उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व इस बार बेहद खास अंदाज में मनाया गया। जिले के सिरकोनी विकास क्षेत्र स्थित राजकीय हाईस्कूल परियावा में भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव पर एक भव्य और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस उत्सव के दौरान विद्यालय परिसर में ऐसा माहौल देखने को मिला, मानो पूरा ब्रजमंडल यहीं उतर आया हो। बच्चों के उत्साह और उनकी कलात्मक प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोह लिया।
मटकी फोड़ और झूलन उत्सव से सजा विद्यालय परिसर
कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय की प्रधानाचार्य श्रीमती शशिकला सिंह के मार्गदर्शन में हुई। इस विशेष आयोजन में छात्र-छात्राओं और शिक्षकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। बच्चों ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों को अपनी कला के माध्यम से जीवंत कर दिया। मटकी फोड़ प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों का रोमांच और उत्साह चरम पर था। जैसे ही बच्चों ने हवा में टंगी मटकी को फोड़ा, पूरा प्रांगण तालियों की गड़गड़ाहट और 'हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की' के जयकारों से गूंज उठा।
इसके साथ ही झूलन उत्सव का भी आयोजन किया गया, जिसमें पारंपरिक संस्कृति और धार्मिक आस्था का अनूठा संगम देखने को मिला। बच्चों ने भगवान कृष्ण के झूले को बहुत ही सुंदर ढंग से सजाया और पारंपरिक गीतों के बीच झूला झुलाया। इन सांस्कृतिक गतिविधियों के जरिए विद्यार्थियों ने भारतीय संस्कृति और उसकी गहराई से जुड़े पहलुओं को बेहद करीब से महसूस किया।
संस्कृति से जुड़ाव के लिए ऐसे आयोजन बेहद जरूरी: प्रधानाचार्य
इस अवसर पर विद्यालय की प्रधानाचार्य श्रीमती शशिकला सिंह ने सभी छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और अभिभावकों को जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। अपने संबोधन में उन्होंने सांस्कृतिक कार्यक्रमों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों का मुख्य उद्देश्य केवल औपचारिकता निभाना या पर्व मनाना नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक गहरा शैक्षणिक और सामाजिक उद्देश्य छिपा होता है।
"इस तरह के आयोजनों से नई पीढ़ी को देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और शाश्वत परंपराओं से रूबरू होने का अवसर मिलता है। सांस्कृतिक गतिविधियां बच्चों के भीतर अपनी संस्कृति के प्रति सम्मान, प्रेम और जुड़ाव की भावना को मजबूत करती हैं, जो आज के समय में बेहद आवश्यक है।"
— श्रीमती शशिकला सिंह, प्रधानाचार्य, राजकीय हाईस्कूल परियावा
शैक्षणिक और बौद्धिक विकास पर विशेष जोर
प्रधानाचार्य शशिकला सिंह के कुशल नेतृत्व में यह विद्यालय लगातार तरक्की की राह पर आगे बढ़ रहा है। उनके कार्यभार संभालने के बाद से ही स्कूल में केवल किताबी ज्ञान तक शिक्षा सीमित नहीं रह गई है, बल्कि शैक्षणिक गतिविधियों के साथ-साथ खेलकूद, सांस्कृतिक और बौद्धिक प्रतियोगिताओं को भी नियमित रूप से बढ़ावा दिया जा रहा है। इसका परिणाम यह है कि बच्चों का सर्वांगीण विकास तेजी से हो रहा है और उनके शारीरिक, मानसिक व बौद्धिक कौशल में जबरदस्त सुधार देखा जा रहा है।
छात्र संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि
विद्यालय के विकास की कहानी यहीं नहीं रुकती। मिली जानकारी के अनुसार, जब प्रधानाचार्य ने इस विद्यालय का प्रभार संभाला था, तब यहां छात्र-छात्राओं की संख्या काफी कम थी। परंतु, पिछले कुछ समय में जिस प्रकार से शिक्षणेत्तर गतिविधियों, पढ़ाई के स्तर और सांस्कृतिक आयोजनों को प्राथमिकता दी गई है, उसका सकारात्मक असर अभिभावकों और छात्रों पर पड़ा है। वर्तमान समय में विद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को अपनी प्रतिभा निखारने के लिए बेहतरीन मंच मिल रहा है।
शिक्षक समुदाय का मिला भरपूर सहयोग
किसी भी संस्थान की सफलता के पीछे वहां की टीम की मेहनत और लगन होती है। राजकीय हाईस्कूल परियावा के सभी शिक्षक और शिक्षिकाएं विद्यालय की हर गतिविधि में अत्यंत सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। प्रधानाचार्य के मार्गदर्शन में सभी ने मिलकर जन्माष्टमी के इस कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की और इसे ऐतिहासिक सफलता दिलाई। शिक्षक परिवार की इस सामूहिक भागीदारी और आपसी समन्वय ने इस आयोजन को सभी के लिए हमेशा के लिए यादगार बना दिया। इस प्रकार के आयोजन न केवल विद्यालय की गरिमा को बढ़ाते हैं बल्कि समाज में भी एक सकारात्मक संदेश प्रसारित करते हैं।