तत्वावधान में एक भव्य और आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसने स्थानीय नागरिकों और देश भर से आए श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।
सामने घाट पर गूंजे वैदिक मंत्र और भजन
गुरुवार को प्रधानमंत्री के जन्मदिन के खास मौके पर आयोजित इस अनुष्ठान की शुरुआत विधि-विधान से मां गंगा के पूजन-अर्चन के साथ हुई। इस दौरान पूरा सामने घाट वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और लोकगीतों से गंज उठा। आयोजकों और स्थानीय नागरिकों ने मिलकर मां गंगा की भव्य आरती उतारी। आरती के दौरान माहौल पूरी तरह से भक्तिमय हो गया, जहां एक तरफ ‘शांताकारं भुजगशयनम्’ जैसे पवित्र वैदिक मंत्रों का पाठ हो रहा था, वहीं दूसरी तरफ ‘बार-बार ये दिन आए, तुम जियो हजारों साल’ जैसे गीतों ने उपस्थित जनसमूह में एक अलग ही ऊर्जा भर दी।
घाट पर मौजूद हर शख्स के चेहरे पर प्रधानमंत्री के प्रति स्नेह और मां गंगा के प्रति अगाध श्रद्धा साफ झलक रही थी। 'भारत माता की जय' और 'हर हर गंगे' के जयकारों से पूरा गंगा तट गूंज उठा। इस आध्यात्मिक माहौल में हिस्सा लेने के लिए बड़ी संख्या में दूर-दूर से लोग पहुंचे थे।
76 मीटर लंबी चुनरी बनी आकर्षण का केंद्र
इस आयोजन का सबसे बड़ा आकर्षण प्रधानमंत्री के 76वें जन्मदिवस के उपलक्ष्य में मां गंगा को अर्पित की गई 76 मीटर लंबी चुनरी रही। इतनी लंबी चुनरी को मां गंगा को समर्पित करना और फिर उसके धार्मिक एवं सामाजिक संदेश को आगे बढ़ाना इस कार्यक्रम की मुख्य विशेषता रही।
नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक एवं नगर निगम के स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर राजेश शुक्ला ने इस आयोजन के बारे में विस्तार से बात करते हुए कहा, "आज देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन पर हमने मां गंगा का पूजन कर बाबा विश्वनाथ और मां गंगा से उनके उत्तम स्वास्थ्य और लंबी उम्र का आशीर्वाद मांगा है। उनके नेतृत्व में देश विकास और जनकल्याण के नित नए आयाम छू रहा है।"
विकसित भारत 2047 के संकल्प को दोहराया
राजेश शुक्ला ने आगे कहा कि केंद्र सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मूल मंत्र पर चलते हुए देश को समावेशी विकास की पटरी पर आगे बढ़ा रही है। उन्होंने वर्ष 2047 तक भारत को एक पूर्ण विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में गरीब कल्याण और बुनियादी विकास से जुड़ी योजनाओं ने आम आदमी के जीवन स्तर को पूरी तरह बदल दिया है।
उन्होंने देश के दूरदराज के इलाकों तक पक्के मकान, मुफ्त खाद्यान्न, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, शानदार सड़क नेटवर्क, हवाई संपर्क और हर घर रसोई गैस जैसी बुनियादी सुविधाओं की पहुंच का जिक्र करते हुए कहा कि आज भारत का हर नागरिक इस विकास यात्रा का प्रत्यक्षदर्शी है।
स्वच्छता और सेवा का अनूठा संदेश
इस धार्मिक आयोजन में केवल आस्था ही नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी का भी गहरा संदेश छिपा था। आयोजकों ने बताया कि मां गंगा को अर्पित की गई 76 मीटर लंबी चुनरी को पूजा-अर्चना के बाद प्रसाद के रूप में जरूरतमंदों और गरीबों में वितरित किया गया। इस अनूठी पहल के जरिए मां गंगा की स्वच्छता, पवित्रता और संरक्षण के प्रति जन-जागृत करने का प्रयास किया गया।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी श्रद्धालुओं और नागरिकों के बीच प्रसाद और भव्य रूप से मिठाइयों का वितरण किया गया। इस दौरान स्वच्छता और सामाजिक सेवा के महत्व को रेखांकित करते हुए लोगों को अपने आसपास के परिवेश को स्वच्छ रखने की प्रेरणा भी दी गई।
सैकड़ों गणमान्य नागरिक और श्रद्धालु रहे मौजूद
इस भव्य और विराट आयोजन में काशी के कई जाने-माने चेहरे और सैकड़ों की संख्या में आम नागरिक शामिल हुए। मुख्य रूप से नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक राजेश शुक्ला के साथ-साथ सुभाष श्रीवास्तव, प्रमोद कुमार पाण्डेय, लल्लन सिंह, महेंद्र तिवारी, निर्मल सिंह, अनीता सिंह, विनोद सिंह, राम सिंह, राजकपूर सिंह, कृष्णानंद, आशीष कुमार राय और केदारनाथ त्रिपाठी सहित तमाम प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।
दिनभर चले इन धार्मिक कार्यक्रमों और अनुष्ठानों के माध्यम से काशी के लोगों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि देश के नेतृत्व के प्रति उनका प्रेम और मां गंगा के प्रति उनकी आस्था कितनी गहरी है। अनुष्ठान के समापन पर सभी ने मां गंगा को प्रणाम करते हुए देश की प्रगति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वस्थ एवं दीर्घायु भविष्य की कामना की।