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रेलवे स्टेशनों पर बड़ा बदलाव: अब सामान खोने और चोरी होने का डर खत्म!

रेलवे स्टेशनों पर बड़ा बदलाव: अब सामान खोने और चोरी होने का डर खत्म!

भारतीय रेलवे लगातार अपने यात्री अनुभव और माल ढुलाई व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में काम कर रहा है। इसी कड़ी में पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (पूसीरे) ने एक बेहद अहम और दूरदर्शी पहल की शुरुआत की है। रेलवे स्टेशनों और टर्मिनलों पर पार्सल हैंडलिंग को पूरी तरह से सुरक्षित, व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के लिए आधुनिक पार्सल केज (Parcel Cage) का निर्माण किया जा रहा है। इस योजना के तहत कटिहार मंडल के अंतर्गत आने वाले सात प्रमुख स्टेशनों को चुना गया है, जहां अब सामानों की सुरक्षा और रख-रखाव का तरीका पूरी तरह से बदल जाएगा।किन सात स्टेशनों पर मिलेगी यह आधुनिक सुविधा?

पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) कपिंजल किशोर शर्मा ने इस योजना की जानकारी देते हुए बताया कि यात्रियों और व्यापारिक उपभोक्ताओं की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यह खाका तैयार किया गया है। जिन सात स्टेशनों पर ये आधुनिक पार्सल केज बनाए जा रहे हैं, उनमें शामिल हैं:

  • किशनगंज
  • न्यू जलपाईगुड़ी
  • सिलीगुड़ी
  • हल्दीबाड़ी
  • मालदा कोर्ट
  • बालुरघाट
  • कटिहार

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इनमें से न्यू जलपाईगुड़ी, कटिहार, मालदा कोर्ट और बालुरघाट स्टेशनों पर पार्सल केज लगाने का काम तेजी से चल रहा है। वहीं, शेष बचे तीन स्टेशनों पर भी बहुत जल्द निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा ताकि इस सेवा को जल्द से जल्द जनता को समर्पित किया जा सके।

क्यों पड़ी इस आधुनिक पार्सल व्यवस्था की जरूरत?अक्सर रेलवे स्टेशनों पर देखा जाता है कि पार्सल और बुक किए गए सामानों के रख-रखाव के लिए एक निश्चित और सुरक्षित जगह का अभाव होता है। इसके चलते कई बार सामान खुले में रखे रहते हैं, जिससे उनके खराब होने, चोरी होने या पारगमन के दौरान गुम हो जाने का जोखिम बना रहता है। इन तमाम समस्याओं से निपटने के लिए ही इन खास पार्सल केज की परिकल्पना की गई है।

यह व्यवस्था पार्सल और सामानों को कुछ समय के लिए सुरक्षित रखने के लिए एक डेडिकेटेड स्टोरेज स्पेस मुहैया कराएगी। जब तक कंसाइनमेंट की लोडिंग, अनलोडिंग या डिस्पैचिंग नहीं हो जाती, तब तक वह इन केज के भीतर पूरी तरह सुरक्षित रहेगा। इससे न सिर्फ सामानों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि रेलवे कर्मचारियों को भी भारी-भरकम और कीमती सामानों को संभालने में आसानी होगी।

स्टेशन परिसरों का होगा बेहतर इस्तेमाल

पार्सल केज बनने से न केवल सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि रेलवे स्टेशनों की कार्यप्रणाली में भी गजब की कुशलता आएगी। पारंपरिक व्यवस्थाओं में पार्सल के फैल जाने से प्लेटफॉर्म या पार्सल ऑफिस के आसपास भारी भीड़भाड़ और अव्यवस्था की स्थिति बन जाती थी। इन आधुनिक केज के बन जाने से स्टेशन परिसर की जगह का सदुपयोग हो सकेगा।

साफ-सुथरे और तय किए गए स्थानों पर सामानों के रखे जाने से पार्सल का कामकाज बेहद सुचारू रूप से चल पाएगा। इससे ट्रेनों के आवागमन और पार्सल की लोडिंग-अनलोडिंग के समय में भी सुधार होगा, जो अंततः रेलवे की समयबद्धता को मजबूत करेगाग्राहकों का रेलवे पार्सल सेवाओं पर बढ़ेगा भरोसाव्यापारियों और आम नागरिकों के लिए रेलवे से सामान भेजना हमेशा से एक किफायती विकल्प रहा है, लेकिन सुरक्षा को लेकर कई बार चिंताएं बनी रहती थीं। रेलवे की यह नई पहल ग्राहकों के उसी भरोसे को और अधिक मजबूत करने के लिए है।

जब ग्राहकों को यह आश्वस्त हो जाएगा कि उनका भेजा हुआ सामान आधुनिक सुरक्षा घेरे (केज) के भीतर सुरक्षित रखा गया है, तो रेलवे की पार्सल सेवाओं के प्रति उनका विश्वास स्वतः बढ़ेगा। चोरी, टूट-फूट और सामान के गायब होने की घटनाओं पर लगाम लगने से शिकायतों का ग्राफ भी नीचे आएगा।सुरक्षा और तकनीकी उन्नयन की दिशा में एक और मील का पत्थर रेलवे लगातार तकनीकी और ढांचागत सुधारों पर जोर दे रहा है। पार्सल केज का यह प्रोजेक्ट उसी का एक हिस्सा है। आने वाले समय में पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के अन्य मंडलों में भी इस तरह की आधुनिक सुविधाओं को विस्तारित किए जाने की संभावना है। यह कदम न केवल व्यापारिक गतिविधियों को गति देगा, बल्कि क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी एक नया संबल प्रदान करेगा।

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रोली सिंह

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रोली सिंह पिछले 2 सालों से पत्रकारिता और न्यूज़ रिपोर्टिंग से जुड़ी हैं। वह लोकल न्यूज़ और लोगों से जुड़े मुद्दों को पढ़ने वालों तक पहुंचाने का काम...

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