सिनेमा के इतिहास का सबसे बड़ा दांव
भारतीय सिनेमा के इतिहास में जब भी सबसे बड़े और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स की बात होगी, तो नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही फिल्म 'रामायण' का नाम सबसे ऊपर आएगा। करीब चार हजार करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट से बन रही यह फिल्म केवल एक सिनेमाई प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति और आस्था का एक ऐसा महाकाव्य है जिसे पर्दे पर जीवंत करने के लिए देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं। इस मेगा-बजट फिल्म को लेकर आए दिन नए खुलासे हो रहे हैं, जो दर्शकों की उत्सुकता को और ज्यादा बढ़ा देते हैं।
हाल ही में जब इस फिल्म के मुख्य कलाकार रणबीर कपूर का जन्मदिन था, तो मेकर्स ने दर्शकों को एक ऐसा तोहफा दिया जिसने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया। निर्माताओं ने फिल्म के सेट से एक बिहाइंड द सीन (BTS) वीडियो जारी किया। इस वीडियो के सामने आते ही यह सवाल एक बार फिर बहस के केंद्र में आ गया कि आखिर इस महागाथा में भगवान श्रीराम के किरदार के लिए सिर्फ और सिर्फ रणबीर कपूर को ही क्यों चुना गया? क्या इस चयन के पीछे केवल उनकी स्टार पावर है या इसके पीछे कोई गहरा कलात्मक दृष्टिकोण छिपा है?
मेकर्स ने तोड़ी चुप्पी, बताई कास्टिंग के पीछे की असल कहानी
फिल्म से जुड़े अंदरूनी सूत्रों और मेकर्स के मुताबिक, भगवान राम का किरदार निभाना किसी भी अभिनेता के लिए लोहे के चने चबाने जैसा है। इस चरित्र में केवल शारीरिक बनावट या आकर्षक चेहरा होना ही काफी नहीं है, बल्कि उस गरिमा, शांति, मर्यादा और आंतरिक शक्ति को पर्दे पर उतारना अनिवार्य है जो सदियों से भारतीय मानस में श्रीराम की छवि से जुड़ी हुई है। नितेश तिवारी और उनकी कास्टिंग टीम का मानना है कि रणबीर कपूर के भीतर अभिनय की जो गहराई और ठहराव इस समय मौजूद है, वह इस किरदार के साथ पूरी तरह न्याय कर सकता है।
मेकर्स द्वारा साझा किए गए वीडियो में इस बात की झलक साफ दिखाई देती है कि कैसे रणबीर इस किरदार के मूड और उसकी गंभीरता को आत्मसात कर रहे हैं। उनके चेहरे के हावभाव, उनकी आंखों की नमी और संवाद अदायगी का वह संयम जो भगवान राम की पहचान रहा है, रणबीर की शैली में स्वाभाविक रूप से नजर आता है। यही वह मुख्य वजह है जिसके चलते तमाम बड़े विकल्पों के बावजूद निर्देशक ने रणबीर पर ही अपना दांव खेलना सबसे सुरक्षित और बेहतरीन समझा।
स्क्रीन प्रेजेंस और अभिनय की बहुमुखी प्रतिभा
रणबीर कपूर ने पिछले कुछ वर्षों में अपने अभिनय से यह साबित कर दिया है कि वे केवल एक कमर्शियल हीरो नहीं हैं, बल्कि वे एक ऐसे कलाकार हैं जो किसी भी किरदार की खाल में पूरी तरह घुस सकते हैं। 'बर्फी' से लेकर 'रॉकस्टार' और हाल ही में आई 'एनिमल' तक, रणबीर ने खुद को हर सांचे में ढालकर दिखाया है। लेकिन 'रामायण' का मंच इन सबसे बिल्कुल अलग है। यहाँ पर अभिनय की अतिशयोक्ति (Melodrama) नहीं चल सकती। यहाँ पर सूक्ष्म अभिव्यक्तियों (Subtle Expressions) का खेल होता है।
- गंभीरता और संयम: भगवान राम के चरित्र की सबसे बड़ी विशेषता उनका संयम है। रणबीर कपूर असल जिंदगी में भी काफी शांत और रिजर्व स्वभाव के माने जाते हैं, जो पर्दे पर उनकी मदद कर रहा है।
- आंखों से संवाद: इस किरदार में संवादों से ज्यादा आंखों की भाषा महत्वपूर्ण होती है। रणबीर की आंखों में जो संवेदनशीलता दिखाई देती है, वह दर्शकों के दिलों को सीधे छूती है।
- शारीरिक भाषा (Body Language): एक राजकुमार और मर्यादा पुरुषोत्तम की चाल-ढाल को अपनाने के लिए रणबीर ने महीनों तक कड़ी शारीरिक और मानसिक ट्रेनिंग ली है।
क्यों खास है यह चार हजार करोड़ का प्रोजेक्ट?
