भारतीय सिनेमा ने अपने एक ऐसे अनमोल नगीने को खो दिया है, जिसकी आवाज और अदाकारी ने दशकों तक दर्शकों के दिलों पर राज किया। बॉलीवुड और मराठी फिल्मों के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर अब हमारे बीच नहीं रहे। 75 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया है। उनके अचानक यूं चले जाने से पूरी फिल्म इंडस्ट्री और उनके चाहने वालों में शोक की लहर दौड़ गई है।
गोवा स्थित घर पर बिगड़ी थी तबीयत
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह दुखद घटना गोवा के डोना पाउला स्थित उनके आवास पर हुई। गुरुवार सुबह उनकी तबीयत अचानक बेहद खराब हो गई थी। डॉक्टरों के मुताबिक, तड़के करीब ढाई बजे नाना पाटेकर ने अपने एक करीबी दोस्त को मैसेज भेजकर अपनी खराब तबीयत और सीने में दर्द की जानकारी दी थी। हालांकि, रात का समय होने के कारण वह संदेश समय पर नहीं देखा जा सका।
जब सुबह करीब चार बजे उनके दोस्त उनके घर पहुंचे, तो उनकी हालत बेहद नाजुक थी। वह पसीने से तरबतर थे और उन्हें सांस लेने में भारी परेशानी हो रही थी। इसके बाद फौरन एंबुलेंस बुलाई गई और अस्पताल ले जाते वक्त रास्ते में उन्हें सीपीआर (CPR) भी दिया गया। हालांकि, अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनका निधन हो चुका था।
अस्पताल के डॉक्टरों ने की बचाने की पूरी कोशिश
मणिपाल अस्पताल लाए जाने के बाद भी चिकित्सा दल ने उन्हें बचाने के लिए अपनी तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ी। मेडिकल बुलेटिन के अनुसार, लगभग 45 मिनट तक लगातार कार्डियक रेससिटेशन और सीपीआर दिया गया, लेकिन उनके दिल की धड़कन दोबारा शुरू नहीं हो पाई। आखिरकार, सुबह करीब 5:10 बजे डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार, मौत की मुख्य वजह कार्डियक अरेस्ट बताई जा रही है, हालांकि मेडिको-लीगल केस होने के कारण शव को पोस्टमार्टम के लिए गोवा मेडिकल कॉलेज भेजा गया है।
राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार
कला जगत में उनके अमूल्य योगदान और दशकों की लंबी तपस्या को सम्मान देते हुए महाराष्ट्र सरकार ने उनके अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नाना पाटेकर के बेटे मल्हार पाटेकर से दूरभाष पर बातचीत कर अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की है और परिवार को इस दुख की घड़ी में हरसंभव मदद का भरोसा दिया है।
देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दिग्गज अभिनेता के निधन पर गहरा दुख प्रकट किया है। प्रधानमंत्री ने अपने शोक संदेश में कहा कि नाना पाटेकर को उनके बेबाक और स्पष्ट विचारों के लिए हमेशा याद रखा जाएगा। वे अपनी बात कहने में कभी नहीं हिचकिचाते थे और भारतीय सिनेमा में उनका योगदान अतुलनीय है।
13 साल की उम्र में शुरू किया था संघर्ष का सफर
नाना पाटेकर की जिंदगी सिर्फ एक सफल अभिनेता की कहानी नहीं थी, बल्कि यह संघर्ष से शिखर तक पहुंचने की एक प्रेरणादायक दास्तान थी। उनका जन्म 1 जनवरी 1951 को महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के मुरूड-जंजीरा में हुआ था। उनका वास्तविक नाम विश्वनाथ पाटेकर था। घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण उन्हें महज 13 साल की छोटी उम्र में ही काम की तलाश में उतरना पड़ा था।
पेट भरने के लिए उन्होंने शुरुआती दिनों में फिल्मों के पोस्टर पेंट करने से लेकर सड़कों पर जेब्रा क्रॉसिंग बनाने तक के कठिन काम किए थे। उस दौर में उन्हें पारिश्रमिक के रूप में बेहद मामूली रकम और दिन में एक वक्त का भोजन मिलता था। यही कड़ा संघर्ष आगे चलकर उनकी पहचान बना, जिसने उनकी शख्सियत और अभिनय को एक अलग ही गहराई दी।
रंगमंच से लेकर सिल्वर स्क्रीन तक का सफर
नाना पाटेकर ने अपने अभिनय सफर की शुरुआत मराठी थिएटर से की थी। रंगमंच की इस भट्टी ने उनके भीतर के कलाकार को तराशने का काम किया। साल 1978 में आई फिल्म 'गमन' के जरिए उन्होंने हिंदी सिनेमा में कदम रखा। हालांकि, उन्हें असली पहचान फिल्म 'अंकुश' से मिली। इसके बाद 'परिंदा', 'प्रहार', 'अंगार', 'तिरंगा' और 'क्रांतिवीर' जैसी फिल्मों ने उन्हें इंडस्ट्री के सबसे मझे हुए और ताकतवर अभिनेताओं की सूची में ला खड़ा किया।
- परिंदा: इसमें निभाया गया 'अन्ना सेठ' का खूंखार किरदार आज भी दर्शकों के रोंगटे खड़े कर देता है।
- क्रांतिवीर: प्रताप नारायण तिलक के बागी अंदाज ने उन्हें नेशनल अवॉर्ड और फिल्मफेयर दोनों दिलाया।
- खामोशी और अब तक छप्पन: एक संवेदनशील पिता से लेकर एक शांत और तेज-तर्रार पुलिस अफसर तक, उन्होंने हर रंग में खुद को साबित किया।
- वेलकम: 'उदय भाई' के रूप में उनकी कॉमिक टाइमिंग ने यह साबित कर दिया कि वे कॉमेडी में भी बेजोड़ हैं।
- नटसम्राट: मराठी सिनेमा की इस मास्टरपीस में गणपतराव बेलवलकर के रूप में उनका अभिनय भारतीय सिनेमा के इतिहास में अमर हो गया है।
निजी जीवन के गहरे जख्म
पेशेवर जिंदगी में बुलंदियों को छूने वाले नाना पाटेकर के निजी जीवन में गहरे दर्द भी रहे। साल 1978 में उन्होंने नीलकांति पाटेकर से विवाह किया था। दोनों का एक बेटा मल्हार पाटेकर है। हालांकि, उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा दर्द उनके बड़े बेटे दुर्वासा से जुड़ा था, जो गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के साथ पैदा हुए थे और महज ढाई साल की उम्र में इस दुनिया से चले गए थे। बेटे की यह कमी उनके जीवनभर का नासूर बनी रही।
भले ही नाना और नीलकांति लंबे समय से अलग रह रहे थे, लेकिन उनके बीच आपसी सम्मान हमेशा कायम रहा और उन्होंने कभी कानूनी रूप से तलाक नहीं लिया।
सिनेमा का एक युग समाप्त
नाना पाटेकर का यूं अचानक चले जाना कला जगत के लिए एक ऐसी क्षति है जिसे कभी भरा नहीं जा सकता। उनकी मजबूत आवाज, आंखों के तीखे भाव और संवाद अदायगी का अनूठा अंदाज हमेशा हमारी यादों में जिंदा रहेगा। भारतीय सिनेमा के इस महान कलाकार को विनम्र श्रद्धांजलि!