मध्य प्रदेश के सागर जिले में प्रशासनिक महकमे में उस समय हड़कंप मच गया जब जिला कलेक्टर प्रतिभा पाल ने जन शिकायतों और विकास कार्यों में ढिलाई बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ ताबड़तोड़ और सख्त फैसले लिए। सोमवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित समय सीमा (टीएल) बैठक प्रशासनिक अमले के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम साबित नहीं हुई। कलेक्टर ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया है कि आम जनता के कामों में किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासनिक अनुशासनहीनता और जनता की शिकायतों के निपटारे में अनावश्यक देरी पर कड़ा रुख अपनाते हुए उन्होंने कई बड़े अधिकारियों के वेतन रोकने और कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं।
समय सीमा बैठक में खुली अधिकारियों की पोल
सोमवार को आयोजित इस उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में जिले भर के तमाम विभागों के कामकाज का लेखा-जोखा सामने रखा गया। कलेक्टर प्रतिभा पाल ने एक-एक विभाग की फाइलों को खंगालना शुरू किया तो कई मामलों में महीनों से धूल फांकती अर्जियां और लंबित प्रकरण सामने आए। जन शिकायतों के निवारण, स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत, और भू-अर्जन से जुड़े मामलों में अधिकारियों की सुस्ती पर कलेक्टर का पारा चढ़ गया। उन्होंने साफ तौर पर निर्देश दिए कि आने वाले 'जन विश्वास शिविर' से पहले हर हाल में सभी लंबित शिकायतों का संतुष्टिपूर्ण निराकरण हो जाना चाहिए, अन्यथा गाज गिरना तय है।
बंडा तहसीलदार पर सबसे बड़ी गाज, वेतन रोकने के आदेश
समीक्षा बैठक के दौरान बंडा तहसील का कामकाज विशेष रूप से रडार पर रहा। भू-अर्जन से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में बंडा तहसीलदार द्वारा बरती गई सुस्ती और समय पर कार्रवाई न करने के मामलों को कलेक्टर ने बेहद गंभीरता से लिया। तहसीलदार के लचर रवैये से नाराज होकर कलेक्टर ने उन्हें तत्काल प्रभाव से कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। इतना ही नहीं, आगामी आदेश तक उनके वेतन पर रोक लगा दी गई है। एडीएम स्तर के अधिकारी को निर्देशित किया गया है कि वे इन लंबित मामलों की व्यक्तिगत रूप से समीक्षा करें ताकि जमीनी स्तर पर जनता को राहत मिल सके।
बंडा नगरीय निकाय के विकास कार्यों की होगी विशेष जांच
सिर्फ प्रशासनिक मामले ही नहीं, बल्कि बंडा नगरीय निकाय में हुए निर्माण कार्यों और नगरीय प्रशासन विभाग की योजनाओं के संचालन पर भी सवालिया निशान खड़े हुए हैं। स्थानीय निवासियों को सरकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ मिलने में आ रही अड़चनों को देखते हुए कलेक्टर ने एक विशेष जांच समिति गठित करने के निर्देश दे दिए हैं। इस समिति को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वह आगामी 15 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करे। जांच के दायरे में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और सरकारी फंड के इस्तेमाल को मुख्य रूप से शामिल किया गया है।
स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही पर टीबी अधिकारी और दो BMO नपे
प्रशासनिक सख्ती का असर स्वास्थ्य विभाग पर भी साफ देखने को मिला। राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम जैसे बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण अभियान में लापरवाही बरतने के लिए जिला टीबी अधिकारी डॉ. कुरैशी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई है। उनके कार्यप्रणाली से असंतुष्ट नजर आते हुए कलेक्टर ने आगामी आदेश तक उनका वेतन रोकने के निर्देश जारी किए हैं।
स्वास्थ्य विभाग की फेरबहार यहीं नहीं रुकी। खुरई और बीना के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर्स (BMO) के कामकाज में भी भारी खामियां पाई गईं। इन दोनों अधिकारियों के वेतन को भी 'ऑन होल्ड' रखने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी तरह की हीला-हवाली को माफ न किए जाने की चेतावनी दी गई है।
जननी सुरक्षा योजना में देरी पर अकाउंट मैनेजर की सेवा समाप्ति की प्रक्रिया शुरू
गरीब और गर्भवती महिलाओं से जुड़ी महत्वाकांक्षी 'जननी सुरक्षा योजना' (JSY) के तहत भुगतान में हो रही अनावश्यक देरी को कलेक्टर ने बेहद अमानवीय और गंभीर लापरवाही माना। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत जिले में पदस्थ अकाउंट मैनेजर द्वारा भुगतानों को महीनों लटकाए रखने का मामला जब बैठक में उठा, तो प्रशासनिक अमला भी सन्न रह गया। कलेक्टर ने तुरंत प्रभाव से संबंधित अकाउंट मैनेजर को कारण बताओ नोटिस जारी करने के साथ-साथ उनकी सेवा समाप्ति की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश भी दे दिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि जनहित से जुड़ी योजनाओं में डीबीटी और अन्य वित्तीय भुगतानों को जानबूझकर रोकना या उनमें देरी करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।
एमपीईबी और अन्य विभागों पर भी लगी पेनल्टी
बैठक में केवल प्रशासनिक और स्वास्थ्य विभाग ही नहीं, बल्कि बिजली विभाग (MPEB), सामाजिक न्याय विभाग, और योजना एवं सांख्यिकी विभाग से जुड़े लंबित मामलों की भी चीर-फाड़ की गई। जिन मामलों में बिना किसी ठोस और न्यायसंगत कारण के फाइलें अटकाई गई थीं, उन विभागों के जिम्मेदार अधिकारियों पर पेनल्टी लगाने के निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टर प्रतिभा पाल ने चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में भी इसी तरह की कार्यशैली जारी रही, तो डिमोशन और निलंबन जैसी बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करने में भी संकोच नहीं किया जाएगा।
निष्कर्ष: जनता के कामों में अब नहीं चलेगी हीला-हवाली
सागर जिले में जिला कलेक्टर के इस सख्त तेवर ने यह साबित कर दिया है कि प्रशासनिक अमले को अब जनता के प्रति जवाबदेह होना ही पड़ेगा। जिस प्रकार से एक के बाद एक कई बड़े अधिकारियों और मैदानी अमले पर शिकंजा कसा गया है, उससे पूरे जिले के सरकारी कार्यालयों में हड़कंप की स्थिति है। जनता उम्मीद कर रही है कि इस प्रशासनिक सख्ती के बाद अब उनके अटके हुए काम समय पर पूरे हो सकेंगे और सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी बाधा के वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंच पाएगा।