सिनेमा गलियारों में चर्चा है कि यह फिल्म तकनीक और वीएफएक्स (VFX) के मामले में हॉलीवुड की बड़ी फेंटेसी फिल्मों को टक्कर देगी। ऑस्कर विजेता स्टूडियोज़ इस पर काम कर रहे हैं। ऐसे में जब तकनीक इतनी भारी-भरकम होगी, तो अभिनेताओं पर अपने अभिनय के जरिए उस तकनीक को मात देने का दबाव और भी ज्यादा बढ़ जाता है। अगर कलाकार का अभिनय कमजोर पड़ जाए, तो पर्दे पर सिर्फ और सिर्फ वीएफएक्स ही दिखाई देता है और भावनाएं मर जाती हैं।
नितेश तिवारी ने इसी खतरे को भांपते हुए सबसे मजबूत और भरोसेमंद अभिनय स्तंभ को चुना है। रणबीर कपूर की मौजूदगी इस बात की गारंटी देती है कि तकनीक चाहे जितनी भी उन्नत हो, फिल्म की मूल आत्मा यानी भावनाएं और रिश्ते कहीं पीछे नहीं छूटेंगे।
दर्शकों की प्रतिक्रिया और उम्मीदें
जैसे ही बर्थडे पर मेकर्स ने बीटीएस वीडियो के जरिए झलकियां दिखाईं, फैंस की दीवानगी सातवें आसमान पर पहुंच गई। सोशल मीडिया पर #Ramayana और #RanbirKapoor ट्रेंड करने लगा। लोगों का कहना है कि रणबीर को राम के रूप में देखना एक अद्भुत अनुभव होने वाला है। हालांकि, कुछ लोगों के मन में अभी भी यह संशय है कि क्या कोई आधुनिक अभिनेता इस पौराणिक छवि के साथ पूरा न्याय कर पाएगा या नहीं। लेकिन जिस तरह से मेकर्स ने एक-एक पहलू पर बारीकी से काम किया है, उसने आलोचकों के मुंह भी बंद कर दिए हैं।
कलाकारों की पूरी फौज और भव्य सेट
इस फिल्म में केवल रणबीर कपूर ही नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा के कई दिग्गज कलाकार एक साथ नजर आने वाले हैं। माता सीता के किरदार के लिए दक्षिण भारत की मशहूर अभिनेत्री साई पल्लवी को चुना गया है, जिनकी सादगी और अभिनय क्षमता इस रोल के लिए एकदम सटीक मानी जा रही है। वहीं, खूंखार खलनायक रावण के किरदार के लिए 'केजीएफ' फेम यश को अनुबंधित किया गया है, जो इस महाकाव्य में आग लगाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
फिल्म के सेट पर काम करने वाले एक तकनीशियन ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि हर एक सीन को शूट करने से पहले हफ्तों रिसर्च की जा रही है। वेशभूषा से लेकर आभूषणों तक, हर चीज का इतिहास के पन्नों से मिलान किया जा रहा है ताकि किसी की भी धार्मिक भावना आहत न हो और एक बेदाग कृति दर्शकों के सामने पेश की जा सके।
निष्कर्ष: क्या यह उम्मीदों पर खरी उतरेगी?
आने वाले समय में जब यह फिल्म सिनेमाघरों में उतरेगी, तो यह तय है कि यह बॉक्स ऑफिस के कई पुराने रिकॉर्ड तोड़ देगी। लेकिन उससे भी बड़ी चुनौती यह होगी कि क्या यह देश की उम्मीदों और भावनाओं पर खरी उतर पाती है या नहीं। फिलहाल, रणबीर कपूर को राम के रूप में चुनने का मेकर्स का फैसला पूरी तरह से उनके अब तक के करियर ग्राफ और अभिनय क्षमता पर आधारित है। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि जब परदे पर यह धनुष और बाथ उठेगा, तो दर्शक इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।