जौनपुर की शैक्षणिक फिजाओं में आज एक नई और सकारात्मक हलचल देखने को मिली। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय परिसर में शिक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का संदेश गूंज उठा। विश्वविद्यालय स्वास्थ्य केंद्र और अधिष्ठाता छात्र कल्याण विभाग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित एक विशेष स्वास्थ्य शिविर ने न केवल कैंपस के लोगों को स्वास्थ्य के प्रति सचेत किया, बल्कि एक स्वस्थ कार्य-संस्कृति की नींव भी रखी।
बदलती जीवनशैली और स्वास्थ्य का संकट
आज के दौर में हम जिस तीव्र गति से भाग रहे हैं, उसने हमारी जीवनशैली को पूरी तरह से बदल दिया है। प्रो. राकेश कुमार सिंह, जो कि विश्वविद्यालय के कुलपति हैं, ने इस शिविर के दौरान एक बेहद गंभीर और महत्वपूर्ण बात साझा की। उन्होंने कहा कि एक स्वस्थ शरीर और शांत मन ही व्यक्ति की असली पूंजी है। जब हम अपनी कार्यक्षमता की बात करते हैं, तो अक्सर हम अपने स्वास्थ्य को नजरअंदाज कर देते हैं, जो भविष्य में गंभीर बीमारियों का कारण बनता है।
शिविर में आए विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि खान-पान में अनियमितता और शारीरिक निष्क्रियता ही आज के समय में बीमारियों की जड़ है। तनाव का स्तर जिस तरह से युवाओं और कामकाजी पेशेवरों में बढ़ रहा है, उसे नियंत्रित करना अब एक विकल्प नहीं, बल्कि जरूरत बन गया है।
शिविर की मुख्य विशेषताएं:
- कुल 130 लोगों का हुआ परीक्षण: इसमें विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी, छात्र और उनके परिवार के सदस्य शामिल थे।
- आधुनिक और पारंपरिक जांच का संगम: शिविर में ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और बीएमआई (BMI) जैसी आधुनिक जांचों के साथ-साथ प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति से जुड़ी 'नाड़ी परीक्षण' की सुविधा भी उपलब्ध थी।
- विशेषज्ञ परामर्श: डॉ. शकुंतला आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञों की टीम ने प्रतिभागियों को न केवल रिपोर्ट दी, बल्कि उनके व्यक्तिगत स्वास्थ्य सुधार के लिए जरूरी डाइट चार्ट और व्यायाम के सुझाव भी दिए।
शिक्षा और स्वास्थ्य का अटूट संबंध
कुलपति प्रो. राकेश सिंह ने स्पष्ट किया कि एक विश्वविद्यालय का दायित्व केवल डिग्री बांटना नहीं है। उन्होंने कहा, 'विश्वविद्यालय अपने परिवार के सदस्यों के समग्र विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। जब हमारे शिक्षक और छात्र शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होंगे, तभी वे शोध और नवाचार के क्षेत्र में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दे पाएंगे।'
यह आयोजन इस मायने में भी खास था कि इसने स्वास्थ्य को एक सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में पेश किया। कुलसचिव डॉ. विनोद कुमार सिंह ने इस बात पर मुहर लगाई कि एक जागरूक और स्वस्थ विश्वविद्यालय परिवार ही संस्थान को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकता है।
जीवनशैली में बदलाव के लिए सुझाव
शिविर में आए विशेषज्ञों ने कुछ ऐसे सूत्र बताए हैं जिन्हें हर किसी को अपनी दिनचर्या में शामिल करना चाहिए:
- नियमित स्वास्थ्य जांच: बीमार होने का इंतजार न करें। हर छह महीने में एक बार बेसिक हेल्थ चेकअप जरूर कराएं।
- संतुलित आहार: जंक फूड से दूरी बनाएं और मौसमी फलों व सब्जियों को प्राथमिकता दें।
- तनाव प्रबंधन: रोजाना कम से कम 20 मिनट का योग या ध्यान (Meditation) मानसिक शांति के लिए अनिवार्य है।
- पर्याप्त नींद: शरीर की रिकवरी के लिए 7-8 घंटे की गहरी नींद बेहद जरूरी है।
सफलता के पीछे की टीम
इस शिविर के आयोजन में डॉ. मनोज कुमार पाण्डेय का समन्वय सराहनीय रहा। साथ ही, विश्वविद्यालय स्वास्थ्य केंद्र के डॉ. पुनीत सिंह ने पूरे दिन तकनीकी सहयोग प्रदान कर इसे सफल बनाया। शिविर में आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. जितेंद्र कुमार मिश्र और उनकी टीम ने जिस कुशलता से प्रतिभागियों का परीक्षण किया, उसने स्वास्थ्य के प्रति लोगों का नजरिया बदल दिया।
इस अवसर पर डीएसडब्ल्यू प्रो. प्रमोद यादव, प्रो. अजय द्विवेदी, डॉ. शशिकांत यादव, और कर्मचारी संघ के महामंत्री राधेश्याम सिंह सहित विश्वविद्यालय के कई वरिष्ठ शिक्षक और अधिकारी उपस्थित रहे। यह शिविर न केवल एक चिकित्सा कार्यक्रम था, बल्कि एक स्वस्थ भविष्य की ओर विश्वविद्यालय का एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
निष्कर्ष: यदि हम आज अपनी जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव लाते हैं, तो कल हम एक बड़ी बीमारी से बच सकते हैं। पूर्वांचल विश्वविद्यालय का यह प्रयास अन्य शिक्षण संस्थानों के लिए एक मिसाल है कि कैसे शिक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य जागरूकता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।