खेती-किसानी के मोर्चे पर राजस्थान से एक बेहद उत्साहवर्धक और राहत भरी खबर सामने आई है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और तकनीक के शानदार इस्तेमाल के दम पर राजस्थान ने राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी छलांग लगाई है। भारत सरकार द्वारा हाल ही में जारी किए गए योजना-विशिष्ट प्रदर्शन मूल्यांकन में राजस्थान ने 43.5 अंक हासिल करते हुए देश में चौथा स्थान प्राप्त किया है। इस उपलब्धि से न केवल राज्य के अन्नदाताओं में खुशी की लहर है, बल्कि कृषि क्षेत्र में डिजिटल गवर्नेंस की एक नई मिसाल भी कायम हुई है।
कड़े मानकों पर हुआ मूल्यांकन, असम और यूपी के बाद राजस्थान का जलवा
भारत सरकार ने देश के सभी राज्यों का मूल्यांकन कुल 10 प्रमुख और कड़े मानकों के आधार पर किया। इन मानकों में योजना की अधिसूचना, राज्य अंश सब्सिडी का समय पर भुगतान, फसल बीमा कवरेज का दायरा, फसल कटाई के प्रयोग, बीमा दावों के भुगतान की समयबद्धता, किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) खातों का शत-प्रतिशत नामांकन, येसटेक (YES-Tech) तकनीक का उपयोग और किसानों की शिकायतों का त्वरित निवारण जैसे बेहद अहम बिंदु शामिल थे।
इस राष्ट्रव्यापी मूल्यांकन में असम 55.5 अंकों के साथ पहले और उत्तर प्रदेश 47.5 अंकों के साथ दूसरे पायदान पर रहा। वहीं, राजस्थान ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 43.5 अंकों के साथ देश में चौथा स्थान अपने नाम किया। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में राज्य इन मानकों पर और बेहतर प्रदर्शन कर शीर्ष स्थानों की ओर तेजी से आगे बढ़ेगा।
अन्नदाताओं पर बरसी राहत: जमा प्रीमियम से साढ़े चार गुना ज्यादा मिला क्लेम
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत राजस्थान में खरीफ 2016 से लेकर खरीफ 2026 तक के आंकड़ों पर अगर नजर डालें, तो यह तस्वीर बेहद सुकून देने वाली है। इस एक दशक के लंबे सफर में राज्यभर के किसानों के लिए कुल 25.47 करोड़ फसल बीमा पॉलिसियां सृजित की गईं। इस अवधि के दौरान किसानों ने अपने हिस्से के रूप में लगभग 7,800 करोड़ रुपए का प्रीमियम जमा कराया था।
इसके एवज में किसानों को प्राकृतिक आपदाओं और फसल खराबे के रूप में कुल 35,600 करोड़ रुपए के भारी-भरकम फसल बीमा क्लेम का भुगतान किया गया। इसका सीधा मतलब यह है कि किसानों द्वारा जमा किए गए कुल प्रीमियम की तुलना में उन्हें लगभग साढ़े चार गुना (4.5x) अधिक राशि क्लेम के रूप में वापस मिली। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान केंद्र और राज्य सरकार दोनों ने ही लगभग 19-19 हजार करोड़ रुपए का भारी-भरकम प्रीमियम अंशदान किया, जिससे संकट के समय किसानों को संबल मिला।
डिजिटल तकनीक और 'येसटेक' का कमाल
राजस्थान की इस शानदार राष्ट्रीय रैंकिंग के पीछे सबसे बड़ा हाथ डिजिटल क्रांति और नई तकनीकों का पारदर्शी इस्तेमाल है। राज्य में फसल कटाई के प्रयोगों को अब पूरी तरह से आधुनिक बना दिया गया है। आंकड़ों के मुताबिक, राजस्थान में करीब 90 प्रतिशत फसल कटाई प्रयोग अब मोबाइल ऐप्स के माध्यम से पूरी तरह ऑनलाइन किए जा रहे हैं। इससे फसल की उपज के सटीक आंकड़ों को डिजिटल रूप से दर्ज करने, उनकी कड़ी निगरानी करने और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने में बहुत मदद मिली है।
इसके अलावा, अत्याधुनिक 'येसटेक' व्यवस्था के मामले में भी राजस्थान ने अव्वल प्रदर्शन किया है। इन दोनों तकनीकी और डिजिटल मानकों पर मूल्यांकन के दौरान राज्य को पूरे 10-10 अंक हासिल हुए हैं। इसके साथ ही, किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) खातों के एनरोलमेंट में 7.5 अंक और किसानों की शिकायतों के समयबद्ध निवारण में 6 अंक प्राप्त हुए हैं, जो प्रशासनिक मुस्तैदी को दर्शाते हैं।
भूमि अभिलेखों का डिजिटल एकीकरण
फसल बीमा योजना को और अधिक फूल-प्रूफ और पारदर्शी बनाने के लिए राज्य सरकार ने बीमा पोर्टल के साथ भूमि अभिलेखों (Land Records) का एकीकरण तेजी से शुरू किया है। वर्तमान स्थिति यह है कि राज्य के कुल 52,946 गांवों में से 47,028 गांवों यानी करीब 89 प्रतिशत गांवों के भू-अभिलेखों को बीमा पोर्टल के साथ सफलतापूर्वक जोड़ा जा चुका है। इस तकनीकी कदम से बीमा प्रक्रिया के दौरान दस्तावेजों और रिकॉर्ड्स का डिजिटल सत्यापन बेहद आसान हो गया है, जिससे फर्जीवाड़े की गुंजाइश लगभग खत्म हो गई है।
फर्जीवाड़े पर प्रशासन सख्त, कृषि आयुक्त की दो टूक चेतावनी
एक तरफ जहां सरकार किसानों को समय पर और पूरा मुआवजा देने के लिए प्रतिबद्ध है, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक स्तर पर पारदर्शिता को लेकर किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जा रही है। कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने स्पष्ट रूप से कहा है कि फसल बीमा योजना के क्रियान्वयन में किसी भी तरह का फर्जीवाड़ा या भ्रष्टाचार बिल्कुल स्वीकार नहीं किया जाएगा।
विभाग द्वारा अब तक फर्जीवाड़े के मामलों में 10 से अधिक एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी हैं। सभी जिला अधिकारियों और मैदानी अमले को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि शत-प्रतिशत फसल कटाई प्रयोग केवल ऐप के माध्यम से ही ऑनलाइन किए जाएं। यदि जांच के दौरान किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता भ्रष्टाचार में पाई जाती है, तो उसके खिलाफ बेहद कड़ी कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
भविष्य की राह और सरकार का नया फोकस
राष्ट्रीय रैंकिंग में चौथा स्थान हासिल करने के बाद अब राजस्थान सरकार के सामने चुनौतियां और जिम्मेदारियां दोनों बढ़ गई हैं। सरकार का आगामी फोकस बीमा कवरेज के दायरे को और अधिक広ना (विस्तृत करना), बीमा दावों का समयबद्ध और त्वरित निस्तारण करना तथा उपज के आंकड़ों को जल्द से जल्द स्वीकृत कराना है। देश के अन्नदाताओं की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में राजस्थान का यह कदम मील का पत्थर साबित हो रहा है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है।