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क्या जनेऊ पहनते हैं? राम मंदिर CEO के इंटरव्यू में पूछे गए ऐसे तीखे सवाल

क्या जनेऊ पहनते हैं? राम मंदिर CEO के इंटरव्यू में पूछे गए ऐसे तीखे सवाल

अयोध्या में इन दिनों राम मंदिर के पहले पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के चयन को लेकर सरगर्मी अपने चरम पर है। मंगलवार से शुरू हुई इस चयन प्रक्रिया ने प्रशासनिक गलियारों में एक नई चर्चा छेड़ दी है। पहले दिन जिन वरिष्ठ और दिग्गज अधिकारियों ने साक्षात्कार (Interview) दिया, उनसे केवल प्रशासनिक क्षमता ही नहीं, बल्कि उनकी व्यक्तिगत और धार्मिक जीवनशैली से जुड़े ऐसे सवाल पूछे गए, जिसने सबको चौंका दिया है।

कड़े और व्यक्तिगत सवालों के साथ शुरू हुआ इंटरव्यू

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के इस अत्यंत महत्वपूर्ण पद के लिए देश भर के कई नामी-गिरामी पूर्व प्रशासनिक और सैन्य अधिकारियों ने आवेदन किया था। मंगलवार को कड़ी सुरक्षा और गोपनीयता के बीच पहले दिन 8 उम्मीदवारों का इंटरव्यू लिया गया। ये इंटरव्यू प्रक्रिया अयोध्या के 'ग्रीन हाउस' में बंद दरवाजों के पीछे करीब 40 से 50 मिनट तक चली।

सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक, उम्मीदवारों से बोर्ड ने जो सवाल पूछे, वे काफी हैरान करने वाले थे। पैनल ने आवेदकों से उनकी धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत आदतों के बारे में सीधे सवाल किए। इनमें से कुछ प्रमुख सवाल इस प्रकार रहे:

  • क्या आप पूरी तरह से शाकाहारी हैं या मांसाहारी?
  • क्या आप शराब या किसी अन्य तरह के नशे का सेवन करते हैं?
  • क्या आप नियमित रूप से जनेऊ पहनते हैं और चोटी रखते हैं?
  • क्या आप खुद को 'कट्टर हिंदू' मानते हैं या सिर्फ सनातन धर्म में आस्था रखने वाले सामान्य व्यक्ति?
  • क्या आपके पहनावे का तरीका पूरी तरह से पारंपरिक हिंदू रीति-रिवाजों के अनुकूल है?

इन दिग्गजों ने लिया हिस्सा

इस प्रतिष्ठित पद की दौड़ में शामिल होने वाले अधिकारियों का कद बेहद ऊंचा है। पहले दिन शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों में तीन पूर्व आईएएस (IAS) अधिकारी, एक पूर्व आईपीएस (IPS) अधिकारी और चार पूर्व सैन्य अधिकारी शामिल थे।

चयन प्रक्रिया में हिस्सा लेने वाले प्रमुख चेहरों में पूर्व आईपीएस अधिकारी राजेश पांडेय और जौनपुर के पूर्व जिलाधिकारी दिनेश चंद्र प्रमुख रूप से शामिल रहे। इसके अलावा अयोध्या के पूर्व डीएम योगेश्वर राम मिश्रा और समीर पांड्या भी इस रेस में मजबूती से बने हुए हैं। खास बात यह है कि इस सूची में दक्षिण भारत के प्रसिद्ध मंदिरों में सेवा दे चुके पूर्व वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी शामिल हैं।

तीन सदस्यीय चयन समिति कर रही है मूल्यांकन

आवेदकों के चयन के लिए ट्रस्ट ने एक उच्च-स्तरीय तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। इस समिति में:

  • सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज प्रमोद कोहली
  • लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी (सेवानिवृत्त)
  • सुरेश हवारे

शामिल हैं। यह समिति कुल 18 शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों में से अंत में तीन बेहतरीन नामों को चुनेगी। इसके बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट इन तीन नामों में से किसी एक पर अंतिम मुहर लगाएगा।

क्यों पड़ी CEO पद की जरूरत?

आखिर अचानक से राम मंदिर ट्रस्ट को एक पूर्णकालिक CEO नियुक्त करने की आवश्यकता क्यों पड़ी? इसके पीछे हाल ही में सामने आया वह विवाद है, जिसमें मंदिर के लिए मिले दान में कथित हेराफेरी की बातें सामने आई थीं। वित्तीय प्रबंधन में गड़बड़ी के आरोपों के बाद ट्रस्ट की काफी किरकिरी हुई थी, और इस मामले में अब तक आठ आरोपियों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने के लिए ट्रस्ट ने यह बड़ा कदम उठाया है। उम्मीद की जा रही है कि एक स्वतंत्र और पेशेवर CEO के आ जाने से मंदिर के वित्तीय कामकाज और दान पेटियों के प्रबंधन में पूरी पारदर्शिता आएगी।

आगे की प्रक्रिया और गोपनीयता

शुरुआत में यह तय किया गया था कि इंटरव्यू केवल दो दिनों तक चलेंगे, लेकिन उम्मीदवारों की संख्या और चयन प्रक्रिया की गहराई को देखते हुए अब यह चार और दिन चल सकती है। सभी उम्मीदवारों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे मीडिया से पूरी तरह दूरी बनाए रखें। इंटरव्यू समाप्त होने के बाद उन्हें तुरंत अयोध्या हवाई अड्डे से नई दिल्ली के लिए रवाना किया जा रहा है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1: राम मंदिर के CEO पद के लिए कुल कितने उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया था?

अ: कुल 5,200 आवेदकों में से शुरुआती दौर में 18 उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया था।

Q2: चयन समिति में कौन-कौन शामिल है?

अ: चयन समिति में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज प्रमोद कोहली, रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और सुरेश हवारे शामिल हैं।

Q3: पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति क्यों की जा रही है?

अ: मंदिर निर्माण के लिए मिले दान में कथित हेराफेरी और वित्तीय अनियमितताओं के मामलों के बाद ट्रस्ट के कामकाज में पारदर्शिता और सख्त वित्तीय प्रबंधन लाने के लिए यह नियुक्ति की जा रही है।

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अनुराधा दुबे

अनुराधा दुबे

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अनुराधा दुबे एक समर्पित और अनुभवी कंटेंट राइटर हैं, जो भारत से जुड़ी राजनीतिक, सामाजिक और नीतिगत खबरों को गहराई से समझकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। उन...

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