हाथों में हुनर और आंखों में अनगिनत सपनों को पिरोकर करघे पर ताना-बाना बुनने वाले बुनकरों की सेहत अब सरकार की विशेष प्राथमिकता बन चुकी है। पारंपरिक हस्तशिल्प और हथकरघा उद्योग के लिए विश्वभर में पहचान रखने वाले वाराणसी में बुनकरों के स्वास्थ्य को लेकर एक बड़ा और सराहनीय कदम उठाया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री तथा जिले के प्रभारी मंत्री सुरेश खन्ना ने लोहता क्षेत्र में एक विशेष निःशुल्क बुनकर स्वास्थ्य जांच शिविर का भव्य शुभारंभ किया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य लंबे समय तक करघे पर काम करने के कारण बुनकरों को होने वाली शारीरिक और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से निजात दिलाना है।
बुनकरों के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच क्यों है बेहद जरूरी?
वाराणसी और इसके आसपास के इलाकों में एक लाख से अधिक बुनकर इस पारंपरिक कला से जुड़े हुए हैं। हथकरघा उद्योग से जुड़े लोग अमूमन दिन के 8 से 12 घंटे एक ही मुद्रा में बैठकर काम करते हैं। इस तरह की जीवनशैली के कारण रीढ़ की हड्डी में दर्द, आंखों की रोशनी कमजोर होना, दमा, टीबी, फेफड़ों से जुड़े संक्रमण और उच्च रक्तचाप जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। मंत्री सुरेश खन्ना ने शिविर के उद्घाटन के दौरान इसी बात पर विशेष जोर दिया कि बुनकरों को अपने स्वास्थ्य को लेकर किसी भी तरह का संकोच नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि लगातार काम करने की शैली के कारण शरीर पर जो दुष्प्रभाव पड़ते हैं, उनका समय रहते इलाज और बचाव बेहद जरूरी है।
प्रशासन और देश के दिग्गज चिकित्सा संस्थानों की अनूठी साझेदारी
इस निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर को सफल बनाने के लिए देश और दुनिया के कई प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों ने हाथ मिलाया है। इस महाअभियान में गेट्स फाउंडेशन, मेदांता अस्पताल, काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू), आरजे शंकरा आई हॉस्पिटल और टाटा 1एमजी जैसी संस्थाएं तकनीकी और चिकित्सकीय सहयोग प्रदान कर रही हैं। शिविर में आने वाले बुनकरों की संपूर्ण स्वास्थ्य जांच की जा रही है, जिसमें आंखों की जांच से लेकर ब्लड प्रेशर, शुगर, और फेफड़ों से जुड़ी आधुनिक जांचें शामिल हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम मौके पर मौजूद रहकर मरीजों को उचित चिकित्सीय परामर्श और मुफ्त दवाइयां भी वितरित कर रही है।
आयुष्मान आरोग्य मंदिर का औचक निरीक्षण और व्यवस्थाओं का जायजा
लोहता में स्वास्थ्य शिविर के उद्घाटन के उपरांत प्रभारी मंत्री सुरेश खन्ना ने स्थानीय आयुष्मान आरोग्य मंदिर का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अस्पताल परिसर में साफ-सफाई, मरीजों के बैठने की व्यवस्था, और दवाइयों के स्टॉक का बारीकी से जायजा लिया। मंत्री ने वहां तैनात मेडिकल स्टाफ से सीधा संवाद स्थापित किया और अस्पताल में आने वाले मरीजों को मिल रही स्वास्थ्य सेवाओं की प्रगति रिपोर्ट मांगी। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि ग्रामीण और बुनकर बहुल क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार का यह प्रयास है कि अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं सुगमता से पहुंच सकें।
दिग्गज हस्तियों की मौजूदगी ने बढ़ाई अभियान की गरिमा
इस उच्च स्तरीय स्वास्थ्य कार्यक्रम के दौरान प्रशासनिक और चिकित्सा जगत की कई दिग्गज हस्तियां लोहता में मौजूद रहीं। कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्या, जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. एनपी सिंह के साथ-साथ देश के जाने-माने चिकित्सक और दिल्ली एम्स के पूर्व निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। डॉ. रणदीप गुलेरिया की उपस्थिति ने इस स्वास्थ्य शिविर के महत्व को और अधिक बढ़ा दिया। अधिकारियों और डॉक्टरों की इस संयुक्त टीम ने यह सुनिश्चित किया कि शिविर में आने वाले प्रत्येक बुनकर को बिना किसी परेशानी के सर्वोत्तम स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
पारंपरिक कलाकारों के जीवन स्तर को सुधारने की दिशा में मील का पत्थर
वाराणसी का बुनकर समाज भारतीय संस्कृति और अर्थव्यवस्था की रीढ़ रहा है। पीढ़ियों से इस कला को जीवित रखने वाले ये कारीगर देश की सांस्कृतिक धरोहर के सच्चे वाहक हैं। ऐसे में उनके स्वास्थ्य की रक्षा करना शासन और प्रशासन दोनों का नैतिक दायित्व है। इस निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर के आयोजन से न केवल बुनकरों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता आएगी, बल्कि वे समय पर अपनी बीमारियों का इलाज भी करा सकेंगे। मंत्री सुरेश खन्ना ने अपने संबोधन के अंत में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना करते हुए शिविर में आए सभी बुनकरों के उत्तम स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना की।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के नियमित शिविर यदि समय-समय पर आयोजित होते रहें, तो बुनकरों में गंभीर बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। लोहता में शुरू हुआ यह स्वास्थ्य अभियान सिर्फ एक शिविर नहीं, बल्कि बुनकर समुदाय के जीवन स्तर को बेहतर बनाने की एक मजबूत नींव है।