खेती अब केवल पारंपरिक फसलों तक सीमित नहीं रही है, बल्कि देश के युवा और प्रगतिशील किसान अब आधुनिक और उच्च मूल्य वाली फसलों (High-Value Crops) की तरफ तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। इसी कड़ी में व्यावहारिक ज्ञान और आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शैक्षणिक संस्थानों द्वारा लगातार महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। हाल ही में, महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर (एमजीयूजी) के बीएससी कृषि पाठ्यक्रम के विद्यार्थियों ने एक अनूठा शैक्षिक भ्रमण किया, जिसने उन्हें खेती की आधुनिक दुनिया से रूबरू कराया।
महाराजगंज के मंसूरगंज गांव में कृषि छात्रों का विशेष भ्रमण
महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर के बीएससी (कृषि) तृतीय सेमेस्टर के विद्यार्थियों ने उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जनपद के अंतर्गत आने वाले मंसूरगंज गांव का दौरा किया। यह दौरा किसी आम खेत का नहीं, बल्कि क्षेत्र के जाने-माने प्रगतिशील किसान प्रद्युमन कुमार यादव के हाईटेक ड्रैगन फ्रूट ऑर्चर्ड (Dragon Fruit Orchard) का था। इस शैक्षिक भ्रमण का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को किताबों में पढ़ाई जाने वाली कृषि विज्ञान की थ्योरी को मैदानी हकीकत और आधुनिक तकनीकों के साथ जोड़कर देखना था।
यह पूरा शैक्षणिक दौरा यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ शिक्षक डॉ. नवनीत सिंह के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। विद्यार्थियों ने बाग में पहुंचकर ड्रैगन फ्रूट के पौधों की बनावट, उनके विकास के चरणों और फलों के संरक्षण की पूरी प्रक्रिया को बेहद करीब से परखा।
नेट हाउस और खुले वातावरण में खेती के गुर
भ्रमण के दौरान प्रगतिशील किसान प्रद्युमन कुमार यादव ने विद्यार्थियों को ड्रैगन फ्रूट की खेती से जुड़े हर छोटे-बड़े पहलू की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उनके इस आधुनिक ऑर्चर्ड में ड्रैगन फ्रूट की खेती दो अलग-अलग तरीकों से यानी नेट हाउस (Net House) के अंदर और खुले वातावरण (Open Field) दोनों में की जा रही है। इससे छात्रों को यह समझने में आसानी हुई कि अलग-अलग पर्यावरणीय परिस्थितियों का पौधे के विकास और उत्पादन पर क्या प्रभाव पड़ता है।
प्रद्युमन कुमार यादव ने कटिंग विधि (Cutting Method) के जरिए पौधों के प्रवर्धन (Propagation) के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने समझाया कि किस तरह स्वस्थ और परिपक्व शाखाओं का चयन करके उन्हें नए पौधों के रोपण के लिए तैयार किया जाता है। कृषि के दृष्टिकोण से यह तकनीक बेहद किफायती और सफल मानी जाती है, जिसे छात्रों ने डायरी में नोट किया और मौके पर इसके प्रयोग को देखा।
आधुनिक ऑर्चर्ड प्रबंधन और वैज्ञानिक उपाय
आज के समय में कृषि केवल पानी देने और खाद डालने का काम नहीं रह गई है, बल्कि यह पूरी तरह से एक साइंटिफिक मैनेजमेंट बन चुकी है। ऑर्चर्ड भ्रमण के दौरान निम्नलिखित आधुनिक तकनीकों पर विशेष चर्चा की गई:
- कुशल सिंचाई ड्रिप प्रणाली (Drip Irrigation): पानी की एक-एक बूंद का सही इस्तेमाल करने और पौधों की जड़ों तक सीधे नमी पहुंचाने के लिए ड्रिप इरिगेशन के महत्व को समझाया गया।
- संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन (Balanced Nutrient Management): मिट्टी की जांच के आधार पर पौधों को जरूरी माइक्रोन्यूट्रिएंट्स और खाद देने का वैज्ञानिक तरीका बताया गया।
- कीट एवं रोग नियंत्रण (Pest and Disease Control): ड्रैगन फ्रूट की फसल में लगने वाले संभावित रोगों और कीटों से बचाव के लिए जैविक और रासायनिक उपायों पर विस्तार से चर्चा हुई।
लागत और मुनाफे का गणित: क्यों है यह एक लाभकारी फसल?
किसी भी किसान के लिए खेती का सबसे अहम पहलू उसकी लागत (Cost) और उससे होने वाला मुनाफा (Profit) होता है। प्रगतिशील किसान प्रद्युमन कुमार यादव ने विद्यार्थियों के साथ इस आर्थिक पहलू पर खुलकर चर्चा की। उन्होंने ड्रैगन फ्रूट की खेती को एक 'उच्च मूल्य वाली फसल' (High-Value Crop) के रूप में प्रस्तुत किया।
उन्होंने समझाया कि शुरुआती दौर में नेट हाउस या बुनियादी ढांचे को खड़ा करने में थोड़ी लागत जरूर आती है, लेकिन एक बार पौधा तैयार हो जाने के बाद यह कई सालों तक लगातार बंपर पैदावार देता है। बाजार में ड्रैगन फ्रूट की मांग और इसकी प्रीमियम कीमत के चलते किसानों को पारंपरिक फसलों की तुलना में कई गुना अधिक मुनाफा मिल रहा है। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्रों में भी अब किसान इस विदेशी फल की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
विद्यार्थियों के लिए व्यावहारिक अनुभव का महत्व
कृषि शिक्षा में थ्योरी के साथ-साथ प्रैक्टिकल नॉलेज का होना सबसे बड़ी जरूरत है। जब छात्र चारदीवारी से बाहर निकलकर खेतों में उतरते हैं, तो उन्हें कृषि क्षेत्र की वास्तविक चुनौतियों और संभावनाओं का अहसास होता है। महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के इन विद्यार्थियों के लिए यह दौरा एक आंखें खोल देने वाला अनुभव रहा। उन्होंने न केवल ड्रैगन फ्रूट की खेती के वैज्ञानिक तरीकों को समझा, बल्कि एक सफल उद्यमी किसान की सोच और मेहनत से भी प्रेरणा ली।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के शैक्षणिक भ्रमण आने वाले समय में देश को नए और आधुनिक कृषि विशेषज्ञों से लैस करेंगे, जो पारंपरिक खेती की लकीर पीटने के बजाय नवाचार (Innovation) और एग्री-प्रिन्योरशिप (Agri-preneurship) को बढ़ावा देंगे। महाराजगंज के इस ड्रैगन फ्रूट ऑर्चर्ड की सफलता इस बात का प्रमाण है कि सही मार्गदर्शन और आधुनिक तकनीक मिल जाए, तो भारतीय किसान किसी भी ग्लोबल फसल को अपने खेतों में सोना उगाने का माध्यम बना सकते हैं।