छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में विद्यार्थियों के कल्याण और उनकी मूलभूत सुविधाओं को लेकर प्रशासन अब पूरी तरह से सतर्क नजर आ रहा है। इसी कड़ी में एक बड़ा कदम उठाते हुए राज्य की विधानसभा की एक महत्वपूर्ण समिति ने शहर के प्रमुख बालिका छात्रावासों का औचक निरीक्षण किया। इस निरीक्षण के दौरान वहां की व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया गया और छात्राओं से सीधे संवाद स्थापित कर उनकी परेशानियों को सुना गया।
शंकर नगर और कालीबाड़ी हॉस्टल में अचानक पहुंची समिति
बुधवार को छत्तीसगढ़ विधानसभा की 'अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा पिछड़े वर्गों के कल्याण संबंधी समिति' के सभापति पुन्नूलाल मोहले के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय दल ने रायपुर के दो प्रमुख छात्रावासों का रुख किया। इस दौरान टीम ने सबसे पहले शंकर नगर स्थित पोस्ट मैट्रिक अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के गर्ल्स हॉस्टल का दौरा किया। इसके पश्चात, दल ने कालीबाड़ी स्थित पोस्ट मैट्रिक अनुसूचित जाति हॉस्टल का भी सघन निरीक्षण किया।
अचानक पहुंचे जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के इस दल को देखकर एक बार तो वहां हड़कंप सा मच गया, लेकिन जल्द ही स्थिति सामान्य हो गई। समिति के सदस्यों ने हॉस्टल के चप्पे-चप्पे का मुआयना किया और वहां मिल रही सुविधाओं की असलियत को परखा।
छात्राओं से सीधा संवाद और उनकी समस्याएं
निरीक्षण के दौरान सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि समिति के सदस्यों ने किसी भी औपचारिकता से दूर रहकर सीधे हॉस्टल की छात्राओं से लंबी बातचीत की। कमरों की स्थिति, मेस का खाना, साफ-सफाई, पेयजल की उपलब्धता और सुरक्षा जैसे तमाम मुद्दों पर छात्राओं से फीडबैक लिया गया।
छात्राओं ने भी बिना किसी झिझक के अपनी दैनिक समस्याओं और जरूरतों को समिति के समक्ष रखा। कई जगहों पर मेस के मैन्यु और हॉस्टल परिसरों में रखरखाव की कमियों को लेकर भी बात सामने आई। समिति के मुखिया पुन्नूलाल मोहले ने एक-एक बात को बेहद गंभीरता के साथ नोट किया और छात्राओं को आश्वस्त किया कि उनकी हर जायज मांग पर तुरंत अमल किया जाएगा।
विभागीय अधिकारियों को दिए गए कड़े निर्देश
छात्राओं की शिकायतें सुनने के बाद समिति के तेवर काफी सख्त नजर आए। सभापति ने मौके पर ही मौजूद संबंधित विभाग के तमाम आला अधिकारियों को तलब किया और उन्हें व्यवस्थाओं में तुरंत सुधार लाने के कड़े निर्देश दिए।
- खान-पान की गुणवत्ता: मेस में बनने वाले भोजन की क्वालिटी और हाइजीन पर विशेष ध्यान देने को कहा गया।
- साफ-सफाई: हॉस्टल परिसर, बाथरूम और कमरों में नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
- रखरखाव के कार्य: भवनों में जहां कहीं भी टूट-फूट या मेंटेनेंस की जरूरत है, उसे तुरंत ठीक करवाने को कहा गया।
- सुरक्षा के इंतजाम: छात्राओं की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए सुरक्षा मानकों को और अधिक मजबूत करने के निर्देश दिए गए।
दिग्गज जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी
इस उच्चस्तरीय निरीक्षण दौरे के दौरान छत्तीसगढ़ विधानसभा समिति के कई प्रमुख सदस्य और अधिकारी मौजूद रहे। दौरे में समिति के सदस्य चैतराम अटामी, रामकुमार यादव, शकुन्तला सिंह पोर्ते, और यशोदा निलाम्बर वर्मा ने सक्रिय रूप से हिस्सा लिया।
इसके अलावा, विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में सुनील सोनी और पुरन्दर मिश्रा ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए। छत्तीसगढ़ विधानसभा के सचिव दिनेश शर्मा भी इस पूरे दौरे के दौरान साथ रहे और प्रशासनिक समन्वय की कमान संभाली।
क्या होगा इसका असर?
राजनीतिक गलियारों और प्रशासनिक हलकों में इस औचक निरीक्षण को काफी अहम माना जा रहा है। जानकारों का मानना है कि इस तरह के दौरों से जमीनी स्तर पर प्रशासनिक सुस्ती दूर होती है और हॉस्टलों में रहने वाले विद्यार्थियों का जीवन स्तर सुधरता है। विशेष तौर पर दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से आकर रायपुर में पढ़ाई करने वाली बेटियों के लिए ये हॉस्टल उनका दूसरा घर होते हैं, ऐसे में वहां बेहतर सुविधाएं मिलना अत्यंत आवश्यक है।
समिति द्वारा दिए गए निर्देशों के बाद अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग कितनी जल्दी इन आदेशों को जमीन पर उतारता है और छात्राओं को किन-किन सुविधाओं का लाभ मिलने लगता है। फिलहाल, इस औचक निरीक्षण के बाद रायपुर के प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है।